नई दिल्ली: सुरक्षा बलों ने मंगलवार को झारखंड में फरार चल रहे आखिरी बड़े माओवादी नेता मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्य बेसरा ही ऐसे इकलौते नक्सली नेता थे, जो अब तक सुरक्षा बलों की पकड़ से बचे हुए थे.
झारखंड जगुआर के इंस्पेक्टर जनरल अनूप बिरथरे ने दिप्रिंट को बेसरा की गिरफ्तारी की पुष्टि की. राज्य पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (CoBRA) की संयुक्त टीम ने राज्य के धनबाद-गिरिडीह बॉर्डर पर एक वाहन से दो अन्य वरिष्ठ नेताओं मोचू और गौरव को भी गिरफ्तार किया.
बेसरा के झारखंड पुलिस की हिरासत में आने के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो दोनों ही अब निष्क्रिय हो गए हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो इस घटनाक्रम के साथ देश में माओवादी आंदोलन का अंत माना जा रहा है.
यह गिरफ्तारी उस बयान के कुछ महीनों बाद हुई है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि माओवादी आंदोलन का सशस्त्र हिस्सा देश से खत्म हो चुका है. वामपंथी उग्रवाद (LWE) को खत्म करने की तय समय सीमा से पहले इस साल मार्च में शाह ने कहा था कि संगठन की शीर्ष निर्णय लेने वाली इकाइयों में पहले 21 सदस्य थे, लेकिन अब सिर्फ दो ही बचे हैं. शाह ने लोकसभा में कहा था, “माओवादियों के सभी प्रमुख हथियारबंद कैडर खत्म कर दिए गए हैं.”
यह गिरफ्तारी झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी कामयाबी भी मानी जा रही है, क्योंकि बेसरा ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की संभावना लगभग खत्म कर दी थी. दिप्रिंट ने अप्रैल में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि बेसरा के भाई, बेटे और दामाद की अपील भी उसे सारंडा के जंगल से बाहर आकर हथियार डालने के लिए नहीं मना सकी थी. बेसरा इससे पहले पश्चिम सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में झारखंड जगुआर और CoBRA के कई अभियानों से बच निकलने में कामयाब रहा था.
झारखंड पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, लगातार मुठभेड़ों के बाद बेसरा सारंडा से निकलकर गिरिडीह की ओर जा रहा था. इसी दौरान सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
गिरिडीह के रहने वाले बेसरा छात्र जीवन में ही वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हो गए थे. उनके कॉलेज के दिनों में गिरिडीह और आसपास के गांवों में जमींदारों के खिलाफ आंदोलन चल रहा था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 1980 के शुरुआती वर्षों में बेसरा ने उस समय के वरिष्ठ माओवादी नेता प्रशांत बोस के साथ मिलकर गांव-गांव जाकर माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) की विचारधारा का प्रचार किया और सशस्त्र विद्रोह की नींव रखी.
MCCI बाद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का आधार बना. सितंबर 2004 में MCCI और आंध्र प्रदेश में सक्रिय पीपुल्स वार ग्रुप के विलय के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का गठन हुआ.
मंगलवार की गिरफ्तारी से पहले भी बेसरा सितंबर 2007 में झारखंड पुलिस के हाथ लग चुका था. उस समय राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग पर गश्त के दौरान उसे पकड़ा गया था. लेकिन दो साल बाद बिहार के लखीसराय जिले में उस समय वह फरार हो गया, जब बिहार पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर अदालत ले जा रही थी और माओवादियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था.
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