पणजी, 17 अप्रैल (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने गोवा के नगर एवं ग्राम नियोजन बोर्ड को निर्देश दिया है कि ‘फ्लोर एरिया’ अनुपात (एफएआर) और ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति से जुड़े सभी लंबित और भविष्य के आवेदनों को एक विचाराधीन मामले में फैसले के अधीन चिह्नित किया जाए।
एफएआर किसी इमारत के कुल निर्मित क्षेत्रफल और उस भूखंड के क्षेत्रफल के बीच का अनुपात है, जिस पर वह इमारत बनी है।
न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेज़ेस और न्यायमूर्ति अमित एस. जामसांडेकर की खंडपीठ ने ये निर्देश जारी किए। उसने पाया कि बोर्ड के समक्ष वर्तमान में 255 आवेदन लंबित हैं। अदालत ने राज्य में भवन विनियमों में संशोधनों के खिलाफ दायर जनहित याचिका में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने बुधवार को आदेश दिया कि इन सभी आवेदकों, साथ ही भविष्य में आवेदन करने वालों को भी यह बताया जाए कि गोवा भूमि विकास और भवन निर्माण विनियम, 2010 के संशोधित विनियम 6.1.1 को चुनौती देने वाली याचिका लंबित है, जिसके तहत निर्माण के लिए अतिरिक्त फ्लोर एरिया अनुपात (एफएआर) प्रदान किया गया है।
गोवा में एफएआर निर्माण घनत्व को नियंत्रित करता है, जिसमें भूखंड के आकार के अनुपात में अधिकतम निर्माण क्षेत्र निर्धारित किया जाता है।
खंडपीठ ने कहा कि यदि अनुमति दी जाती है, तो आदेशों में स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि वे याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन आवेदकों के प्रस्ताव स्वीकृत हो जाते हैं, वे इन अनुमतियों के आधार पर अधिकार का कोई दावा नहीं कर सकते, क्योंकि स्वयं इस प्रावधान की वैधता ही चुनौती के अधीन है।
ये निर्देश तब दिए गए जब अदालत ने गैर सरकारी संगठन गोवा फाउंडेशन और अन्य द्वारा मांगी गई अंतरिम राहत को खारिज कर दिया, जिन्होंने अगस्त 2023 में अधिसूचित संशोधन को मूल कानून के परे बताया है।
याचिकाकर्ताओं ने एफएआर और ऊंचाई में दी जा रही अतिरिक्त छूट पर रोक लगाए जाने का अनुरोध किया है।
गोवा फाउंडेशन ने यह भी अनुरोध किया था कि यदि इन अनुमतियों के आधार पर निर्माण शुरू नहीं हुआ है या पूरा नहीं हुआ है, तो आगे कोई निर्माण की अनुमति न दी जाए।
मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।
भाषा गोला सिम्मी
सिम्मी
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