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Wednesday, 27 May, 2026
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पेशेवर दायित्व का निर्वाह करने के लिए अधिवक्ता पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता

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प्रयागराज, 27 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि अधिवक्ताओं पर उनके पेशेवर दायित्व का निर्वाह करने के लिए आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

आपराधिक मुकदमा रद्द करते हुए अदालत ने कहा कि पेशेवर कार्यों के लिए अधिवक्ताओं पर मुकदमा चलाने का अर्थ होगा बार (विधि पेशा) की समाप्ति।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए जीएसटी के एक मामले में मुवक्किल के साथ षड़यंत्र करने के आरोपी एक अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक मुकदमा रद्द कर दिया।

अदालत ने 21 मई के अपने आदेश में कहा, ‘‘अपील दायर करने जैसे एक पेशेवर कार्य के लिए यदि अधिवक्ता को अपने मुवक्किल के साथ षड़यंत्र रचने का दोषी ठहराया जाता है तो यह बार के अस्तित्व को ही खत्म कर देगा। साथ ही परोक्ष रूप से यह नागरिकों को कानूनी सहायता के अधिकार से वंचित कर देगा क्योंकि अपने मुवक्किल का बचाव करने वाला व्यक्ति अपने खुद के बचाव के बारे में सोचेगा।’’

यह मामला कुछ जीएसटी आकलन आदेशों के खिलाफ अपने मुवक्किल की ओर से अपील दायर करने से पैदा हुआ। अपील दाखिल करते हुए विवादित कर का 10 प्रतिशत हिस्सा पहले जमा करने की अनिवार्यता के मद्देनजर अधिवक्ता ने मुवक्किल के इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट का उपयोग करते हुए यह हिस्सा जमा किया।

हालांकि, जीएसटी अधिकारियों ने इस दृष्टिकोण से असहमति जताई और पोषणीयता के आधार पर यह अपील खारिज कर दी गई। उपायुक्त ने कर चोरी और षड़यंत्र का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई जिसमें ना केवल करदाता, बल्कि उसके अधिवक्ता को भी नामजद किया गया। इसलिए अधिवक्ता समर्पण जैन ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

भाषा सं राजेंद्र शोभना

शोभना

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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