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Saturday, 19 September, 2026
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एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली फ्लाइट मामला: सभी पायलटों का हर साल रैंडम ड्रग टेस्ट कराने पर DGCA का विचार

रेगुलेटर मौजूदा नियम में बदलाव की ज़रूरत को लेकर हितधारकों से बात कर रहा है. अभी हर साल 10% पायलटों का ड्रग टेस्ट होता है. यह कदम 4 अगस्त की एयर इंडिया फ्लाइट के पायलट के मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद उठाया गया है.

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नई दिल्ली: चार अगस्त को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट उड़ाने वाले कैप्टन के मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव आने के कुछ हफ्तों बाद, भारतीय सरकार पायलटों का हर साल 100 प्रतिशत ड्रग टेस्ट कराने पर विचार कर रही है. इसके तहत हर पायलट का साल में कम से कम एक बार रैंडम ड्रग टेस्ट किया जा सकता है.

मौजूदा डीजीसीए रूल्स के मुताबिक, हर साल पायलटों के कुल नेटवर्क में से 10 प्रतिशत का ड्रग टेस्ट करना ज़रूरी है. अब रेगुलेटर एयरलाइंस, पायलट संगठनों और दूसरे हितधारकों से इस बात पर चर्चा कर रहा है कि क्या हर पायलट का साल में कम से कम एक बार टेस्ट किया जाना चाहिए.

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने मंगलवार को कहा, “इस ड्रग टेस्ट को करने के कई तरीके हो सकते हैं. अभी नियम कहता है कि पूरे पायलट नेटवर्क में से 10 प्रतिशत का टेस्ट किया जाए. डीजीसीए इस पर चर्चा कर रहा है और हमारी तरफ से एक राय यह है कि साल में किसी भी रैंडम समय पर सभी पायलटों का टेस्ट होना चाहिए.”

दिल्ली में जीएमआर और FedEx की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार को सभी पायलटों का टेस्ट कराने से विमानन सुरक्षा और कामकाज पर पड़ने वाले असर के बीच संतुलन बनाना होगा. उन्होंने कहा, “हमें देखना होगा कि सभी हितधारक इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, क्योंकि एक तरफ सुरक्षा का मुद्दा है और दूसरी तरफ कामकाज पर पड़ने वाला असर भी है, जिसे ध्यान में रखना होगा.”

चार अगस्त को एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379, जिसमें 137 यात्री और चालक दल के आठ सदस्य सवार थे, फुकेत से दिल्ली जाते समय अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गई थी. अचानक नीचे आने से यात्री और चालक दल के लोग केबिन में इधर-उधर गिर गए. इस घटना में 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य घायल हुए. इसके बाद विमान ने खुद को संभाला और दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग की.

घटना के बाद दोनों पायलटों का अनिवार्य साइकोएक्टिव पदार्थों का टेस्ट किया गया. सूत्रों के मुताबिक, कैप्टन के शुरुआती टेस्ट में कन्फर्म टेस्ट की जरूरत पड़ी और कन्फर्म टेस्ट में मारिजुआना की पुष्टि हुई. इसके बाद उन्हें फ्लाइट ड्यूटी से हटा दिया गया.

टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद भारत में मौजूदा रैंडम ड्रग टेस्ट व्यवस्था पर फिर सवाल उठे हैं. इस व्यवस्था के तहत हर साल पायलटों के नेटवर्क में से केवल 10 प्रतिशत का टेस्ट किया जाता है.

इसके बाद एयर इंडिया ने अपने पूरे ग्रुप के पायलटों का उन पदार्थों और दवाओं के लिए ड्रग टेस्ट कराने का आदेश दिया है, जो मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधित हैं.

फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की घटना की जांच Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) कर रहा है और इसकी रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है. इससे पहले इस घटना को ‘गंभीर’ बताया गया था. अभी तक कैप्टन के ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने को विमान के ऊंचाई खोने की वजह नहीं माना गया है.

जांचकर्ता तकनीकी खराबी की संभावना की भी जांच कर रहे हैं. एयरबस के शुरुआती विश्लेषण में पता चला कि विमान में कुछ समय के लिए हाइड्रोलिक प्रेशर कम हो गया था, जिससे उड़ान को नियंत्रित करने वाले जरूरी सिस्टम प्रभावित हुए थे. बाद में ये सिस्टम फिर ठीक हो गए. तकनीकी जांच के नतीजों को भी पूरी जांच का हिस्सा बनाया गया है, ताकि विमान के अचानक नीचे आने की वजह का पता लगाया जा सके.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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