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Thursday, 8 October, 2026
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जंतर मंतर 2.0 से पहले दिल्ली पुलिस की नई FIR, 20 जुलाई हिंसा की जांच

पुलिस के मुताबिक, SC ने 17 FIR रद्द कर हिंसा की जांच के लिए 1 FIR दर्ज करने की अनुमति दी थी. आपराधिक साजिश, साझा इरादा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और दंगा करने से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं.

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान 20 जुलाई को हुई हिंसा के मामले में एक नई FIR दर्ज की.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने 17 FIR रद्द कर दी थीं और दिल्ली पुलिस को हिंसा की जांच के लिए एक FIR दर्ज करने की अनुमति दी थी. उस आदेश के बाद हमारी जांच शुरू हो गई है.”

जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना होगा कि हिंसा “पहले से तय” थी या नहीं. अधिकारी ने कहा कि घटनाओं का क्रम, वहां मौजूद लोगों की भूमिका और उस दौरान हुए संदेशों को फिर से समझने की कोशिश की जाएगी.

FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई है. इनमें आपराधिक साजिश, साझा इरादा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, तोड़फोड़ और दंगा करने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं.

दिल्ली पुलिस ने इससे पहले एक हलफनामे में कहा था कि उसने Facial Recognition System के जरिए 20 जुलाई की हिंसा के दौरान मौजूद 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था.

अधिकारी ने कहा, “हम जांच करेंगे कि उन्होंने क्या भूमिका निभाई, क्या उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहा गया था या वे अपनी इच्छा से इसमें शामिल हुए और हिंसा में हिस्सा लिया.”

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि 20 जुलाई को सेंट्रल दिल्ली में हुई हिंसा के पीछे “उकसाने वालों” की पहचान करने के लिए FIR दर्ज की गई है.

अधिकारी ने कहा, “20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात कई अधिकारी घायल हुए, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया.” पुलिस ने इन सभी घटनाओं को ध्यान में लिया है.

20 जुलाई को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह झड़पें हुई थीं. इनमें कुछ जगह पत्थरबाजी भी हुई थी. वहीं, दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स को निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल करने और आंसू गैस व लाठीचार्ज करने को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था.

यह नई FIR ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया), सीजेपी और कई अन्य वामपंथी संगठन, साथ ही नागरिक समाज के सदस्य, दो दिन बाद ‘जंतर मंतर 2.0’ का आह्वान कर चुके हैं. इसका मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दबाव बनाना है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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