scorecardresearch
Sunday, 4 October, 2026
होमदेशपंजाब में तथाकथित शिक्षा क्रांति की पोल खोल रहे ‘आप’ के अपने विधायक : तरुण चुग

पंजाब में तथाकथित शिक्षा क्रांति की पोल खोल रहे ‘आप’ के अपने विधायक : तरुण चुग

Text Size:

चंडीगढ़, चार अक्टूबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य तरुण चुग ने रविवार को दावा किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की तथाकथित शिक्षा क्रांति की पोल सत्तारूढ़ दल के अपने ही एक विधायक ने खोल दी है।

आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना ने पार्टी के नेतृत्व और पंजाब सरकार पर उनके गृह विधानसभा क्षेत्र मौर में कुछ सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के मुद्दे का समाधान नहीं करने का आरोप लगाया था, जिसके एक दिन बाद चुग की यह टिप्पणी आई।

‘आप’ ने मैसरखाना के आरोपों को खारिज कर दिया और उन्हें ‘‘पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता’’ के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया।

मैसरखाना ने ‘फेसबुक’ पर कहा कि शिक्षकों की कमी से जुड़ी अपनी शिकायत का समाधान नहीं होने से परेशान होकर उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया।

चुग ने कहा कि जब सरकार का अपना विधायक ही सरकारी विद्यालयों की स्थिति पर सवाल उठाता है, तो यह ‘आप’ सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को ‘‘उजागर’’ करता है।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘पंजाब में ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जहां छात्रों के बैठने के लिए बेंच नहीं हैं, स्कूल भवनों की छतें ठीक नहीं हैं और कई जगह बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘यह वही पार्टी है, जो शिक्षा क्रांति के बड़े-बड़े दावे करके सत्ता में आई थी। आज शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं और उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।’’

उन्होंने कहा कि यह स्थिति पंजाब में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

चुग ने कहा कि कर्मचारियों, शिक्षकों और समाज के अन्य वर्गों को अपनी जायज मांगें शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का अधिकार है और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रदर्शनों से कानून के दायरे में व संयम के साथ निपटा जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘कानून-व्यवस्था का मतलब केवल अपराध पर नियंत्रण करना नहीं है। इसका मतलब नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उचित प्रक्रिया का पालन करना और शांतिपूर्ण तरीके से असहमति जताने के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करना भी है।’’

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments