नई दिल्ली: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में भारत-नेपाल सीमा से सटे चम्पावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में पहली बार राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित हुई. बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी आयोजित की जाएंगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य शासन और जनता के बीच की दूरी कम करना तथा स्थानीय समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे सरकार के सामने लाना है. उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं. सरकार इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर काम कर रही है.
धामी ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित होने से स्थानीय परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं को करीब से समझने में मदद मिलेगी. इससे क्षेत्र विशेष से जुड़े विषयों पर त्वरित निर्णय लेने का रास्ता भी खुलेगा.
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों को देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी पारंपरिक ‘फर्रा/छन्तोली’ भेंट की गई. बांस या रिंगाल की खपच्चियों से बनी यह ढाल देवभूमि की लोक संस्कृति और सीमांत क्षेत्र की विशिष्ट पहचान का प्रतीक है.