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Friday, 23 October, 2026
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‘एलन मस्क भारत छोड़ो’: RSS से जुड़े संगठन का स्टारलिंक के खिलाफ प्रदर्शन

स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित यह मार्च तीन मूर्ति चौक से शुरू होकर चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन की ओर बढ़ा.

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नई दिल्ली: शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस के बैरिकेड्स पर खड़े होकर और सिर के ऊपर तख्तियां उठाकर एलन मस्क को एक संदेश दिया. भारत में स्टारलिंक को आने मत दो.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने इस मार्च का आयोजन किया था. मार्च तीन मूर्ति चौक से शुरू हुआ और चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन की ओर बढ़ा. वहां पुलिस के बैरिकेड्स की वजह से प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने “स्टारलिंक डाउन डाउन”, “एलन मस्क होश में आओ” और “एलन मस्क भारत छोड़ो” जैसे नारे लगाए. उन्होंने सरकार से अरबपति एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को भारतीय बाजार में आने से रोकने की मांग की.

प्रदर्शनकारियों के लिए यह मुद्दा सिर्फ एक और विदेशी कंपनी के भारतीय टेलीकॉम कंपनियों से मुकाबला करने तक सीमित नहीं था. उनका कहना था कि स्टारलिंक का सैटेलाइट आधारित इंटरनेट नेटवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है और देश की डिजिटल संप्रभुता को कमजोर कर सकता है.

SJM से जुड़े और रेस्टोरेंट चलाने वाले राजेश चोरंगी ने प्रचार से जुड़ी एक चिंता उठाई. उन्होंने कहा कि सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए चीन और पाकिस्तान से आने वाले संदेश भारतीय यूजर्स तक पहुंच सकते हैं. उनका मानना था कि इससे दुष्प्रचार फैलाने का रास्ता खुल सकता है.

उन्होंने कहा, “आज हमारे फोन पर चीन और पाकिस्तान से संदेश नहीं आते हैं. अगर स्टारलिंक आ गया, तो ये संदेश आने लगेंगे और दुष्प्रचार शुरू हो जाएगा. हमारा नेटवर्क सुरक्षित होना चाहिए और हमारी सरकार के हाथों में होना चाहिए.”

Some at the protest connect Starlink to broader tensions in India-US trade relations, while others highlight concerns around digital sovereignty | Vitasta Kaul | ThePrint
प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग स्टारलिंक को भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में चल रहे बड़े तनाव से जोड़ते हैं, जबकि कुछ अन्य डिजिटल संप्रभुता से जुड़ी चिंताओं को सामने रखते हैं. | वितस्ता कौल | दिप्रिंट

उन्होंने कहा कि भारत को मस्क को देश के इंटरनेट बाजार में जगह देने के बजाय अपनी घरेलू टेलीकॉम कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “एलन मस्क खुद को भारत सरकार से भी बड़ा समझ रहे हैं. स्टारलिंक नेटवर्क की बात करें, तो हमारे पास पहले से ही भारतीय कंपनियां हैं, जो नेटवर्क सेवाएं दे रही हैं. उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए.”

चोरंगी ने स्टारलिंक का विरोध भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में चल रहे बड़े तनाव से भी जोड़ा. उनका कहना था कि अमेरिका की टैरिफ नीतियों से भारतीय कारोबारियों को नुकसान हुआ है.

उन्होंने कहा, “अगर हम उन्हें अपना इंटरनेट बाजार भी दे देंगे, तो सोचिए कि वे हमारे साथ क्या करेंगे.”

वह इस बात के भी खिलाफ हैं कि मस्क स्टारलिंक से होने वाला मुनाफा अमेरिका ले जाएं.

उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, अगर रिलायंस को मुनाफा होता है, तो पैसा भारत में ही वापस आता है. लेकिन मस्क के मामले में वह पैसा अमेरिका ले जाएंगे.”

‘मस्क का घमंडी रवैया’

SJM की महिला शाखा की प्रमुख कामना शर्मा, जो पैनल बनाने के काम से जुड़ी हैं, ने कहा कि यह प्रदर्शन विदेशी कंपनियों से घरेलू उत्पादों और कारोबार को बचाने के लिए भी था.

उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि भारत में हमारी स्वदेशी चीजों का इस्तेमाल हो. वे हमारी स्वदेशी चीजों पर कब्जा कर लेंगे. हम ऐसा नहीं होने देना चाहते. हम चाहते हैं कि भारतीय उत्पादों को फायदा मिले.”

SJM ने सवाल उठाया है कि क्या स्टारलिंक का नेटवर्क भारतीय अधिकारियों के लिए किसी खास इलाके में इंटरनेट पर पाबंदी लगाना और संचार पर “कानूनी तरीके से निगरानी” करना मुश्किल बना सकता है. डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले वैश्विक संगठन एक्सेस नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2025 के दौरान 65 बार इंटरनेट बंद किया गया था.

संगठन का यह भी कहना है कि सरकार के पास महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे का नियंत्रण रहना चाहिए, न कि उसे किसी विदेशी कंपनी पर निर्भर होना चाहिए.

यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर मस्क और भारतीय कारोबारी समूहों के बीच सार्वजनिक रूप से बयानबाजी चल रही है.

मस्क ने X पर लिखा, “प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी, कृपया मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि मुझे यह समझ नहीं आया कि भारत के असली बॉस आप हैं.”

मस्क ने आरोप लगाया है कि भारतीय कारोबारी समूह अपने बाजार पर दबदबा बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की सेवा शुरू होने में रुकावट डालने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, कंपनी की व्यावसायिक सेवा शुरू होने के लिए सुरक्षा जांच और स्पेक्ट्रम आवंटन समेत कई नियामक शर्तों को पूरा करना अभी बाकी है.

BJP से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट राकेश खन्ना ने कहा कि यह प्रदर्शन जरूरी नहीं कि भारत में काम करने वाली सभी विदेशी कंपनियों के खिलाफ हो. उनके मुताबिक, यह विरोध मस्क के रवैये और स्टारलिंक की तकनीक से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरों को लेकर है.

उन्होंने कहा, “हम यहां स्टारलिंक के घमंडी मालिक एलन मस्क के खिलाफ प्रदर्शन करने आए हैं. हमें स्टारलिंक से कोई खास समस्या नहीं है, क्योंकि सरकार पहले ही उनके साथ वैश्विक व्यापार समझौता कर चुकी है. हम विश्व व्यापार संगठन (WTO) का हिस्सा हैं, इसलिए हम किसी भी संगठन को सीधे खारिज नहीं कर सकते.”

खन्ना ने कहा कि स्टारलिंक का सैटेलाइट नेटवर्क संचार व्यवस्था और रेडियो फ्रीक्वेंसी पर नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े करता है. उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि कंपनी के फैसलों की वजह से यूक्रेन को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था.

उन्होंने कहा, “इस कंपनी का पिछला रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है. रूस और यूक्रेन के संघर्ष के दौरान उन्होंने यूक्रेन की बात नहीं मानी, जिसकी वजह से देश को काफी परेशानी हुई. दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के साथ भी यही समस्या रही है. इन बातों को देखते हुए हमें अपनी सुरक्षा का बहुत अच्छी तरह ध्यान रखना होगा.”

SJM का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर स्टारलिंक किसी खास इलाके में अपनी सेवाएं रोक सके, खासकर कानून-व्यवस्था से जुड़ी आपात स्थितियों में. ये संगठन की ओर से उठाई गई चिंताएं हैं, न कि भारत में स्टारलिंक के कामकाज को लेकर साबित हो चुके तथ्य.

खन्ना ने इस प्रदर्शन को भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में मस्क की सार्वजनिक टिप्पणियों से भी जोड़ा. उनका कहना था कि अरबपति मस्क की इन टिप्पणियों ने लोगों की नाराजगी और बढ़ा दी है.

उन्होंने कहा, “एलन मस्क सिर्फ इसलिए कि वह घमंडी हैं और दुनिया के सबसे अमीर आदमी हैं, यह सोचते हैं कि सब कुछ उनके हिसाब से होना चाहिए.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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