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Friday, 23 October, 2026
होमविदेश14 भारतीय नाविकों को लाल सागर से बचाया गया, हूती-नियंत्रित यमन के प्रांत के पास सुरक्षित

14 भारतीय नाविकों को लाल सागर से बचाया गया, हूती-नियंत्रित यमन के प्रांत के पास सुरक्षित

ईरान समर्थित मिलिशिया, हूती ने दावा किया है कि उसने 'सऊदी अरब द्वारा निशाना बनाई गई' एक नौका से 14 भारतीयों को बचाया है. भारत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'स्थानीय अधिकारियों' के संपर्क में है.

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नई दिल्ली: गुरुवार देर रात एक क्षतिग्रस्त यॉट से बचाए गए सभी 14 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और यमन में हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले होदेइदाह के आसपास मौजूद हैं. यमन में भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की. पता चला है कि देश में मौजूदा संघर्ष को देखते हुए भारतीय अधिकारी उनकी स्थिति को लेकर स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं.

यमन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान में कहा, “रिपोर्टों के मुताबिक, सभी 14 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और यमन में होदेइदाह के आसपास मौजूद हैं. हम उनकी सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम करते रहेंगे.”

दूतावास ने एक अलग बयान में बताया कि ये 14 भारतीय यॉट पर “नाविक” के तौर पर सवार थे. दूतावास ने कहा कि “घटना की परिस्थितियों और तथ्यों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. हमें उम्मीद है कि पुख्ता जानकारी मिलते ही हम जल्द ही इसकी जानकारी देंगे.”

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का रेड सी (लाल सागर) के तट पर स्थित होदेइदाह गवर्नरेट के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है. गवर्नरेट यमन में राज्यों के बराबर प्रशासनिक क्षेत्र होता है. खास तौर पर इस इलाके के बंदरगाह हूतियों के नियंत्रण में हैं. यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सैन्य चौकियां होदेइदाह के दक्षिण में ताइज़ गवर्नरेट में स्थित हैं. होदेइदाह से करीब 240 किलोमीटर दूर ताइज़ शहर इस समय हूती लड़ाकों की घेराबंदी में है. देश में पिछले महीने लड़ाई शुरू होने के बाद से यह स्थिति बनी हुई है.

भारत यमन की उस सरकार को मान्यता देता है, जो 2014 में हूतियों के राजधानी सना पर कब्जा करने के बाद से अदन से काम कर रही है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इस सरकार को सऊदी अरब और दूसरे अरब देशों के गठबंधन का समर्थन हासिल है.

यमन में हूतियों ने गुरुवार को दावा किया कि वे रेड सी में जुकर द्वीप के पास सऊदी अरब द्वारा कथित तौर पर निशाना बनाए गए एक यॉट से 14 भारतीयों को बचाने की प्रक्रिया में थे. भारत सरकार अभी इस घटना की जांच कर रही है, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि यॉट पर हमला आखिर किसने किया था.

हूतियों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर याह्या सरी ने X पर एक बयान में कहा, “शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सऊदी दुश्मन जुकर द्वीप के पास एक भारतीय यॉट को निशाना बना रहा है, जिस पर भारतीय नागरिकता वाले 14 लोग सवार हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “यमनी सशस्त्र बल उन्हें बचा रहे हैं और बाद में इस बारे में और जानकारी देंगे. सऊदी दुश्मन की ओर से इस तरह यॉट को निशाना बनाने की यह लापरवाही रेड सी में अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए खतरा है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सऊदी दुश्मन को ऐसी लापरवाही भरी कार्रवाई करने से रोकना चाहिए.”

बढ़ता तनाव

हूती विद्रोही पिछले करीब 11 साल से सऊदी अरब की राजधानी रियाद और एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ युद्ध में उलझे हुए हैं. ईरान समर्थित इस समूह का उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार अदन से काम करती है.

यह ताजा घटना ऐसे समय हुई है, जब भारत ने गुरुवार को सऊदी अरब के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हूतियों की ओर से लगातार किए जा रहे हमलों की निंदा की थी. बुधवार को दम्माम में किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में कम से कम एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी.

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “हम 21 अक्टूबर को सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हैं. इनमें दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और पूर्वी प्रांत में सऊदी अरामको के शैबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले शामिल हैं. इन हमलों में दुर्भाग्य से आम नागरिकों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं.”

बयान में आगे कहा गया, “दम्माम हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. वहीं, शैबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले में एक और भारतीय नागरिक घायल हुआ. हम मृतक के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना करते हैं. रियाद में भारतीय दूतावास सऊदी अधिकारियों के संपर्क में है और हर संभव मदद देगा.”

नई दिल्ली ने सभी पक्षों से नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने की अपील की और इस बात पर जोर दिया कि भारत “सऊदी अरब की सरकार के साथ मजबूती से खड़ा है.” सऊदी अरब और हूतियों के बीच युद्ध तेज होने की घटनाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब पश्चिम एशिया पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के असर से जूझ रहा है.

हूतियों को अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है. यमन में चल रहे गृहयुद्ध के दोनों पक्षों के बीच करीब चार साल तक युद्धविराम बना रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह तेजी से टूट गया. हूतियों ने 10 सितंबर 2026 को रणनीतिक रूप से अहम मोखा बंदरगाह पर कब्जा करने की कोशिश की. इससे उन्हें बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर बेहतर नियंत्रण मिल सकता है. यह जलडमरूमध्य रेड सी को अदन की खाड़ी से जोड़ता है.

अगस्त के अंत से अब तक करीब 2,60,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं. हूती विद्रोही इस समय ताइज़ शहर की घेराबंदी किए हुए हैं, जहां करीब 10 लाख लोग रहते हैं. यमन की सरकार ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र को दिए एक बयान में कहा कि पूरे ताइज़ गवर्नरेट में करीब 40 लाख लोग रहते हैं और वे इस समय मानवीय संकट के खतरे का सामना कर रहे हैं.

फरवरी के अंत से पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद होने के बाद सऊदी अरब का तेल रेड सी के रास्ते भेजा जा रहा है. रेड सी इस खाड़ी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है.

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने अगले महीने ईरान पर हमले जारी रखने की योजनाएं बनाई हैं. पश्चिम एशिया में भारतीय समुदाय की आबादी 90 लाख से ज्यादा है. अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को पुष्टि की कि उसने सऊदी अरब में तैनात अपने उन सभी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया है, जिनकी सेवाएं आपात स्थिति से जुड़ी नहीं हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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