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Saturday, 17 October, 2026
होमदेशचोरी के मोबाइल को लेकर बटाला में हत्या, पंजाब पुलिस ने नशे का एंगल नकारा

चोरी के मोबाइल को लेकर बटाला में हत्या, पंजाब पुलिस ने नशे का एंगल नकारा

पंजाब पुलिस का कहना है कि बटाला में जानलेवा झड़प नशे के कारोबार को लेकर दुश्मनी के कारण नहीं, बल्कि मोबाइल फोन के विवाद के कारण हुई. पंजाब में नशे के मुद्दे पर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच हुई इस हत्या पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी ध्यान दिया है.

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नई दिल्ली: पंजाब पुलिस ने बटाला के मरी पनवां गांव में हुए जानलेवा हमले के नशे के कारोबारियों से जुड़े होने के दावों को खारिज कर दिया है. पुलिस का कहना है कि यह झड़प मोबाइल फोन को लेकर हुए विवाद के कारण हुई थी. बिक्रमजीत सिंह की हत्या और दो अन्य लोगों के घायल होने के मामले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी ध्यान दिया है. यह सब पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच हुआ है.

तीनों लोगों पर नशे के कारोबारियों के एक समूह द्वारा हमला किए जाने की खबरों के बाद यह मामला कुछ ही घंटों में बड़े विवाद में बदल गया. इसके बाद बटाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेहताब सिंह ने कहा कि विवाद गांव के ही एक अन्य व्यक्ति जग रूप सिंह के मोबाइल फोन को लेकर शुरू हुआ था.

आरोपी प्रिंस और कालू को गांव के लोग ऐसे लोगों के रूप में जानते थे, जो मोबाइल फोन चुराते थे, नशे का कारोबार करते थे और दूसरी गैरकानूनी गतिविधियों में भी शामिल थे. इस मामले में जगरूप को शक था कि प्रिंस ने उसका फोन चुराया है. इसी बात पर झगड़ा हो गया. जब वे जगरूप से बात करने और उसका सामना करने पहुंचे, तो उसके पड़ोसी भी बाहर आ गए. इसके बाद बिक्रमजीत की हत्या हो गई और निशान सिंह तथा गुरमुख सिंह घायल हो गए.

यह हिंसा राज्य के मानसा जिले में नशे के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े हत्या के कुछ दिन बाद हुई. झोटा की हत्या की व्यापक निंदा हुई थी और लोगों में गुस्सा था. खासकर विपक्षी नेताओं ने इस घटना की कड़ी आलोचना की थी.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में नशे के गिरोहों पर लगाम लगाने में नाकाम रहने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और खुद भगवंत मान ने इस आरोप को खारिज किया.

शाह के यह कहने के कुछ ही घंटों बाद कि केंद्रीय गृह मंत्रालय बिक्रमजीत की हत्या की घटना की जानकारी मांगेगा, मंत्रालय ने पंजाब के मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा से रिपोर्ट मांगी. गृह मंत्रालय ने इसी तरह के शब्दों में पत्र भेजकर मानसा में झोटा की हत्या और पिछले महीने संगरूर जिले में गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या के मामले में भी जानकारी मांगी. गुलजार सिंह ने नशे पर लगाम लगाने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री और दिर्बा के विधायक हरपाल सिंह चीमा से सवाल किए थे.

एफआईआर में क्या कहा गया है?

अपने बयान में बटाला के एसएसपी सिंह ने कहा कि बिक्रमजीत सिंह की मौत धारदार हथियार से लगी चोटों के कारण हुई. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 के तहत एफआईआर दर्ज की है. यह धारा हत्या के अपराध से जुड़ी है.

एफआईआर की एक कॉपी दिप्रिंट ने देखी है. यह एफआईआर घायलों में से एक निशान सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई. निशान को बटाला के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अपनी शिकायत में निशान ने आरोप लगाया कि वह मरी पनवां गांव में अपने परिवार के साथ घर पर था. तभी उसने बाहर गली में गाली-गलौज और धमकियां देने की आवाज़ें सुनीं. इसके बाद वह घर से बाहर निकला.

उसने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि उसने गांव के लोगों जगराज सिंह उर्फ कालू और प्रिंस को देखा. उनके साथ दो और लोग थे. उनके हाथों में एक गंडासा, एक डंडा, एक दरांती और एक चाकू था. इस बीच, उसने बताया कि बिक्रमजीत सिंह, जगरूप सिंह उर्फ गोरा और वह खुद भी अपने-अपने घरों से बाहर आ गए. इसके बाद प्रिंस और उसके साथ आए लोगों ने मोबाइल फोन को लेकर जगरूप सिंह से सवाल-जवाब शुरू कर दिए.

निशान ने बताया कि उनके वहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद आठ से दस हथियारबंद लोग एक स्विफ्ट कार और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर वहां आ गए.

निशान ने पुलिस शिकायत में कहा, “हम मोहल्ले के लोगों ने जगरूप सिंह को उनसे बचाने की कोशिश की और उसे पीछे धकेल दिया. इसी दौरान प्रिंस ने उन्हें चुनौती देते हुए कहा कि जगरूप सिंह की मदद करने की कीमत उन्हें चखनी पड़ेगी और आज उसे बचकर नहीं निकलने देना चाहिए.”

निशान के बयान के मुताबिक, प्रिंस की इस धमकी के कुछ ही देर बाद हथियारबंद लोगों के समूह ने कथित तौर पर जगरूप सिंह और बिक्रमजीत सिंह को मारने के इरादे से गोलीबारी शुरू कर दी. निशान ने कहा कि जब हालात बिगड़ने लगे और गांव के और लोग घटनास्थल पर पहुंचने लगे, तो हमलावर वहां से भाग गए.

अस्पताल के बिस्तर से दी गई अपनी पुलिस शिकायत में निशान सिंह ने कहा कि हिंसा की वजह प्रिंस और जगरूप के बीच मोबाइल फोन को लेकर हुआ विवाद था.

उसने आगे शिकायत में कहा, “दुश्मनी की वजह यह है कि 14 अक्टूबर की रात प्रिंस, जगरूप का मोबाइल फोन उसके घर से ले गया था. 15 अक्टूबर की सुबह जगरूप ने प्रिंस से अपना मोबाइल फोन लौटाने को कहा, लेकिन प्रिंस ने मना कर दिया और उससे बहस करने लगा. इसी दुश्मनी के कारण प्रिंस ने बाहर से कुछ अनजान युवकों को लड़ाई करने के लिए बुलाया. उनका इरादा बिक्रमजीत, जगरूप, निशान सिंह और गुरमुख सिंह को मारने का था. उन्होंने गुरमुख सिंह और मुझे घायल किया और बिक्रमजीत सिंह की हत्या कर दी.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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