नई दिल्ली: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी और राज्यपाल शासन लगाए जाने के बाद, अशांत इलाके में करीब 4,000 पुलिसकर्मी अपनी मंजूर छुट्टी खत्म होने के बाद भी अपनी तय ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं.
यह तब हुआ जब ‘नवाईवक्त’ अखबार में अब हटाए जा चुके एक लेख के मुताबिक, KPK पुलिस ने शुक्रवार को सभी पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया था. ऐसा नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी.
इस बीच, संघीय सरकार ने प्रांत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नागरिक प्रशासन की मदद के लिए पाकिस्तान सेना के जवानों और संसाधनों की तैनाती को मंजूरी दे दी है.
क्षेत्रीय पुलिस अधिकारियों, जिला पुलिस अधिकारियों, उप-मंडल पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों को भेजे गए निर्देश में अधिकारियों ने कहा कि 3,986 पुलिसकर्मी तय समय के अनुसार ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं.
निर्देश में कहा गया कि इन पुलिसकर्मियों की गैर-मौजूदगी से संस्थागत अनुशासन और 2017 के खैबर पख्तूनख्वा पुलिस कानून और लागू अनुशासनात्मक नियमों के पालन को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है.
नए निर्देशों के तहत, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि पुलिसकर्मी अपनी तय ड्यूटी वाली जगहों पर रहें और काम से जुड़े आदेशों का पालन करें. निर्देश में छुट्टी केवल “बहुत गंभीर मानवीय आधार” पर देने की बात कही गई है.
निर्देश में यह भी चेतावनी दी गई है कि बिना अनुमति के ड्यूटी से गैर-मौजूद रहना, ड्यूटी छोड़ना, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश न मानना और कानूनी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करना गंभीर कदाचार माना जाएगा.
वरिष्ठ अधिकारियों को प्रांतीय पुलिस कानून की धारा 77 (पुलिस अधिकारियों या अन्य लोगों को जारी किए गए वारंट), 78 (पुलिसकर्मियों के आचरण से जुड़े नियम), 79 और 80 (ड्यूटी छोड़ना और इस्तीफा) लागू करने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही संबंधित अनुशासनात्मक नियमों को भी लागू करने को कहा गया है. नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ तय प्रक्रिया के तहत कानूनी या विभागीय कार्रवाई हो सकती है.
पुलिसकर्मियों की गैर-मौजूदगी से बढ़े सुरक्षा दबाव के बीच काम कर रहे प्रांतीय पुलिस बल में कर्मचारियों की संख्या और अनुशासन को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, निर्देश में यह नहीं बताया गया है कि ये पुलिसकर्मी कितने समय से गैर-मौजूद हैं, क्या उनसे आधिकारिक तौर पर संपर्क किया गया है या उन्हें अपनी गैर-मौजूदगी की वजह बताने का मौका दिया गया है, और कितनी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है.
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और राज्यपाल शासन लगा दिया. इससे इलाके में पहले से जारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI के साथ टकराव और बढ़ गया. PTI इस इलाके में सत्ता में है. इस फैसले से फिलहाल अशांत उत्तर-पश्चिमी इलाके में PTI का शासन खत्म हो गया है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की आपात बैठक के बाद संघीय कैबिनेट की सिफारिश पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इन फैसलों को मंजूरी दी.
सरकार ने पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 का हवाला दिया. ये प्रावधान इमरजेंसी और किसी प्रांत में संवैधानिक व्यवस्था के काम नहीं करने की स्थिति से जुड़े हैं.
अनुच्छेद-232 के तहत राष्ट्रपति तब इमरजेंसी घोषित कर सकते हैं, जब युद्ध, बाहरी हमले या ऐसे आंतरिक हालात से पाकिस्तान या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा को खतरा हो, जिसे प्रांतीय सरकार नियंत्रित करने में सक्षम न हो. अनुच्छेद 234 किसी प्रांत में संवैधानिक व्यवस्था के टूटने से जुड़ा है और इसके तहत राष्ट्रपति को प्रांत के कुछ काम अपने हाथ में लेने का अधिकार मिलता है.
घोषणा के तहत मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी, प्रांतीय मंत्री, सलाहकार, विशेष सहायक और प्रांतीय एडवोकेट जनरल को तुरंत अपने पद छोड़ने होंगे.
इस फैसले से प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की संघीय सरकार और इमरान खान की PTI के बीच टकराव और बढ़ गया है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अभी जेल में हैं. यह फैसला ऐसे समय आया है जब PTI इमरान खान से मिलने की अनुमति और उनकी रिहाई की मांग को लेकर विरोध मार्च आयोजित कर रही थी. आयोजकों ने शुरुआत में इस प्रदर्शन को इस्लामाबाद तक ले जाने की योजना बनाई थी.
संघीय सरकार ने चेतावनी दी कि वह प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश नहीं करने देगी.
एक बयान में प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रांतीय सरकार पर जानबूझकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई से पीछे हटने का आरोप लगाया. कैबिनेट के सदस्यों ने कहा कि सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए संघीय सरकार के लिए अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करना जरूरी था.
राष्ट्रपति की घोषणा में सरकार ने कहा कि आतंकवादी हिंसा के बढ़ते स्तर ने लोगों की सुरक्षा के लिए असाधारण खतरा पैदा कर दिया है. इसमें सरकारी प्रतिष्ठानों, बुनियादी ढांचे और कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर हुए हमलों का हवाला दिया गया. साथ ही प्रांतीय प्रशासन पर आतंकवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया गया.
राज्यपाल फैसल करीम कुंडी ने 11 सदस्यीय तकनीकी सलाहकार परिषद की मदद से संघीय सरकार की ओर से खैबर पख्तूनख्वा का प्रशासन संभाल लिया है.
PTI के अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान ने बुधवार को खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और राज्यपाल शासन लगाए जाने को पेशावर हाई कोर्ट में चुनौती दी. उन्होंने अदालत से इन फैसलों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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