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Wednesday, 30 September, 2026
होमदेशगैंगस्टर का वकील और उसकी जाली मार्कशीट. UAPA में गिरफ्तार लॉरेंस बिश्नोई के करीबी की मुश्किलें बढ़ीं

गैंगस्टर का वकील और उसकी जाली मार्कशीट. UAPA में गिरफ्तार लॉरेंस बिश्नोई के करीबी की मुश्किलें बढ़ीं

दीपक खत्री पिछले 10 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद गैंगस्टर के साथ जुड़ा रहा है. उसे पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था और कथित अवैध हथियार सप्लाई के मामले में UAPA के तहत केस दर्ज किया गया था.

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नई दिल्ली: लॉरेंस बिश्नोई के वकील दीपक नंदा, जिसे दीपक खत्री या ‘मामा’ के नाम से भी जाना जाता है, उसने उत्तर प्रदेश की एक यूनिवर्सिटी में बीए-एलएलबी कोर्स में दाखिला जाली 12वीं की मार्कशीट के जरिए लिया था. जांच में यह बात सामने आई है.

दिल्ली पुलिस खत्री के खिलाफ कथित अवैध हथियार सप्लाई के मामले की जांच कर रही है. वह पिछले 10 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद गैंगस्टर के साथ जुड़ा रहा है. उसे पिछले महीने दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था और उस पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए)के तहत केस दर्ज किया गया है.

जाली दस्तावेज़ का पता तब चला जब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने खत्री के शैक्षणिक रिकॉर्ड के लिए अमरोहा की श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से संपर्क किया. दिल्ली के पश्चिम विहार के रहने वाले 45 साल के खत्री ने 2024 में इसी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया था और उसी साल कानूनी लाइसेंस भी हासिल किया था.

यूनिवर्सिटी को अपने रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज फर्जी होने का पता चलने के बाद प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद सोमवार को अमरोहा के रजबपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई. खत्री के खिलाफ BNS की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 336(3) (जालसाजी) और 340(2) (फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करना) के तहत केस दर्ज किया गया है.

दाखिले के लिए जम्मू-कश्मीर बोर्ड का फर्जी सर्टिफिकेट इस्तेमाल किया

यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारी अरुण कुमार ने यह शिकायत दर्ज कराई थी. उनके बयान के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने 9 सितंबर को BNSS की धारा 94 के तहत जारी नोटिस के जवाब में खत्री के दाखिले और पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड दिल्ली क्राइम ब्रांच को दिए थे.

एफआईआर के मुताबिक, इन रिकॉर्ड में खत्री की 12वीं की मार्कशीट/सर्टिफिकेट की एक कॉपी भी थी. इसमें दिखाया गया था कि उसने जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से 12वीं पास की थी.

क्राइम ब्रांच ने इस दस्तावेज़ को जांच के लिए बोर्ड के पास भेजा. एफआईआर में कहा गया है, “19.9.2026 को दिए गए अपने जवाब में बोर्ड ने जांच के बाद इस मार्कशीट/सर्टिफिकेट को फर्जी बताया और कहा कि उसके रिकॉर्ड के मुताबिक यह असली नहीं है.”

एफआईआर में कुमार ने कहा, “ऊपर दिए गए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर यह साफ है कि दीपक नंदा ने यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने के लिए फर्जी/जाली शैक्षणिक दस्तावेज़ का इस्तेमाल करके और इन दस्तावेजों को असली बताकर एक गंभीर अपराध किया है.”

अमरोहा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि मामले की जांच शुरू हो गई है और इसके बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

‘जबरन वसूली करने वाला, हथियारों का कारोबारी’

दिल्ली क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक, खत्री बिश्नोई की कानूनी टीम का हिस्सा था और मुख्य रूप से गैंगस्टर के साथियों के लिए वकीलों की व्यवस्था करने में मदद करता था. वह 10 साल से ज्यादा समय से बिश्नोई के साथ जुड़ा हुआ है. हाल ही में हथियारों की तस्करी में उसकी कथित भूमिका सामने आई है.

श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद खत्री ने दिल्ली बार काउंसिल में अपना नाम दर्ज कराया और कई ट्रायल कोर्ट में वकालत शुरू की. इससे पहले, वह कथित तौर पर क्लाइंट्स की व्यवस्था करता था, समझौते करवाने में शामिल होता था और दिल्ली की निचली अदालतों में वकीलों के लिए संपर्क का काम करता था.

अधिकारियों के मुताबिक, खत्री का बिश्नोई के साथ जुड़ाव “सिर्फ कानूनी टीम का हिस्सा होने तक सीमित नहीं है”. जांचकर्ताओं ने कहा कि भले ही उसने 2024 में कानूनी लाइसेंस हासिल किया था, लेकिन कानून की डिग्री मिलने से पहले से ही वह बिश्नोई के साथियों के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था कर रहा था.

खत्री का नाम पहली बार 2023 के एक स्पेशल सेल मामले में पुलिस रिकॉर्ड में आया था. इसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि बिश्नोई के साथ मामला सुलझाने के लिए उससे खत्री को 2.5 करोड़ रुपये देने के लिए कहा गया था.

खत्री को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पिछले महीने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी मार्च में विभाग द्वारा हथियारों की तस्करी के एक मामले का खुलासा किए जाने के बाद हुई. मामले में बांग्लादेश स्थित हथियार सप्लायर शाहबाज अंसारी की गिरफ्तारी के बाद खत्री का नाम सामने आया. अंसारी ने जांचकर्ताओं को बताया था कि खत्री भारत में हथियारों के सौदों को करवाने में शामिल था.

सूत्रों ने बताया कि 13 मार्च को क्राइम ब्रांच को हथियारों की तस्करी के एक नेटवर्क के बारे में तकनीकी जानकारी मिली थी. इसके बाद कई राज्यों में छापेमारी की गई. इसमें 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 32 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल, दो सब-मशीन गन और 363 जिंदा कारतूस बरामद किए गए.

पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि हथियार और गोला-बारूद “कुछ कार्यक्रमों के दौरान बड़े सार्वजनिक जमावड़ों में अंधाधुंध गोलीबारी करके आम लोगों में आतंक पैदा करने के लिए” इकट्ठा किए जा रहे थे.

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हथियारों की तस्करी और आतंकी मॉड्यूल के मामले में जून में खत्री के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया. उसने पुलिस को बताया कि दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरने के बाद गिरफ्तारी से पहले वह पिछले कुछ महीनों में दुबई, मोरक्को और थाईलैंड में रहा था.

दिल्ली पुलिस ने एक अदालत को बताया कि पूछताछ के दौरान खत्री ने खुलासा किया कि वह अंसारी की ओर से कथित तौर पर बनाए और चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय आतंकी मॉड्यूल में शामिल था. पुलिस के मुताबिक, यह मॉड्यूल हर्षपाल सिंह रूबल और निशांत अरोड़ा के जरिए चलाया जा रहा था.

पुलिस ने कहा कि खत्री ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि वह जांच में मदद कर सकता है, दूसरे आरोपियों को गिरफ्तार कराने में मदद कर सकता है और अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए काम करने के तरीके के बारे में जानकारी दे सकता है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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