नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म विभाग की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी नए दौर के सोशल मीडिया, चाहे वह इंस्टाग्राम हो या यूट्यूब को ‘समझ’ नहीं पाई है. इसकी वजह यह है कि सत्तारूढ़ पार्टी को ‘इको चैंबर’ पसंद हैं.
दिप्रिंट के साथ बातचीत में श्रीनेत ने कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति, राहुल गांधी का Gen Z के साथ जुड़ाव, चुनाव आयोग, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-समाजवादी पार्टी की बातचीत और इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस (INDIA) ब्लॉक समेत कई मुद्दों पर बात की.
श्रीनेत ने दिप्रिंट से कहा, “बीजेपी नए दौर के सोशल मीडिया को, चाहे वह इंस्टाग्राम हो या यूट्यूब, समझ क्यों नहीं पाई है, इसकी वजह यह है कि बीजेपी को इको चैंबर पसंद हैं.” उन्होंने कहा कि कांग्रेस अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए अलग रणनीति अपनाती है, न कि हर जगह एक ही कंटेंट डालती है.
उन्होंने कहा, “एक्स पर जो चीज़ काम कर सकती है, वह फेसबुक पर काम नहीं कर सकती. फेसबुक पर जो काम करता है, वह इंस्टाग्राम पर पूरी तरह असफल हो सकता है, क्योंकि यहां उम्र के समूह और लोगों के अलग-अलग वर्ग हैं.”
उन्होंने इसकी तुलना राहुल गांधी के युवाओं के साथ लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव से की. उन्होंने कहा कि यह किसी Gen Z विरोध प्रदर्शन के बाद अचानक बनाई गई लोगों तक पहुंचने की रणनीति नहीं है.
उन्होंने कहा, “अगर आप Gen Z के विरोध प्रदर्शन को ही देखें, तो देखें कि राहुल गांधी Gen Z के साथ कैसे बातचीत कर रहे हैं… राहुल गांधी अपने कार्यक्रमों में क्या कर रहे हैं…वहां 60 से 70 फीसदी जगह वास्तव में युवा छात्रों को अपनी चिंताएं बताने के लिए दी जाती है.”
उन्होंने आगे कहा, “हम विरोध प्रदर्शन के बाद Gen Z के बारे में जागे नहीं हैं. मेरे नेता को अचानक आधी रात में यह समझ नहीं आया कि मुझे फ्रंट कैमरे से वीडियो बनाना है और सोचना है कि इससे मैं आपसे जुड़ रहा हूं. मेरे नेता चार साल पहले तक भी आपसे जुड़ रहे थे.”
श्रीनेत ने इस बात को भी खारिज किया कि कांग्रेस को बीजेपी की उस बात का जवाब देने की जरूरत है, जिसमें गांधी को ‘अप्रभावी’ नेता बताया जाता है. उन्होंने कहा, “मुझे इसका जवाब देने की जरूरत नहीं है. मुझे लगता है कि जनता इसका जवाब दे रही है. मैं अपना समय ऐसी बात का जवाब देने में बर्बाद नहीं करने वाली, जो लोगों के बीच चल ही नहीं रही है.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर राहुल गांधी उतने ही अप्रासंगिक होते, जितना बीजेपी लोगों को विश्वास दिलाना चाहती है, तो वे अपनी पूरी ताकत के साथ उन्हें जवाब क्यों देते और उनके पीछे क्यों पड़ते? वे ऐसा क्यों करते?”
‘मां’ का मुद्दा
श्रीनेत ने बीजेपी के उन सोशल मीडिया पोस्ट की भी आलोचना की, जिनमें कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को निशाना बनाया गया था. उन्होंने बीजेपी हैंडल्स से शेयर की गई मॉर्फ की गई और AI से बनाई गई तस्वीरों का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, “सोनिया गांधी सबसे सम्मानित नेताओं में से एक हैं. वह 80 साल की महिला हैं. उन्होंने इस देश में अपने पति को खोने का दुख झेला है. वह करीब 35 साल से विधवा हैं. उनके नाम के साथ आप उनके साथ यह सब कर रहे हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “आखिरकार बीजेपी ने उन ट्वीट्स को हटा दिया और अगर उनमें कुछ गलत नहीं था, तो वे उन ट्वीट्स को नहीं हटाते.”
श्रीनेत ने राजनीतिक बयानबाजी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां का बार-बार जिक्र किए जाने पर भी आपत्ति जताई.
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की मां, उनकी आत्मा को शांति मिले, अब इस दुनिया में नहीं हैं. मुझे लगता है कि BJP हर बार उनकी मां का जिक्र करके गंदी राजनीति करती है. आप उस महिला को अकेला क्यों नहीं छोड़ सकते? प्रधानमंत्री को अपनी ट्रोल आर्मी से यह सब बंद करने के लिए कहना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “किसी की भी मां का सम्मान होता है. मेरी मां भी उतने ही सम्मान की हकदार हैं, जितनी प्रधानमंत्री की मां. या फिर श्रीमती गांधी की मां.”
चुनाव आयोग पर
श्रीनेत ने कहा कि अब यह मुद्दा सिर्फ कांग्रेस तक सीमित नहीं है. विपक्षी दल भी राहुल गांधी की चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाई गई चिंताओं पर लगातार बात कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है, उस पर गंभीर हमला हो रहा है और यह हमला किसी बाहरी ताकत की तरफ से नहीं हो रहा है. भारत के लोकतंत्र और आपके वोट देने के अधिकार पर यह हमला उसी एजेंसी, उसी संस्था की तरफ से हो रहा है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है.”
उन्होंने आगे कहा, “31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां Special Intensive Revision (SIR) हुआ, वहां 13 करोड़ भारतीयों ने अपना वोट देने का अधिकार खो दिया है. अब चुनाव आयोग के अंदर से ही लोग कह रहे हैं कि यह गैरकानूनी और बिना अनुमति के किया गया था.”
ये आंकड़े और आरोप श्रीनेत की उस दलील का हिस्सा थे कि कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी आगे क्या कदम उठाएगी, इसका फैसला कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में होगा.
श्रीनेत ने स्वतंत्र वैधानिक संस्था चुनाव आयोग के बचाव में BJP के बोलने पर भी सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, “BJP चुनाव आयोग के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों कर रही है? अगर आपको सच में भारतीय लोकतंत्र की चिंता है और आपके पास ऐसी रिपोर्ट है, तो राहुल गांधी की बात मत सुनिए, लेकिन अखबार की रिपोर्ट तो सुनिए. दूसरे मीडिया में आईं आगे की खबरों को तो सुनिए.”
उन्होंने आगे कहा, “ज्ञानेश कुमार को जवाब देना चाहिए या ज्ञानेश कुमार को जाना चाहिए. उन्हें इस्तीफा देना चाहिए.”
‘INDIA ब्लॉक कोई NGO नहीं है’
श्रीनेत ने कहा कि विपक्षी दल राज्य की राजनीति में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रह सकते हैं, लेकिन लोकतंत्र, संविधान और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव जैसे बड़े मुद्दों पर साथ आ सकते हैं. उन्होंने दोहराया कि राज्यों में मतभेद होने के बावजूद वे एक गलत व्यवस्था के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हैं.
उन्होंने कहा, “हम कोई NGO नहीं हैं, हम एक राजनीतिक पार्टी हैं. बड़े स्तर पर हम कुछ मुद्दों पर साथ हैं. और वे मुद्दे लोकतंत्र, संविधान और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव से जुड़े हैं.”
उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हुई बातचीत का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव में तृणमूल के खिलाफ चुनाव लड़ा था, फिर भी दोनों के बीच यह अंतर बना रहा.
उन्होंने कहा, “श्री गांधी सबसे पहले आए और कहा कि यह चुनाव धांधली वाला है.”
श्रीनेत के मुताबिक, राज्य के स्तर पर पार्टियों के बीच मतभेद होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि वे लोकतंत्र और चुनाव से जुड़े बड़े सवालों पर साथ काम नहीं कर सकतीं.
तमिलनाडु में ‘बड़ी तस्वीर’
श्रीनेत ने तमिलनाडु चुनाव के बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) से अलग होकर तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के साथ गठबंधन करने के कांग्रेस के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह फैसला “बड़ी तस्वीर” को ध्यान में रखकर लिया गया था.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अब भी डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन को “भाई” कहते हैं और दोनों पार्टियों के बीच राष्ट्रीय मुद्दों पर साथ काम करने की इच्छा बनी हुई है.
उन्होंने कहा, “बड़ी तस्वीर यह थी कि हम BJP को उस जनादेश के साथ छेड़छाड़ या उसमें दखल देने की इजाजत नहीं दे सकते थे, जो लोगों ने बहुत स्पष्ट तरीके से दिया था.”
श्रीनेत ने इस बात को खारिज किया कि यह फैसला राजनीतिक फायदे के लिए लिया गया था.
उन्होंने कहा, “मुझे बिल्कुल नहीं लगता कि यह राजनीतिक फायदे के लिए उठाया गया कदम था. मेरा मानना है कि यह BJP को उसकी गंदी और गलत राजनीति को तमिलनाडु से बाहर रखने का तरीका था.”
उन्होंने आगे कहा, “राजनीतिक पार्टियों के तौर पर हम लोगों के फैसले के आधार पर राजनीतिक फैसले लेते हैं.”
उत्तर प्रदेश का मोर्चा
उत्तर प्रदेश से आने वाली श्रीनेत ने कहा कि समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है. उन्होंने दोहराया कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) अगर उनके गठबंधन में शामिल होना चाहती है, तो वे इसके लिए तैयार हैं.
उन्होंने कहा, “श्री गांधी और श्री यादव के बीच बहुत अच्छी समझ है. वे जरूरी मुद्दों पर एक-दूसरे से अक्सर बात करते हैं. निजी मामलों में हम एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “सीटों को लेकर कुछ खींचतान होगी. ऐसा होना तय है क्योंकि हम वहां अपने संगठन को मजबूत करने के लिए बहुत मेहनत करते हैं.”
उन्होंने कहा, “अगर मायावती हमारे साथ आती हैं, तो हमें बहुत खुशी होगी. SP को भी खुशी होगी. उन्हें तय करना होगा कि वह किसके खिलाफ लड़ रही हैं और किस मुद्दे के लिए लड़ रही हैं.”
पंजाब के स्कूल, Gen Z के प्रदर्शन
श्रीनेत ने कहा कि पंजाब में स्कूलों की हालत “बहुत खराब” है. लेकिन उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में छात्रों के प्रदर्शन पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, “जब LPU कैंपस में पंजाब पुलिस छात्रों को बेरहमी से पीट रही है, तब मुझे उनकी तरफ से विरोध की वही आवाज, वही गुस्सा या उसी तरह का सदमा देखने को नहीं मिलता.”
उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी पार्टी या दबाव समूह के राजनीतिक संबंध यह तय करने चाहिए कि वह कब आवाज उठाएगा, खासकर जब युवा लोग इसमें शामिल हों.
उन्होंने कहा, “अगर आप Gen Z के साथ खड़े हैं, तो जहां भी उन पर हमला हो रहा है, वहां भी उनके साथ खड़े रहिए.”
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने भी प्रदर्शनों को लेकर चिंता जताई है, जबकि वह संबंधित सरकार के साथ गठबंधन में है.
उन्होंने कहा, “छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है.”
उन्होंने आगे कहा, “जहां तक आम आदमी पार्टी को घेरने की बात है, मुझे लगता है कि उनकी तरफ से अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.”
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