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Thursday, 17 September, 2026
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लखवाड़ से केन-बेतवा तक—किशाऊ समझौते से पहले 2018 से अब तक सुलझे 9 बड़े अंतरराज्यीय जल विवाद

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किशाऊ मल्टी-पर्पस प्रोजेक्ट के लिए हुआ समझौता, पानी से जुड़ा 10वां ऐसा विवाद है जिसे सुलझाने में उनकी सरकार ने मदद की है। इनमें से कुछ विवाद 50 साल पुराने थे. अभी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.

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नई दिल्ली: मंगलवार को छह राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने राजधानी में किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना पर समझौते पर साइन करने के लिए बैठक की.

इस परियोजना में टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनाने की योजना है. यह नदी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के साथ बहती है. बांध की जल भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी. इससे 97,000 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई में मदद मिलेगी और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत पैदा होगी. इस परियोजना से दिल्ली को सबसे ज्यादा फायदा होगा.

हालांकि, यह पहली ऐसी परियोजना नहीं है, जिसमें छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों को सुलझाने के लिए साथ आकर काम किया है. 2018 से मोदी सरकार ने लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों को सुलझाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करने की दिशा में चुपचाप आगे बढ़ना शुरू किया.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना पर हुआ समझौता दसवां जल विवाद है, जिसे उनकी सरकार ने सुलझाने में मदद की है. इनमें से कुछ विवाद 50 साल पुराने थे.

दिप्रिंट ने पिछले आठ साल में सरकार की मदद से सुलझाई गईं दूसरी जल परियोजनाओं पर नजर डाली है.

लखवार बहुउद्देश्यीय परियोजना

28 अगस्त 2018 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ 3,966.51 करोड़ रुपये की लखवार बहुउद्देश्यीय परियोजना के निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए. सितंबर 2017 से गडकरी जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण का पोर्टफोलियो संभाल रहे थे.

अपर यमुना से मतलब यमुना नदी के उद्गम से लेकर दिल्ली के ओखला बैराज तक के हिस्से से है. इस परियोजना को शुरुआत में 1976 में मंजूरी मिली थी, लेकिन 1992 में इसे रोक दिया गया. इसके तहत उत्तराखंड के देहरादून जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनाया जाना है. इसमें 330.66 मिलियन क्यूबिक मीटर या MCM पानी रखने की क्षमता होगी. एक MCM का मतलब एक अरब लीटर होता है.

इस पानी से 33,780 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी और छह नदी बेसिन राज्यों में घरेलू, पीने और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए 78.83 MCM पानी उपलब्ध होगा. इस परियोजना को M/s उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड बना रहा है. इससे 300 MW बिजली भी पैदा होगी. परियोजना के सिविल काम का जिम्मा लार्सन एंड टुब्रो के पास है.

स्थिति: सिविल निर्माण का काम अभी चल रहा है. इसे 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

शाहपुर कंडी बांध परियोजना

पंजाब और जम्मू-कश्मीर ने 8 सितंबर 2018 को पंजाब में जम्मू-कश्मीर की सीमा के पास रावी नदी पर शाहपुर कंडी बांध परियोजना का काम फिर से शुरू करने के लिए समझौता किया. 3,300 करोड़ रुपये की इस परियोजना में 55.5 मीटर ऊंचा बांध और 206 MW की कुल क्षमता वाले दो जलविद्युत संयंत्र शामिल हैं. पंजाब इस परियोजना को लागू कर रहा है. इससे रावी नदी का कुछ पानी, जो अभी नीचे की ओर माधोपुर बैराज से पाकिस्तान की तरफ बहकर बेकार चला जाता है, उसे रोकने में मदद मिलेगी. इससे पंजाब और जम्मू-कश्मीर में 37,173 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई में भी मदद मिलेगी.

इस परियोजना को 2008 में मंजूरी मिली थी, लेकिन काम 2013 में ही शुरू हुआ. एक साल बाद जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से उठाए गए मुद्दों के बाद काम रोक दिया गया.

स्थिति: बांध का काम पूरा हो चुका है और यह चालू है. लेकिन परियोजना का पूरा फायदा, यानी सिंचाई और बिजली उत्पादन, बिजली संयंत्रों के पूरा होने के बाद ही मिलेगा. दोनों जलविद्युत संयंत्रों के 2027 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है.

रेणुकाजी बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना

एक बार फिर नितिन गडकरी ने जल संसाधन मंत्री के तौर पर छह राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ 11 जनवरी 2019 को रेणुकाजी बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना के निर्माण के लिए MoU पर हस्ताक्षर किया.

इसे हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना की सहायक नदी गिरि पर एक जल भंडारण परियोजना के रूप में बनाया जाना है. यहां 148 मीटर ऊंचा पत्थरों से भरा बांध बनाया जाएगा. इससे दिल्ली और दूसरे नदी बेसिन राज्यों को 23 क्यूमेक पानी दिया जाएगा. क्यूमेक पानी के प्रवाह की एक इकाई है, जो प्रति सेकंड एक क्यूबिक मीटर पानी के बराबर होती है.

परियोजना से अधिकतम प्रवाह के दौरान 40 MW बिजली भी पैदा होगी. बांध बनने के बाद गिरि नदी का प्रवाह करीब 110 प्रतिशत बढ़ जाएगा. इससे सूखे मौसम में दिल्ली और दूसरे नदी बेसिन राज्यों की पीने के पानी की जरूरत कुछ हद तक पूरी होगी.

परियोजना के लिए जांच का काम 1976 में ही शुरू हो गया था, लेकिन राज्यों के बीच विवादों के कारण निर्माण शुरू नहीं हो सका. 2015 की कीमतों के हिसाब से परियोजना की कुल लागत 4,596.76 करोड़ रुपये आंकी गई थी. इसमें बिजली वाले हिस्से की लागत 277.33 करोड़ रुपये थी.

स्थिति: काम चल रहा है और परियोजना को 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

केन-बेतवा लिंक परियोजना

केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना को लागू करने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश सरकारों के बीच 22 मार्च 2021 को समझौता हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2024 को परियोजना की आधारशिला रखी. इसके साथ देश की महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं में से एक को लागू करने की शुरुआत हुई.

इस परियोजना से हर साल 10.62 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई में मदद मिलेगी और मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के सूखे से प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र में करीब 62 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा. दिसंबर 2024 तक इस पर 10,536.12 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में भी पर्याप्त बजट रखा गया है, ताकि काम लगातार आगे बढ़ता रहे.

स्थिति: बांध का निर्माण चल रहा है, जबकि नहर का काम अभी शुरू नहीं हुआ है. लोअर ओर्र परियोजना, कोठा बैराज और बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्यीय परियोजना का काम चल रहा है. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की अन्य राज्य-विशेष परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम भी अंतिम चरण में है. परियोजना को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

पारबती-कालिसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना

अपने-अपने राज्यों में पानी की कमी को दूर करने के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान ने दिसंबर 2024 में 72,000 करोड़ रुपये की पारबती-कालिसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना को लागू करने के लिए समझौता किया.

इस परियोजना में चंबल बेसिन की नदियों को आपस में जोड़ने की योजना है. इसमें मध्य प्रदेश और राजस्थान में पानी के बेहतर इस्तेमाल के लिए ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को भी जोड़ा जाएगा. परियोजना पूरी होने के बाद पूर्वी राजस्थान के 21 नए बनाए गए जिलों और रास्ते में आने वाले शहरों और गांवों को पीने का पानी मिलेगा.

परियोजना से दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे की औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पानी मिलेगा. इसके अलावा 2.5 लाख हेक्टेयर से ज्यादा नए कमांड क्षेत्र की सिंचाई होगी, राजस्थान में करीब 1.5 लाख हेक्टेयर के मौजूदा कमांड क्षेत्र को स्थिर किया जाएगा. मध्य प्रदेश में हर साल 6 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी और शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड और मालवा क्षेत्र समेत कई जिलों में पीने के पानी की आपूर्ति होगी.

स्थिति: राजस्थान से जुड़े हिस्सों की DPR पूरी हो चुकी हैं और तकनीकी-आर्थिक जांच के लिए जल शक्ति मंत्रालय के तहत केंद्रीय जल आयोग (CWC) को भेज दी गई हैं. परियोजना को जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है.

हथिनीकुंड से यमुना तक पानी पहुंचाने के लिए भूमिगत पाइपलाइन

29 जून 2026 को राजस्थान और हरियाणा ने यमुना जल परियोजना को लागू करने के लिए समझौता किया. इस समझौते के तहत यमुना नहर से करीब 580 MCM पानी तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान पहुंचाया जाएगा.

इस परियोजना का मकसद पश्चिमी यमुना नहर से इन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान के हिस्से का यमुना पानी पहुंचाना है. इससे राजस्थान 1994 के उस समझौते के तहत मिले यमुना के पानी का बेहतर इस्तेमाल कर सकेगा, जो अपर यमुना बेसिन में इस्तेमाल किए जा सकने वाले सतही पानी के बंटवारे से जुड़ा है. इससे राजस्थान के कम बारिश वाले और सूखे इलाकों में पीने के पानी की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. इससे लाखों लोगों को फायदा होगा.

परियोजना की अनुमानित लागत 34,102.24 करोड़ रुपये है.

स्थिति: परियोजना की DPR तैयार हो चुकी है. इसके अनुसार राजस्थान के हसियावास में करीब 386 MCM की कुल भंडारण क्षमता वाला कच्चे पानी का जलाशय बनाया जाएगा, जिसे सिर्फ पीने के पानी की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. DPR के मुताबिक परियोजना के निर्माण में काम मिलने की तारीख से 72 महीने लगेंगे.

नर्मदा परियोजना से विस्थापित परिवारों का पुनर्वास

7 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले से लाभ पाने वाले राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच बकाया भुगतान के निपटारे को लेकर ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.

इस समझौते से सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण की लागत बांटने को लेकर इन राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद सुलझ गए हैं. बकाया राशि का निपटारा एकमुश्त समझौते के जरिए किया गया.

स्थिति: एकमुश्त समझौते के साथ चारों राज्यों के बीच बकाया राशि को लेकर विवाद सुलझ गया है.

सोन बेसिन में बिहार और झारखंड के बीच पानी का बंटवारा

30 अगस्त 2026 को बिहार और झारखंड के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अंतर-राज्यीय समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके साथ सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर 25 साल पुराना विवाद सुलझ गया. इस समझौते से बिहार और झारखंड के बड़े ग्रामीण इलाकों में लाखों किसानों को सिंचाई का पानी मिलेगा. साथ ही लोगों को पीने का पानी भी मिलेगा.

स्थिति: समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ झारखंड की सीमा से लगी सोन नदी पर बना इंद्रपुरी बांध, जिसे सोन बैराज भी कहा जाता है, पूरी तरह काम करने लगेगा.

यमुना जल परियोजना के निर्माण और लागू करने का समझौता

राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने 29 जून 2026 को नई दिल्ली में यमुना जल परियोजना के निर्माण और उसे लागू करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए. इससे दोनों राज्यों के लोगों की करीब तीन दशक पुरानी पानी से जुड़ी समस्या का समाधान हुआ.

समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच यमुना नहर से करीब 580 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी 295 किलोमीटर लंबी तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान पहुंचाया जाएगा. इन तीन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से ज्यादा होगा. इनके जरिए राजस्थान और हरियाणा दोनों के लोगों को पीने का पानी मिलेगा.

स्थिति: परियोजना की DPR की जांच चल रही है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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