चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की लंदन की पहली आधिकारिक विदेश यात्रा को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. विपक्षी दलों ने इसे सरकारी पैसे से की गई “मस्ती की यात्रा” या “घूमने की यात्रा” बताया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने इस यात्रा के दौरान विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने की सरकार की योजना की असलियत पर सवाल उठाए हैं.
BJP तमिलनाडु के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने बुधवार को इस यात्रा को केवल “घूमने की यात्रा” बताया.
उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह झूठ है कि मुख्यमंत्री विजय तमिलनाडु में निवेश लेकर आए हैं. वे पहले से मौजूद कंपनियों को नए औद्योगिक निवेश के तौर पर बता रहे हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पहले से काम कर रही कंपनियों के विस्तार को इस यात्रा से मिलने वाली नई उपलब्धि के तौर पर पेश करके सरकार जनता को गुमराह कर रही है.
सोमवार को DMK के मुखपत्र मुरासोली ने लंदन यात्रा का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यह निवेशकों को आकर्षित करने के बजाय कार रेस देखने की यात्रा थी. उसने आरोप लगाया कि विजय ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ होने वाली सामान्य तैयारियों और चर्चाओं के बिना “अचानक अपने दम पर उड़ान भर ली”. संपादकीय में 2026 की पहली तिमाही के दौरान तमिलनाडु में नए निवेश प्रस्तावों में करीब 74.5 प्रतिशत की गिरावट की खबरों का भी जिक्र किया गया. इसमें यह भी कहा गया कि राज्य की राष्ट्रीय रैंकिंग छठे स्थान से गिरकर 17वें स्थान पर आ गई है.
सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के सहयोगी भी चुप नहीं रहे हैं.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने भी राज्य सरकार के 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हासिल करने के दावे पर सवाल उठाया है और इस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है. DMK ने यह भी कहा कि सरकार के करीब 100 दिनों के कार्यकाल में आकर्षित किए गए निवेश में पारदर्शिता होनी चाहिए. उसने सवाल किया कि जब यात्रा का मुख्य नजर आने वाला कार्यक्रम सिल्वरस्टोन मोटर रेसिंग इवेंट था, तो इसे निवेश बढ़ाने की कवायद के तौर पर क्यों पेश किया जा रहा था.
सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सिल्वरस्टोन सर्किट में विजय के साथ उनकी सह-अभिनेत्री तृषा कृष्णन की मौजूदगी की आलोचना की. यहां विजय ने एक रेस को हरी झंडी दिखाई थी, जिसमें अभिनेता और रेसर अजित कुमार ने हिस्सा लिया था.
उधयनिधि स्टालिन समेत विपक्षी नेताओं ने भी कई दिनों की इस यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों पर भी सवाल उठाया और कहा कि उद्योग मंत्री या विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल नहीं थे. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकारी पैसे का इस्तेमाल किया गया था और क्या यात्रा से वास्तव में कोई ठोस नतीजा निकला.
TVK ने बुधवार को इन आलोचनाओं का जोरदार जवाब दिया. पार्टी ने करीब 15,300 करोड़ रुपये के घोषित निवेश प्रतिबद्धताओं को सामने रखा, जिनसे हजारों नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है. इनमें EY और संवर्धना मदरसन के साथ हुआ समझौता ज्ञापन भी शामिल है. TVK के नेताओं, जिनमें ऊर्जा और कानून मंत्री निर्मल कुमार भी शामिल हैं, ने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य निवेश के लिए संपर्क करना और चेन्नई के पास प्रस्तावित मोटर स्पोर्ट्स सिटी के लिए खेल ढांचे का अध्ययन करना था.
TVK की सूचना प्रौद्योगिकी शाखा ने X पर एक बयान में सरकारी पैसे के पुराने इस्तेमाल को लेकर DMK पर हमला किया. इसमें कहा गया कि पिछली सरकार ने बेटे और बेटी समेत पूरे परिवार के साथ तमिलनाडु से बाहर लग्जरी यात्रा करने के लिए जनता के टैक्स के पैसे का इस्तेमाल किया था. पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी यात्रा का जिक्र करते हुए पोस्ट में कहा गया कि पिछली सरकार ने पहले से एक निजी जगह बुक की थी और “पेरियार की प्रतिमा के अनावरण” के नाम पर फोटो खिंचवाने का कार्यक्रम किया था. पोस्ट में आरोप लगाया गया कि तमिलनाडु की जनता को धोखा देने के लिए यह पूरा नाटक किया गया.
पोस्ट में इसकी तुलना विजय की यात्रा से की गई, जिसके दौरान 15,300 करोड़ रुपये के MoU पर हस्ताक्षर किए गए. इसमें लंदन में मुख्यमंत्री को देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा होने की शिकायत करने वाले आलोचकों का भी मजाक उड़ाया गया. मुख्यमंत्री विजय का यह कार्यक्रम बाद में सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिया गया.
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