गुरुग्राम: हरियाणा में एक महिला का अपहरण और रेप करने के मामले में 15 साल की जेल की सज़ा पाने वाले दोषी शिव कुमार की सज़ा 25 साल बाद घटाकर उतनी कर दी गई है, जितनी वह पहले ही जेल में काट चुका है. इसकी वजह एक स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र बना, जिससे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि वारदात के समय वह नाबालिग था.
1 जुलाई को फैसला सुनाते हुए जस्टिस सुभाष मेहला ने नाबालिग होने के मुद्दे पर शिव कुमार की अपील मंजूर कर ली. कोर्ट ने कहा कि 19 जून 1999, यानी वारदात के दिन, उसकी उम्र 16 साल, 6 महीने और 17 दिन थी. इसलिए कानून के तहत उसे नाबालिग माना जाएगा, जबकि 2001 में चले मूल मुकदमे के दौरान यह दलील नहीं दी गई थी.
मई 2001 में ट्रायल कोर्ट ने शिव कुमार को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363 (अपहरण), 366-ए (नाबालिग लड़की को अवैध यौन संबंध के लिए ले जाना) और 376 (रेप) के तहत दोषी ठहराया था. उसे कुल 15 साल की कठोर जेल की सज़ा सुनाई गई थी. इस मामले का दूसरा आरोपी फैसला आने से पहले ही मर गया था.
शिव कुमार की ओर से अदालत की मदद के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी वकील हरपरतीक सिंह संधू ने दोषसिद्धि को चुनौती नहीं दी. उन्होंने सिर्फ यह दलील दी कि वारदात के समय शिव कुमार कानून के मुताबिक नाबालिग था. हालांकि, 1999 में लागू जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 1986 में लड़कों के लिए नाबालिग होने की उम्र 16 साल तय थी और तकनीकी रूप से शिव कुमार यह उम्र पार कर चुका था.
इसके बाद आए जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2000 में नाबालिग होने की उम्र बढ़ाकर 18 साल कर दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने धर्मबीर बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली) और हंसराज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य जैसे मामलों में कई बार कहा है कि 18 साल की यह सीमा पुराने मामलों पर भी लागू होगी, चाहे दोषसिद्धि 2000 का कानून लागू होने से पहले ही क्यों न हुई हो.
शिव कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में यमुना नगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को उसकी असली उम्र की जांच करने का आदेश दिया था. दिसंबर 2025 में सौंपी गई जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित एस.डी. मॉडर्न स्कूल की प्रिंसिपल कल्पना गुप्ता की ओर से दिए गए रिकॉर्ड पर आधारित थी. उन्होंने स्कूल का मूल दाखिला और नाम कटने का रजिस्टर पेश किया.
रिकॉर्ड के मुताबिक शिव कुमार ने 1992 में पांचवीं कक्षा में दाखिला लिया था और 1993 तक वहीं पढ़ाई की थी. स्कूल रिकॉर्ड में उसकी जन्मतिथि 2 जनवरी 1983 दर्ज थी. मौजूदा कानून के हिसाब से वारदात के दिन वह करीब दो साल तक नाबालिग था.
राज्य सरकार ने इस निष्कर्ष का विरोध नहीं किया. नाबालिग होने की बात साबित होने और उस पर कोई आपत्ति न आने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिव कुमार की दोषसिद्धि तो बरकरार रहेगी, लेकिन 2001 में सुनाई गई सज़ा, जिसमें सिर्फ रेप के लिए 8 साल की जेल भी शामिल थी, अब लागू नहीं रह सकती. इसकी वजह यह है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत नाबालिग दोषी को अधिकतम तीन साल की सज़ा ही दी जा सकती है.
कोर्ट ने कहा कि शिव कुमार पहले ही 2 साल, 8 महीने और 16 दिन जेल में बिता चुका है. इसलिए मामले को आगे आदेश के लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पास भेजने का कोई फायदा नहीं होगा. इसी आधार पर कोर्ट ने उसकी सज़ा घटाकर उतनी ही कर दी, जितनी वह पहले ही जेल में काट चुका है.
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