नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के हौज रानी इलाके के लोगों ने सुबह करीब 8:15 बजे एक चार मंजिला बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) से तेज चीख-पुकार की आवाज़ें सुनीं.
कुछ ही मिनटों में पास के मैक्स अस्पताल में इलाज करा रहे विदेशी मरीजों और उनके साथ आए लोगों के ठहरने की जगह फ्लोरिश स्टेज़ मौत के जाल में बदल गई.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग तेज़ी से फैलने के दौरान उन्हें कई धमाकों जैसी आवाज़ें सुनाई दीं, जिन्हें उन्होंने सिलेंडर फटने की आवाज़ समझा. पास के एक बिजली के खंभे से लटक रहे तारों ने भी आग को और भड़काने का काम किया.
घटना के समय इमारत के अंदर 40 से ज्यादा लोग मौजूद थे, जो या तो इलाज करा रहे थे या फिर सर्जरी के बाद स्वस्थ हो रहे थे. अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “वे इतने कमजोर थे कि बाहर निकलकर जान नहीं बचा सके.”
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि इमारत में सिर्फ एक ही आने-जाने का रास्ता था, जिसे आग ने पूरी तरह बंद कर दिया था, जिससे लोग अंदर फंस गए.
एक व्यक्ति ने कहा, “यह बेहद डरावना था. आग ग्राउंड फ्लोर पर लगी और फिर ऊपर की तरफ फैल गई. हमें लोगों की चीखें और कई धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही थीं. हमने अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन इमारत का एकमात्र प्रवेश द्वार, जो काफी संकरा था, आग की वजह से बंद हो गया था. पीछे की तरफ एक और गेट था, लेकिन वह भी अंदर से बंद लग रहा था.”
इमारत में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश में पास की रूई के गद्दों की दुकान के कर्मचारियों ने सड़क पर गद्दे बिछा दिए और लोगों से उन पर कूदने को कहा.

प्रत्यक्षदर्शी असमा ने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने एक विदेशी महिला को जान बचाने की कोशिश में इमारत की दूसरी मंजिल से गिरते देखा.
उन्होंने कहा, “वह लगातार मदद के लिए चिल्ला रही थी, लेकिन गेट बंद होने की वजह से लोग अंदर-बाहर नहीं जा पा रहे थे. वह आधे कपड़ों में खिड़की से बाहर निकली और नीचे स्थानीय लोगों द्वारा बचाव के लिए बिछाए गए गद्दे पर गिर गई.”
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने दिप्रिंट को बताया, “हम लोगों से गद्दों पर कूदने के लिए कह रहे थे. कुछ लोग बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई लोग नीचे गिरने के बाद बेहोश हो गए. वे धुएं की वजह से दम घुटने का शिकार हो रहे थे और उनमें से कई पहले से ही कमजोर थे क्योंकि उनका मैक्स अस्पताल में इलाज चल रहा था.”
इस B&B में कुल 24 कमरे थे—हर मंजिल पर पांच कमरे, जबकि ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में दो-दो कमरे थे. यहां मुख्य रूप से इलाज के लिए भारत आने वाले विदेशी नागरिक और उनके साथ आए लोग ठहरते थे.
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने दिप्रिंट को बताया कि मरने वालों में कम से कम 10 लोग विदेशी नागरिक हैं.
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