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Sunday, 8 November, 2026
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मेघालय में 2025 रहा 1901 के बाद का सबसे गर्म वर्ष: आईएमडी रिपोर्ट

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शिलांग, सात नवंबर (भाषा) मेघालय में 1901 के बाद वर्ष 2025 अब तक का सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया जब राज्य का वार्षिक औसत तापमान 20.77 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान राज्य में सामान्य से 43 प्रतिशत कम बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

ये निष्कर्ष आईएमडी के पुणे स्थित जलवायु अनुसंधान एवं सेवा कार्यालय द्वारा मेघालय सरकार के सहयोग से तैयार की गई ‘स्टेटमेंट ऑन क्लाइमेट फॉर मेघालय: 2025’ रिपोर्ट में शामिल हैं। इस रिपोर्ट में वर्ष 1901 से उपलब्ध जलवायु संबंधी आंकड़ों के आधार पर राज्य में तापमान का उतार-चढ़ाव, वर्षा क्रम और मौसम संबंधी प्रतिकूल घटनाओं का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 का वार्षिक औसत तापमान 20.77 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.96 डिग्री अधिक था।

वर्ष के दौरान अधिकांश समय अधिकतम और न्यूनतम, दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहे। वार्षिक न्यूनतम तापमान 1901 के बाद से अब तक का सर्वाधिक रहा, जबकि इस अवधि में तीसरी बार अधिकतम तापमान सर्वाधिक रहा।

रिपोर्ट में 2025 को मेघालय के दर्ज जलवायु इतिहास का सबसे गर्म वर्ष बताया गया है। इसके बाद राज्य के पांच सबसे गर्म वर्षों की सूची में 2023, 2024, 2021 और 2022 शामिल हैं।

वर्ष 1901 से 2025 के बीच राज्य के वार्षिक औसत तापमान में हर सदी 0.73 डिग्री सेल्सियस की दर से वृद्धि हुई है। इस दौरान न्यूनतम तापमान में हर सदी 0.62 डिग्री, जबकि अधिकतम तापमान में 0.85 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तापमान में यह वृद्धि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान विशेष रूप से अधिक रही। इस मौसम में अधिकतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इस प्रकार, 1901 के बाद से यह अधिकतम तापमान के लिहाज से सबसे गर्म मानसून काल रहा।

रिकॉर्ड गर्मी के बावजूद मेघालय में 2025 के दौरान बारिश भी काफी कम हुई।

वर्ष 2025 में राज्य में दीर्घकालिक औसत की तुलना में कुल 73 प्रतिशत बारिश ही दर्ज की गई। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर रही इस दौरान सामान्य वर्षा की तुलना में केवल 57 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई।

हालांकि, मानसून-पूर्व अवधि में सामान्य से अधिक बारिश होने के कारण वार्षिक वर्षा की कुल कमी कुछ हद तक कम हो गई। मानसून-पूर्व वर्षा का राज्य की कुल वार्षिक वर्षा में लगभग 19.1 प्रतिशत योगदान रहता है।

जून से अक्टूबर तक अधिकांश महीनों में बारिश सामान्य से कम रही। इनमें जुलाई में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई।

आईएमडी के इस आकलन का उद्देश्य कृषि, जल प्रबंधन, बिजली, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में योजनाएं तैयार करने के लिए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराना है।

भाषा खारी पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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