चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने उत्तरी चेन्नई के एन्नोर से महाबलीपुरम होते हुए पुडुचेरी तक करीब 200 किलोमीटर लंबी कोस्टल रोड परियोजना को ‘प्राथमिकता’ देने का फैसला किया है.
इस परियोजना में बंगाल की खाड़ी के किनारे एक एलिवेटेड कोस्टल रोड बनाया जाएगा. इसका मकसद राज्य के मशहूर ईस्ट कोस्ट के साथ कनेक्टिविटी बेहतर करना और भीड़भाड़ वाली ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) पर दबाव कम करना है.
चेन्नई और पुडुचेरी के बीच सड़क की दूरी करीब 165 किलोमीटर है. भीड़भाड़ वाली ECR या ओल्ड महाबलीपुरम रोड (OMR) से सफर करने में 3 से 3.5 घंटे लगते हैं. ECR पर अभी पर्यटकों, स्थानीय लोगों और कमर्शियल वाहनों की भारी आवाजाही होती है. प्रस्तावित कोस्टल रोड से औद्योगिक और बंदरगाहों की कनेक्टिविटी बेहतर होने और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है.
लोक निर्माण, हाईवे और छोटे बंदरगाह विभाग के मंत्री आधव अर्जुन ने तमिलनाडु विधानसभा में अपने विभागों के लिए अनुदान की मांगों पर जवाब देते हुए यह योजना बताई. उन्होंने कहा कि कोस्टल कॉरिडोर के लिए व्यवहार्यता अध्ययन 2025-26 वित्तीय वर्ष में शुरू किया गया था, लेकिन इसमें आगे कोई प्रगति नहीं हुई. उन्होंने कहा कि TVK के नेतृत्व वाली सरकार अब इस कॉरिडोर को प्राथमिकता देगी और इसके काम में तेजी लाएगी. उनके मुताबिक, इससे शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा, ट्रैफिक कम होगा और अगले 100 साल तक राज्य को फायदा मिलेगा.
इस कॉरिडोर को एक आधुनिक एलिवेटेड रोड के रूप में बनाने की योजना है. इसके लिए मुंबई-नवी मुंबई सी-लिंक और मुंबई की कोस्टल रोड जैसी परियोजनाओं से प्रेरणा ली जाएगी.
हाईवे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सी-लिंक को अलग-अलग चरणों में बनाया जाएगा और इसे पर्यावरण के अनुकूल निर्माण तकनीकों के साथ तैयार किया जाएगा, ताकि समुद्री जीवों के पर्यावरण और तटीय इलाकों पर कम से कम असर पड़े. कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ) की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना शुरू की जाएगी.
ऐसी परियोजना का प्रस्ताव पहली बार नहीं आया है. 2025 में तत्कालीन हाईवे मंत्री ई. वी. वेलु ने ECR पर एन्नोर से महाबलीपुरम के पास पूंझेरी तक सी-लिंक बनाने की घोषणा की थी. अंतिम रूट के आधार पर इसकी लंबाई 90 किलोमीटर तक हो सकती थी.
इस परियोजना के लिए एक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जा रही थी. इसमें IIT-मद्रास के कुछ विशेषज्ञों सहित अन्य विशेषज्ञों की मदद ली जा रही थी. उस हिस्से की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 27,600 करोड़ रुपये थी. परियोजना को तीन चरणों में पूरा करने की योजना थी और व्यवहार्यता अध्ययन के लिए करीब 3.8 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि आवंटित की गई थी. मौजूदा प्रस्ताव में परियोजना को महाबलीपुरम पर खत्म करने के बजाय आगे पुडुचेरी तक ले जाने की योजना है, जिससे एक लंबा कोस्टल कॉरिडोर बनेगा.
इस कॉरिडोर से तट के किनारे मौजूद औद्योगिक केंद्रों, पर्यटन स्थलों, बंदरगाहों और शहरी केंद्रों को जोड़ने की उम्मीद है. प्रस्तावित सी-लिंक का रूट समुद्र में तट से कुछ दूरी पर होगा. इसलिए जमीन अधिग्रहण की जरूरत कम होगी, क्योंकि घनी आबादी वाले रिहायशी या मछुआरों वाले इलाकों से बचा जा सकेगा.
इस बीच, तमिलनाडु सरकार ऐतिहासिक बकिंघम नहर के किनारे एक वॉटर मेट्रो सुविधा शुरू करने की भी योजना बना रही है. इसका मकसद उत्तरी चेन्नई के एन्नोर से दक्षिण में महाबलीपुरम के बीच एक आधुनिक अंदरूनी जल परिवहन व्यवस्था विकसित करना है.
फिलहाल, चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) ने करीब 70 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की व्यवहार्यता जांचने के लिए डिटेल्ड फीजिबिलिटी रिपोर्ट (DFR) और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए टेंडर जारी किए हैं.
इस अध्ययन में नहर की बहाली की जांच की जाएगी. गाद जमना, अवैध कब्जे और प्रदूषण को इसकी बड़ी चुनौती माना गया है. इसके अलावा पानी के रास्ते परिवहन की क्षमता, यात्रियों की संभावित संख्या, टर्मिनल का इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण और सामाजिक असर, लागत का अनुमान, वित्तीय मॉडल और मौजूदा परिवहन साधनों जैसे मेट्रो रेल, MRTS, बस और लोकल ट्रेनों के साथ इसके जुड़ाव का भी आकलन किया जाएगा.
अगर यह परियोजना व्यवहार्य पाई जाती है, तो इसे कोच्चि वॉटर मेट्रो की तरह एयर-कंडीशंड, मेट्रो जैसी यात्री नाव सेवा के रूप में विकसित करने की योजना है.
प्रस्तावित वॉटर मेट्रो उत्तर-दक्षिण के बीच सार्वजनिक परिवहन का एक और विकल्प भी देगी. इससे समानांतर सड़कों पर दबाव कम होगा और पर्यटन और मनोरंजन को बढ़ावा मिलेगा. कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद व्यवहार्यता रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है. इसके बाद सरकार परियोजना को लागू करने पर फैसला करेगी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: तुकाराम मुंढे दिखाते हैं कि भारत में खाना एक बड़ा मुद्दा है. बस वैसे नहीं, जैसा BJP ने सोचा था