नई दिल्ली: बुधवार को शिलॉन्ग में हुई हिंसा और तोड़फोड़ के बाद मेघालय पुलिस ने छात्र संगठन और स्थानीय लोगों के हितों के लिए काम करने वाले दबाव समूह खासी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के तीन बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया.
ईस्ट खासी हिल्स जिले की पुलिस ने केएसयू की ओर से निकाली गई बाइक रैली और फ्लैग मार्च के बाद ये गिरफ्तारियां कीं. यह रैली और फ्लैग मार्च बाद में बड़े स्तर की हिंसा में बदल गया. इस दौरान सार्वजनिक संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई, जिसमें सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद की दो मूर्तियां भी शामिल थीं. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हिंसा में 31 वाहन क्षतिग्रस्त हुए.
फ्लैग मार्च 15 दिन की उस समय सीमा के खत्म होने के बाद निकाला गया था, जो कॉनराड संगमा सरकार को KSU के पांच मुद्दों पर जवाब देने के लिए दी गई थी. इनमें स्थानीय लोगों के पक्ष में मेघालय पब्लिक सर्विस कमीशन (MPSC) की भर्ती प्रक्रिया में सुधार भी शामिल है.
पुलिस महानिदेशक (DGP) इदाशिशा नोंगरांग ने दिप्रिंट को बताया, “शिलॉन्ग में हुई हिंसा की घटना की जांच के तहत KSU के तीन बड़े नेताओं रेमंड खरजाना, पिनकेमलांग सनमिएत और रूबेन नाजियार को गिरफ्तार किया गया है.”
खरजाना इस संगठन के अध्यक्ष हैं, जो मेघालय में खासी समुदाय के हितों के लिए आवाज़ उठाने के लिए जाना जाता है. सनमिएत उपाध्यक्ष हैं, जबकि नाजियार महासचिव हैं. स्थानीय अदालत ने तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
डीजीपी ने कहा, “प्रशासन ने तय कार्यक्रम और तय रास्तों के आधार पर केएसयू को फ्लैग मार्च और बाइक रैली निकालने की अनुमति दी थी. केएसयू ने इन रास्तों और कार्यक्रम को मानने का वादा भी किया था. हिंसा और तोड़फोड़ ने अनुमति के लिए तय किए गए नियमों और शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन किया.”
जिला प्रशासन ने बुधवार को दो घंटे के लिए, शाम 3 बजे से शाम 5 बजे तक, केएसयू को रैली और काले झंडे के साथ फ्लैग मार्च निकालने की अनुमति दी थी.
ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विवेक सिएम ने दिप्रिंट को बताया, कुल मिलाकर जिला पुलिस ने 15 एफआईआर दर्ज की हैं. केएसयू नेताओं को एक एफआईआर की जांच के तहत गिरफ्तार किया गया. यह एफआईआर स्थानीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिन्होंने सड़क पर हुई हिंसा की घटना का रिकॉर्ड तैयार किया था.
बाद में केएसयू के पूर्व अध्यक्ष लैम्बोकस्टारवेल मारंगार ने कहा कि केएसयू के तीन वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी से संगठन कमजोर नहीं होगा.
इसके बजाय, उन्होंने एक बयान में कहा कि इन गिरफ्तारियों से पांच मांगों वाले अपने चार्टर को लेकर लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखने का संगठन का संकल्प और मजबूत होगा. “आप नेताओं को गिरफ्तार कर सकते हैं, लेकिन मुद्दों को गिरफ्तार नहीं कर सकते. मुद्दे जारी रहेंगे.”
मारंगार ने आगे कहा, “हमारी मुख्य मांग पांच मांगों को लागू करना है. हमारे नेता रिहा हों या नहीं, मुद्दे जारी रहेंगे और केएसयू अपना लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखेगा.”
15 दिन की समय सीमा
हिंसा तब शुरू हुई जब केएसयू के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बाइक रैली निकाली. इसके लिए जिला प्रशासन ने अनुमति दी थी.
हालांकि, जिला प्रशासन ने कहा कि प्रदर्शन के लिए तय की गई शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन हुआ.
ईस्ट खासी हिल्स के डिप्टी कमिश्नर अभिलाष बरनवाल ने दिप्रिंट को बताया, “यह तय हुआ था कि प्रदर्शनकारियों के बीच कोई भी मास्क पहने व्यक्ति नहीं होगा और प्रदर्शन के दौरान उनके पास कोई ज्वलनशील सामान भी नहीं होगा, लेकिन सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो में कई मास्क पहने हुए लोग दिखाई दे रहे हैं.”
दूसरी ओर, मारंगार ने कहा कि केएसयू ने साफ किया था कि कुछ लोग गलत इरादे से रैली में शामिल हो गए होंगे, ताकि हंगामा किया जा सके और संगठन की छवि खराब की जा सके.
उन्होंने कहा, “केएसयू का नेतृत्व करते हुए अपने नौ साल के दौरान मैंने यूनियन के कार्यक्रमों को खराब करने की कोशिशें देखी हैं. हम समझदारी और लोकतांत्रिक तरीकों से अपना आंदोलन जारी रखेंगे, हथियारों के साथ नहीं.”
अधिकारियों ने बताया कि हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने शिलॉन्ग के ख्यांडाई लाड में धरना देने की केएसयू को पहले दी गई अनुमति वापस ले ली.
3 अगस्त को केएसयू के महासचिव नाजियार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और अपनी पांच मांगों को लेकर उनसे तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की.
केएसयू की मांगों में जूनियर स्तर के गैर-राजपत्रित पदों पर भर्ती के लिए व्यक्तिगत इंटरव्यू की अनिवार्यता खत्म करना भी शामिल था. मुख्यमंत्री को लिखे आठ पन्नों के पत्र में केएसयू ने कहा कि इंटरव्यू की प्रक्रिया “निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती में बड़ी रुकावट” है.
केएसयू के पत्र में कहा गया, “हालांकि भारत सरकार की ओर से साफ निर्देश दिया गया है, फिर भी राज्य में व्यक्तिगत इंटरव्यू जारी हैं, जो निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती में बड़ी रुकावट है.”
“इसलिए यूनियन की जोरदार मांग है कि भ्रष्टाचार रोकने और निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए Grade B (non-gazetted), C और D के पदों के लिए व्यक्तिगत इंटरव्यू खत्म किए जाएं.”
केएसयू ने सरकार से ‘MPSC Reform Committee 2025’ की सिफारिशों को लागू करने की भी मांग की. इसका मकसद राज्य लोक सेवा आयोग और जिला स्तर पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया में सुधार करना है. KSU ने कहा कि इनमें से कई सिफारिशें लागू की गई हैं, लेकिन कुछ अभी लागू नहीं हुई हैं.
पत्र में कहा गया, “एक और बड़ा मुद्दा यह है कि MPSC की ओर से जारी किसी भी विज्ञापन में ऐसे सभी उम्मीदवारों से आवेदन मांगे जाते हैं, जो ‘भारत के वास्तविक निवासी’ हैं.”
केएसयू ने कहा कि यह दूसरे राज्यों के नियमों के उलट है, जहां सिर्फ वहां के निवासियों से आवेदन लिए जाते हैं, “राज्य सरकार की नौकरियां सिर्फ राज्य के वास्तविक निवासियों के लिए होती हैं और इससे किसी भी तरह का अलग बदलाव यूनियन स्वीकार नहीं करेगी.”
दूसरी मांगों में मेघालय से अवैध प्रवासियों का पता लगाने और उन्हें वापस भेजने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास करना भी शामिल है.
केएसयू ने कहा, “कई प्रदर्शनों के बाद 2024 में यूनियन ने मेघालय सरकार के साथ बातचीत की थी. सरकार ने रोजगार के नाम पर होने वाले अवैध प्रवास को रोकने, प्रवासी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन करने और काम के लिए आने वाले प्रवासी मजदूर के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच के लिए पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी बनाने के लिए Migrant Workman Act, 2020 में संशोधन का प्रस्ताव दिया था.”
बुधवार को मेघालय के कैबिनेट मंत्री वेलाडमिकी श्याला ने कहा कि सरकार केएसयू की ओर से उठाई गई सभी मांगों पर चर्चा करने के लिए तैयार है.
पुलिस की शिकायत में शिलॉन्ग के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने बताया कि कई बाइक सवारों ने अपनी नंबर प्लेट ढक रखी थीं. शिकायत में कहा गया, “समूह या जुलूस का हिस्सा रहे लोगों को सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और उन्हें नुकसान पहुंचाते हुए पकड़ा गया, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ. यह भी बताया गया कि रैली के दौरान निजी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया.”
इसमें आगे कहा गया, “यह भी बताया गया कि रैली के दौरान आम लोगों में से एक व्यक्ति पर डंडों और दूसरी धारदार चीजों से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी जान खतरे में पड़ गई. यह हत्या की कोशिश के बराबर था.”
शिकायत में यह भी कहा गया कि डंडे और रॉड लेकर चल रहे सदस्यों ने दूसरे लोगों पर भी हमला किया.
शिकायत के आधार पर पुलिस ने बुधवार शाम केएसयू नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया. जब शाम को पुलिस की एक टीम तीनों को गिरफ्तार करने गई, तो प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पेट्रोल बम फेंके. इसके बाद एक और एफआईआर दर्ज की गई.
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