बनिहाल/जम्मू, 21 मई (भाषा) जम्मू-कश्मीर में खूनी नाले के निकट 250 से अधिक ग्रामीण डेरा डाले हुए हैं।
दो दिन पहले खूनी नाले के निकट एक निर्मांणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से भीषण भूस्खलन के चलते 13 मजदूर मलबे में दब गए थे। वहां बैठे लोगों में दो लापता श्रमिकों के संबंधी भी शामिल हैं।
वे किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन किसी के भी बचने की उम्मीद अब कम होती जा रही है। घटनास्थल से अब तक नौ शव बरामद किए जा चुके हैं।
पंथियाल गांव के निवासी मुजफ्फर अहमद शेख (38) और मोहम्मद इशरत (30) उन 13 मजदूरों में शामिल थे, जो बृहस्पतिवार देर रात मलबे में दब गए थे।
सरपंच जहूर अहमद शेख के नेतृत्व में पंथियाल गांव के 250 से अधिक निवासी दुर्घटना के बारे में सुनकर तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।
सरपंच ने घटनास्थल से फोन पर ‘’पीटीआई-भाषा’’ से कहा, ”हर गुजरते घंटे के साथ, हम किसी भी जीवित व्यक्ति को खोजने की उम्मीद खो रहे हैं। हर बार जब कोई शव मिलता है, तो हमारा दिल तेजी से धड़कने लगता है। हम उन्हें जीवित देखना चाहते हैं और उनके लिए प्रार्थना कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि दोनों लापता व्यक्ति उनके करीबी रिश्तेदार हैं, जो अपने परिवार के अकेले कमाने वाले हैं।
मुजफ्फर के परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। इशरत के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है।
शेख ने कहा, ”दोनों परिवार बुरे सपने से गुजर रहे हैं और दुख की इस घड़ी में उन्हें समर्थन की जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि बचावकर्मी पहाड़ी पर फिसलन होने के कारण उन्हें अभियान में शामिल नहीं होने दे रहे हैं।
पश्चिम बंगाल, असम और नेपाल के इन मजदूरों के परिवार सहित गरीब परिवारों के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग करते हुए उन्होंने कहा, ”हम धैर्यपूर्वक इंतजार कर रहे हैं और अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं।”
इस घटना के बाद कश्मीर को देश के शेष हिस्सों से जोड़ने वाले जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित रहा।
भाषा
जोहेब देवेंद्र
देवेंद्र
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