Saturday, 2 July, 2022
होमहेल्थअगर एंटीबॉडी भी फेल, तो कोरोना रिकवर मरीजों को ओमीक्रॉन से बचा सकते हैं T-सेल, US स्टडी में दावा

अगर एंटीबॉडी भी फेल, तो कोरोना रिकवर मरीजों को ओमीक्रॉन से बचा सकते हैं T-सेल, US स्टडी में दावा

अमेरिका में हाल में की गई इस स्टडी में बताया गया है मौजूदा SARS-CoV-2 CD8+ के टी-सेल सभी व्यक्तियों में ओमीक्रॉन की पहचान करने में सक्षम है और CD8+ टी-सेल वे कोशिकाएं हैं जो संक्रमित कोशिकाओं को मारने का काम करती हैं.

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नई दिल्ली: अमेरिका से हाल ही में आई एक रिपोर्ट में ऐसे संकेत दिए गए हैं कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में पाई जाने वाली टी-सेल कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन का मुकाबला करने में सक्षण है. ऐसा उन लोगों के साथ हो सकता है जो पहले कोरोना से संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं.

टी-सेल हमारे खून में पाए जाने वाली व्हाइट सेल्स की तरह है जो रोग से लड़ने वाली प्रतिरोधक क्षमता में अहम भूमिका निभाते हैं. ये टी-सेल संक्रमित कोशिकाओं के खत्म करने और एंटीबॉडी पैदा करने के लिए प्रोटीन रिलीज करने में मदद करते हैं.

यह स्टडी यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी द्वारा की गई है. इस स्टडी को bioRxiv नाम के पोर्टल पर पब्लिश किया गया था और इसकी समीक्षा किया जाना अभी बाकी है.

बड़ी मात्रा में पहले कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में ओमीक्रॉन से संक्रमित मामलों की रिपोर्ट की जा रही है. इसके साथ ही 30 म्यूटेशन मामलों की पुष्टि भी हुई है. होने की पुष्टि हुई. ऐसा कहा जा रहा है कि कोरोना का नया वैरिएंट ओमीक्रॉन वैक्सीन और पिछले कोरोना संक्रमण से पैदा एंटीबॉडी को चकमा देने में कामयाब है.

अब स्टडी में मौजूद डेटा बताता है कि मौजूदा SARS-CoV-2 CD8+ के टी-सेल सभी व्यक्तियों में ओमीक्रॉन की पहचान करने में सक्षम है. CD8+ टी-सेल वे कोशिकाएं हैं जो संक्रमित कोशिकाओं को मारने का काम करती हैं.

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शोधकर्ताओं ने बताया है कि SARS-CoV-2 ने अभी व्यापक टी-सेल एस्केप म्यूटेशन विकसित नहीं किया है. हालांकि शोधकर्ताओं ने यह स्वीकार किया है कि स्टडी में कुछ सीमाएं हैं जैसे कि सीमित सैंपलों की संख्या.

इस स्टडी में ऐसे 30 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए जो साल 2020 अप्रैल-मई में कोरोना संक्रमण से रिकवर हुए थे.

इसके बाद इन्होंने वायरस के उस हिस्से की पहचान की जिसे CD8+ टी-सेल टारगेट करता है. इस अध्यन में ओमीक्रॉन के 50 से ज्यादा म्यूटेन्स का अध्यन किया गया है. जिसमें उन्हें सिर्फ एक एपिटोपे में बदलाव मिला. इसका अर्थ हुआ कि ज्यादातर संक्रमित कोशिकाएं टी-सेल से बचकर निकलने में नाकामयाब हुई.

टीम ने अपने अध्ययन के लिए कई सीमाओं को स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि ये परिणाम उन व्यक्तियों के अपेक्षाकृत छोटे नमूने के आकार पर आधारित हैं जो सभी अमेरिका से थे.

स्टडी में सिर्फ उन सैंपलों पर टी-सेल के रिसपॉन्स की जांच की गई जो पहले कोरोना संक्रमण से रिकवर हो चुके थे, इनमें वो लोग शामिल नहीं थे जिन्हें कोरोना का टीका लगाया जा चुका है.

हालांकि यह संभव है कि टी-सेल का रिस्पॉन्स उन लोगों में सीमित है जो पहले से कोरोना संक्रमित नहीं हुए हैं और उन्हें कोरोना का टीका लगाया जा चुका है.

हालांकि, टीम ने कहा कि पहले टीकाकरण वाले लोगों से टी-सेल रिस्पॉन्स की जांच के काम ने मजबूत टी-सेल रिस्पॉन्स का प्रदर्शन किया है, उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि इस आबादी में भी इसी तरह के रुझान देखे जाने चाहिए.


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