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Monday, 5 October, 2026
होमहेल्थEXCLUSIVE: मेडिकल इंटर्न का स्टाइपेंड एक जैसा करने के पक्ष में नहीं NMC, राज्य ले सकते हैं फैसला

EXCLUSIVE: मेडिकल इंटर्न का स्टाइपेंड एक जैसा करने के पक्ष में नहीं NMC, राज्य ले सकते हैं फैसला

NMC के पास लंबित प्रस्ताव में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में UG MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड में समानता और स्टाइपेंड नहीं दिए जाने के मामलों की जांच की मांग की गई है.

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नई दिल्ली: मेडिकल इंटर्न के लिए पूरे देश में एक तय स्टाइपेंड राशि नहीं हो सकती, लेकिन राज्य अपने यहां सभी मेडिकल कॉलेजों में समान रूप से लागू होने वाली स्टाइपेंड राशि तय करने पर विचार कर सकते हैं. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि राज्य की नीति समय-समय पर कानूनों और अदालतों के अलग-अलग फैसलों की व्याख्या के अधीन होगी.

दिसंबर 2025 से एनएमसी के पास लंबित इस प्रस्ताव में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में समानता और स्टाइपेंड नहीं दिए जाने के मामलों की जांच करने की मांग की गई है.

अलग से, रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठनों और मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने राज्यों और संस्थानों में एक समान न्यूनतम स्टाइपेंड की मांग की है. यह मांग बड़े स्तर पर चल रहे “वन नेशन, वन स्टाइपेंड” अभियान के तहत की जा रही है.

पूरे देश में स्टाइपेंड में समानता की मांग पर NMC के अधिकारी ने कहा, “पूरे देश में एक ही स्टाइपेंड नहीं दिया जा सकता. यह मुश्किल है क्योंकि जिन छोटे राज्यों का वित्तीय बजट कम है, वे इतना ज्यादा स्टाइपेंड नहीं दे सकते. स्टाइपेंड की राशि संबंधित राज्यों को ही तय करनी होगी और यह पूरी तरह उनके नियामक अधिकार क्षेत्र में आता है.”

अधिकारी ने कहा कि NMC मेडिकल इंटर्न को दिए जाने वाले स्टाइपेंड में अंतर को मानता है. उन्होंने कहा, “व्यापक सिद्धांत यह होना चाहिए कि किसी भी इंटर्न को बिना स्टाइपेंड के नहीं छोड़ा जाना चाहिए. इसमें भारत में अनिवार्य इंटर्नशिप कर रहे विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) भी शामिल हैं.”

ये बातें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 6 नवंबर 2025 को NMC को लिखे पत्र और दिसंबर में भेजे गए रिमाइंडर के बाद सामने आई हैं. मंत्रालय ने NMC से स्टाइपेंड में समानता और कुछ FMG को स्टाइपेंड नहीं दिए जाने की रिपोर्ट के मुद्दे की जांच करने को कहा था. सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के बीच स्टाइपेंड की राशि में बड़े अंतर को लेकर भी चिंता जताई गई थी.

फिलहाल, NMC के Compulsory Rotating Medical Internship (CRMI) Regulations, 2021 में कहा गया है कि मेडिकल इंटर्न को स्टाइपेंड “संस्थान/यूनिवर्सिटी या राज्य में लागू संबंधित अथॉरिटी द्वारा तय” राशि के अनुसार दिया जाना चाहिए.

सीधे शब्दों में कहें तो NMC के नियम हर मेडिकल इंटर्न के लिए एक तय राशि नहीं रखते. राशि राज्य या मेडिकल कॉलेज पर लागू संबंधित अथॉरिटी तय कर सकती है. हालांकि, NMC के अधिकारी ने कहा कि आयोग ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी संस्थान में FMG और भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट (IMG) को दिए जाने वाले स्टाइपेंड में कोई अंतर नहीं होना चाहिए.

इस मुद्दे में एक और परेशानी तब सामने आई जब NMC के Postgraduate Medical Education Regulations, 2023 में यह प्रावधान शामिल किया गया कि जूनियर रेजिडेंट (JR) को उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में राज्य सरकार या केंद्र सरकार के मेडिकल संस्थान में काम करने वाले जूनियर रेजिडेंट के बराबर स्टाइपेंड मिलना चाहिए, जहां उसका मेडिकल कॉलेज स्थित है. इसका मतलब था कि किसी निजी मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजिडेंट को उसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजिडेंट के बराबर स्टाइपेंड मिलना चाहिए.

फरवरी 2026 में NMC के Undergraduate Medical Education Board (UGMEB) ने कहा कि 2021 के नियमों में किसी भी बदलाव के लिए कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के साथ सलाह-मशविरा जरूरी होगा. यह मुद्दा अभी भी हल नहीं हुआ है. वहीं, कई राज्यों में मेडिकल इंटर्न कम और अलग-अलग स्टाइपेंड को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं.

मिसाल के तौर पर, जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS इंटर्न ने 31 अगस्त से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू किया था. वे अपने स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे थे. मध्य प्रदेश में मेडिकल इंटर्न ने स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग की. इसके बाद राज्य ने स्टाइपेंड बढ़ाकर 21,500 रुपये कर दिया.

उत्तर प्रदेश ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS और BDS इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड 12,000 रुपये से दोगुना करके 25,000 रुपये कर दिया. वहीं, बिहार ने इसे 20,000 रुपये से बढ़ाकर 27,000 रुपये कर दिया. उत्तराखंड ने भी स्टाइपेंड बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया.

अलग-अलग राज्यों में अलग राशि दिए जाने के अलावा, कुछ इंटर्न ने स्टाइपेंड नहीं मिलने या राज्य में लागू राशि से काफी कम स्टाइपेंड मिलने की शिकायत भी की है.

2025 के NMC के आंकड़ों के मुताबिक, 555 मेडिकल कॉलेजों में से 60 ने स्टाइपेंड नहीं दिया था. वहीं, कई अन्य कॉलेजों ने हर महीने 5,000 रुपये से भी कम स्टाइपेंड देने की जानकारी दी थी.

सुप्रीम कोर्ट भी स्टाइपेंड नहीं दिए जाने के मुद्दे की जांच कर रहा है. अक्टूबर 2025 के एक आदेश में कोर्ट ने स्टाइपेंड से जुड़ी जानकारी देने के अपने निर्देशों का पालन नहीं करने वाले कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई में देरी को लेकर NMC से सवाल किया था. कोर्ट ने कहा था कि नियामक इस मामले में “जानबूझकर कदम नहीं उठा रहा” ऐसा लगता है.

यह मुद्दा FMG से जुड़े मामलों में भी सामने आया है. FMG यानी ऐसे डॉक्टर जिन्होंने भारत के बाहर से मेडिकल की डिग्री ली है और भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए रजिस्ट्रेशन हासिल करने से पहले उन्हें यहां अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करनी होती है. फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अपनी इंटर्नशिप पूरी कर चुके कुछ FMG को बकाया स्टाइपेंड देने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि एक जैसी स्थिति वाले FMG के साथ उन लोगों से अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता, जिन्हें स्टाइपेंड मिला था.

NMC के वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि हाल ही में Under-Graduate Medical Education Board (UGMEB) ने स्टाइपेंड से जुड़ी जानकारी नहीं देने पर आठ संस्थानों पर आर्थिक जुर्माना लगाया है. अधिकारी ने कहा कि आयोग लागू स्टाइपेंड नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा.

उन्होंने आगे कहा, “हम और ज्यादा सतर्क और सख्त होने जा रहे हैं. हम स्टाइपेंड नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे, क्योंकि माननीय सुप्रीम कोर्ट का इस बारे में साफ निर्देश है. जुर्माना सिर्फ आर्थिक नहीं होगा. अगर कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता भी प्रभावित हो सकती है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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