scorecardresearch
Tuesday, 3 November, 2026
होमहेल्थHPV वैक्सीन को लेकर डर बरकरार, दिल्ली के मुफ्त कैंप में 200 में सिर्फ 34 लड़कियों ने लगवाया टीका

HPV वैक्सीन को लेकर डर बरकरार, दिल्ली के मुफ्त कैंप में 200 में सिर्फ 34 लड़कियों ने लगवाया टीका

फ्री वैक्सीनेशन ड्राइव में कम लोग आए, यह दिखाता है कि जागरूकता को एक्सेप्टेंस में बदलना कितना मुश्किल है क्योंकि इनफर्टिलिटी और साइड-इफेक्ट्स के बारे में गलत बातें और गलत जानकारी माता-पिता के फैसलों पर असर डालती हैं.

Text Size:

नई दिल्ली: एक नर्स ने एक छोटी लड़की के हाथ को साफ किया और धीरे-से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का टीका लगाया. उनकी मां उनके पास खड़ी थीं और बेटी के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें हिम्मत दे रही थीं. आसपास डॉक्टर माता-पिता के कई सवालों का जवाब दे रहे थे. ज्यादातर सवाल टीका लगाने के बारे में नहीं, बल्कि इस बात को लेकर थे कि क्या इससे भविष्य में बच्चे पैदा करने की क्षमता (फर्टिलिटी) पर असर पड़ेगा, क्या इससे युवावस्था (प्यूबर्टी) में देरी होगी या कोई गंभीर साइड इफेक्ट होगा.

इन्हीं लोगों में गाजियाबाद की शेली ढींगरा भी थीं, जो स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी हैं. उन्होंने अपनी 13 साल की बेटी का टीकाकरण नहीं कराने का फैसला किया. उनकी बेटी काव्या को हाल ही में पहली बार पीरियड्स शुरू हुए हैं.

उन्होंने कहा, “उसे अभी-अभी पीरियड्स शुरू हुए हैं, इसलिए मैं नहीं चाहती कि इस समय टीके की वजह से उसके मासिक धर्म पर कोई असर पड़े.” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस टीके के कुछ साइड इफेक्ट्स के बारे में सुना है, जैसे हल्का बुखार, हाथ में दर्द, सिरदर्द और चक्कर आना.

सोमवार को तीन दिन का यह कैंप खत्म होने तक दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) के 200 लड़कियों को टीका लगाने के लक्ष्य में से सिर्फ 34 लड़कियों को ही टीका लगाया जा सका.

DSCI के डॉक्टरों का कहना है कि ये आंकड़े सिर्फ कम लोगों के आने की कहानी नहीं बताते. ये दिखाते हैं कि लोगों को जागरूक करने के बाद भी उन्हें टीका लगवाने के लिए तैयार करना बड़ी चुनौती है. बांझपन और साइड इफेक्ट्स से जुड़ी अफवाहें और गलत जानकारी अब भी माता-पिता के फैसलों को प्रभावित कर रही हैं.

यह मुफ्त टीकाकरण अभियान 25 से 27 जुलाई तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दिल्ली गवर्नमेंट अचीवमेंट्स एंड स्कीम्स एक्सपो 2026 के दौरान DSCI की प्रमुख कैंसर अवेयरनेस, प्रिवेंशन एंड स्क्रीनिंग (CAPS) पहल के तहत लगाया गया था.

यह कैंप पूरे देश में HPV टीकाकरण बढ़ाने की केंद्र सरकार की बड़ी योजना का हिस्सा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में अजमेर से इस राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इसका लक्ष्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए हर साल करीब 1.2 करोड़ लड़कियों को मुफ्त HPV टीका लगाना है.

ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) एक आम वायरस है, जो यौन संपर्क के जरिए फैलता है. इसके कुछ खतरनाक प्रकार, खासकर HPV-16 और HPV-18, लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर लगभग सभी सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर) के मामलों की वजह बनते हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है. हर साल इसके 1.2 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं और करीब 80,000 महिलाओं की मौत होती है. 15 जुलाई 2026 तक भारत में 52.1 लाख से ज्यादा लड़कियों को HPV का टीका लगाया जा चुका था.

दिल्ली का यह कैंप पूरे देश में HPV टीकाकरण बढ़ाने की केंद्र सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है | फोटो: स्नेहा रिछारिया/दिप्रिंट
दिल्ली का यह कैंप पूरे देश में HPV टीकाकरण बढ़ाने की केंद्र सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा है | फोटो: स्नेहा रिछारिया/दिप्रिंट

‘हर दूसरा पेरेंट इनफर्टिलिटी के बारे में पूछता है’

क्योंकि वैक्सीन वायरस के संपर्क में आने से पहले सबसे अच्छा काम करती है, इसलिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन लड़कियों को टीनएज की शुरुआत में ही वैक्सीन लगाने की सलाह देता है. 2006 से अब तक दुनिया भर में 500 मिलियन से ज़्यादा HPV वैक्सीन डोज़ दी जा चुकी हैं. HPV वैक्सीन 160 देशों में नेशनल इम्यूनाइज़ेशन प्रोग्राम का हिस्सा हैं.

भारत में, सरकार के प्रोग्राम में US दवा बनाने वाली कंपनी मर्क की गार्डासिल वैक्सीन का इस्तेमाल होता है, जो 14 साल की लड़कियों को सिंगल डोज़ के तौर पर दी जाती है. यह वैक्सीन चार HPV टाइप—6, 11, 16 और 18 से बचाती है. जहां HPV-16 और HPV-18 लगभग 70-80 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामलों का कारण बनते हैं, वहीं HPV-6 और HPV-11 जेनिटल वार्ट्स के ज़्यादातर मामलों के लिए ज़िम्मेदार हैं.

वैक्सीन शुरू करने के साथ-साथ, हेल्थ मिनिस्ट्री वैक्सीन के बारे में गलत जानकारी को रोकने के लिए रेडियो, पोस्टर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए जागरूकता कैंपेन चला रही है.

डॉ. शुक्ला के मुताबिक, कैंपेन को ज़मीन पर लाने में माता-पिता का डर और झिझक अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है. उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “हमारे पास आने वाला हर दूसरा माता-पिता पूछता है कि क्या यह वैक्सीन उनकी बेटी की बाद में बच्चे पैदा करने की क्षमता पर असर डालेगी. यह सबसे आम चिंता है जो हम सुनते हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि HPV वैक्सीन को इनफर्टिलिटी से जोड़ने का कोई साइंटिफिक सबूत नहीं है, लेकिन कई माता-पिता ने सोशल मीडिया या लोगों से ये दावे बार-बार सुने हैं, इसलिए वे कोई फैसला लेने से पहले भरोसा चाहते हैं. डॉ. शुक्ला ने कहा कि बुखार और दूसरे कुछ समय के साइड-इफेक्ट्स की चिंता भी आम है.

उन्होंने कहा, “एक एग्ज़िबिशन में तीन दिन बिताना सालों से फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए शायद ही कभी काफी होता है. जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन भरोसा बनने में ज़्यादा समय लगता है.”

उन्होंने कहा, यह सुझाव देते हुए कि स्कूलों के ज़रिए लगातार काउंसलिंग से माता-पिता को वैक्सीनेशन कैंप लगाने से पहले सोच-समझकर फैसला लेने में मदद मिल सकती है.

धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है

जबकि ढींगरा ने इंतज़ार करना चुना, स्टॉल पर आने वाले हर माता-पिता के मन में कोई शक नहीं था. दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली वकील संध्या खोसला ने खुद HPV वैक्सीन लगभग एक दशक पहले लगवाई थी, जब दिल्ली के लाजपत नगर में एक प्राइवेट क्लिनिक में उनके गायनेकोलॉजिस्ट ने इसकी सलाह दी थी, भारत में पब्लिक वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू होने से कई साल पहले.

एक दोस्त से DSCI कैंप के बारे में सुनने के बाद, वह अपनी 11 साल की बेटी उमैरा को कैंप में ले आईं और उसे वैक्सीन लगवाई. उन्होंने कहा, “मुझे अपने अनुभव से इस वैक्सीनेशन के फायदों के बारे में पहले से पता था, इसलिए मैंने पक्का किया कि मेरी बेटी को भी समय पर एक शॉट मिले.” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें वैक्सीनेशन के न तो शॉर्ट-टर्म और न ही लॉन्ग-टर्म साइड-इफेक्ट्स हुए हैं.

कैंप के डॉक्टरों ने कहा कि इस बात का कोई साइंटिफिक सबूत नहीं है कि HPV वैक्सीन फर्टिलिटी या पीरियड्स की हेल्थ पर असर डालती है, लेकिन तीन दिन के कैंप के दौरान इनफर्टिलिटी, प्यूबर्टी, पीरियड्स और टेम्पररी साइड-इफेक्ट्स को लेकर चिंताएं सबसे आम सवालों में से थीं.

9 से 14 साल की एलिजिबल लड़कियों को फ्री HPV वैक्सीनेशन देने के अलावा, कैंप में ओरल, सर्वाइकल और प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग भी की गई.

DSCI के प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट की सीनियर रेजिडेंट डॉ. आकांक्षा सिन्हा ने कहा, “इन तीन दिनों में हमने 30 ओरल कैंसर स्क्रीनिंग, 22 सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग, 20 प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग कीं.”

डॉ. सिन्हा के मुताबिक, कैंप में HPV वैक्सीनेशन के बारे में 300 से ज़्यादा सवाल फिर से पूछे गए. उन्होंने कहा, “पोलियो वैक्सीन की तरह, HPV वैक्सीन के बारे में अवेयरनेस भी धीरे-धीरे बढ़ेगी.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: 40 की उम्र के बाद डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर साथ होने का खतरा बढ़ता है: 56 हजार भारतीयों पर स्टडी


 

share & View comments