नई दिल्ली: शनिवार को छह घंटे तक सौत्रिक गोस्वामी को पुलिस की एक बस में नई दिल्ली में इधर-उधर घुमाया गया. बस सफदरजंग से हरियाणा बॉर्डर, फिर बदरपुर, ओखला और छतरपुर तक गई. पुलिस बार-बार रास्ता बदलती रही, लेकिन उसे किसी ‘ठीक’ हिरासत केंद्र में नहीं ले गई. गोस्वामी ने दावा किया कि बस ही हिरासत केंद्र बन गई थी.
उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “ऐसा लग रहा था जैसे हम गोल-गोल घूम रहे हों. मैं पुलिसवालों की बातचीत सुन सकता था. वे इस बात को लेकर उलझन में थे कि आखिर हमें कहां ले जाना है.”
गोस्वामी उन 3,500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों में शामिल थे, जिन्हें जंतर-मंतर तक मार्च करने की कोशिश के बाद नई दिल्ली में हिरासत में लिया गया था. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन का आह्वान किया था.
पुलिस की कार्रवाई तब शुरू हो गई थी, जब कई प्रदर्शनकारी मध्य दिल्ली तक पहुंच भी नहीं पाए थे. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान में ही हिरासत में ले लिया गया. वहीं, दूसरे प्रदर्शनकारियों, ममता बनर्जी और पिनराई विजयन जैसे विपक्षी नेताओं और यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया गया.
पूरी राजधानी में 3,500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया. लेकिन सभी को रखने के लिए कोई एक हिरासत केंद्र नहीं था. प्रदर्शनकारियों को पुलिस थानों, बसों, स्टेडियमों और दिल्ली के बाहर की जगहों पर ले जाया गया. कई लोगों को रिहा किए जाने से पहले घंटों तक हिरासत में रखा गया.
पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में आने-जाने पर रोक लगा दी थी. राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे प्रदर्शनकारियों को रोका गया, हिरासत में लिया गया और अलग-अलग पुलिस थानों, स्टेडियमों और दूसरी जगहों पर ले जाया गया.

गोस्वामी के लिए पुलिस की यह कार्रवाई एक चलती हुई बस के अंदर हुई.
29 साल के गोस्वामी को AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा और दूसरे लोगों के साथ दोपहर करीब 3 बजे दिल्ली हाट से हिरासत में लिया गया था. उन्होंने बताया कि वे कई घंटों तक बस में रहे. इस दौरान बस शहर में घूमती रही और रास्ते में पुलिस और लोगों को भी हिरासत में लेकर बस में चढ़ाती रही.
उन्होंने दावा किया, “शुरुआत में मैं अकेला था, फिर अगले एक घंटे में बस में 20 लोग हो गए.”
सबसे पहले बस को मैदान गढ़ी पुलिस स्टेशन, असोला की तरफ ले जाया गया. इसके बाद बस हरियाणा बॉर्डर की ओर बढ़ी. गोस्वामी ने आरोप लगाया कि उन्होंने पुलिसवालों को आपस में यह बात करते सुना कि हिरासत में लिए गए लोगों को अब कहां ले जाना है.
उन्होंने कहा, “मैंने पुलिसवालों को फोन पर बात करते सुना. उनसे कहा गया था कि हमें बदरपुर पुलिस स्टेशन ले जाएं.”
लेकिन फिर मंजिल बदल गई.
उन्होंने कहा, “मैंने फिर सुना कि हमें ओखला ले जाया जा रहा है, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही मंजिल बदलकर छतरपुर कर दी गई.”

आखिरकार, शाम करीब 7 बजे गोस्वामी को दक्षिण दिल्ली के छतरपुर में एक ऐसी जगह पर उतार दिया गया, जिसके बारे में उन्हें ठीक से जानकारी नहीं थी. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ लोगों ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों का सामना किया.
उन्होंने आरोप लगाया, “हिंदू संगठनों के कुछ लोग हम पर हमला करने आए. जब मैं उन्हें रोकने गया, तो उन्होंने मुझे धक्का दिया. पुलिस दूर खड़ी होकर यह सब देखती रही.”
29 साल के गोस्वामी वहां से निकलने में कामयाब रहे. उन्होंने दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बस पकड़ी, नजदीकी मेट्रो स्टेशन पहुंचे और रात करीब 8 बजे घर पहुंच गए.
राष्ट्रीय राजधानी में अलग-अलग जगहों पर हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पुलिस ने उन्हें कैसे रोका, एक जगह से दूसरी जगह ले गई और घंटों तक हिरासत में रखा. कई बार उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है.
इस बीच, तीन स्तर की बैरिकेडिंग के कारण प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने में परेशानी हुई और तनाव बढ़ गया.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर निवेदिता मेनन भी बैरिकेडिंग के पास मौजूद लोगों में शामिल थीं. उन्होंने नई दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था को घेराबंदी बताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार का रवैया लोगों के डर को दिखाता है.
उन्होंने कहा, “यह लोगों के खिलाफ युद्ध है. एक डरी हुई सरकार लोगों के खिलाफ युद्ध छेड़ रही है. अगर आपकी हालत ऐसी हो गई है कि आपको यह सब करना पड़ रहा है, तो हम पहले ही जीत चुके हैं.”
‘महिलाओं के लिए असुरक्षित जगह’
जहां गोस्वामी घंटों तक चलती हुई बस में रहे, वहीं रितु असवाल और दो अन्य प्रदर्शनकारियों को एक सुनसान इलाके में स्थित स्टेडियम में ले जाया गया.
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गनाइजेशन से जुड़ी असवाल बंगला साहिब गुरुद्वारे के अलग-अलग गेट पर दूसरे प्रदर्शनकारियों के साथ इकट्ठा हो रही थीं. वह गेट नंबर 3 पर प्रेस से बात कर रही थीं, तभी पुलिस ने उन्हें और दूसरे लोगों को खींचकर वहां से हटा दिया.
उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “जब हम स्टेडियम पहुंचे, तो वहां पहले से ही 200 से ज्यादा लोग बैठे हुए थे.”
हिरासत में लिए गए लोगों को यह नहीं बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है. असवाल ने कहा कि स्टेडियम एक सुनसान इलाके में था और वहां मौजूद फैक्ट्री के मजदूरों ने उन्हें चेतावनी दी कि यह जगह महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है.
घंटों तक प्रदर्शन करने और रिहाई की मांग करने के बाद असवाल को मुंडका पुलिस स्टेशन ले जाया गया. वकीलों के पहुंचने के बाद शाम करीब 5:30 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया.

रिहा होने से पहले असवाल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके आधार कार्ड की जानकारी, पते और फोन नंबर दर्ज किए.
उन्होंने आरोप लगाया, “हम घंटों तक पानी मांगते रहे. हमें पानी नहीं दिया गया, लेकिन उन्होंने हमारी तस्वीरें खींचने और वीडियो बनाने के लिए एक फोटोग्राफर बुला लिया.”
द्वारका में रहने वाली 46 साल की असवाल CJP के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुई थीं. उन्होंने दावा किया कि जब वह स्टेडियम में थीं, तब उन्होंने दिल्ली पुलिस की गाड़ियों को हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर बार-बार आते-जाते देखा.
उन्होंने कहा, “कई लोगों ने वापस जाने के लिए कैब बुक की. मैंने अपने पति को फोन करके पुलिस स्टेशन से मुझे लेने आने को कहा.”
‘हमसे एक खाली कागज पर साइन करवाए गए’
राजधानी में प्रदर्शनकारियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का तरीका नई दिल्ली के दूसरे हिस्सों में भी लगभग ऐसा ही था.
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन की कार्यकर्ता श्रेया ने दिप्रिंट को बताया कि शनिवार को अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शनकारी नॉर्थ कैंपस इलाके से समूहों में निकले थे.
वह करीब 20 लोगों के एक ऐसे ही समूह का हिस्सा थीं. उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी जानबूझकर एक-दूसरे से कुछ दूरी बनाकर खड़े थे.
वे बस से शिवाजी स्टेडियम की ओर जा रहे थे, लेकिन सड़कें बंद होने के कारण उन्हें जाकिर हुसैन कॉलेज के पास उतार दिया गया.

इसके बाद समूह ने हाथों में पोस्टर लेकर मध्य दिल्ली की ओर पैदल चलना शुरू किया.
श्रेया ने दावा किया कि वे करीब 150 मीटर ही चले थे कि पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उन्हें हिरासत में ले लिया.
प्रदर्शनकारियों को बस में बैठाकर मॉरिस नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया. वहां घंटों इंतजार करने के बाद उन्हें सराय रोहिल्ला ले जाया गया.
उन्हें शाम करीब 7 बजे रिहा किया गया.
लेकिन श्रेया ने आरोप लगाया कि वहां से जाने से पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से एक खाली कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा और उनकी निजी जानकारी लिख ली.

श्रेया और उनके साथियों ने शुरुआत में खाली कागज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था. उनके मुताबिक, पुलिस ने उनसे कहा कि रिहा करने के लिए उनके हस्ताक्षर जरूरी हैं.
श्रेया ने आरोप लगाया, “हमारे शरीर पर नीले और काले निशान हैं. ये निशान उस दौरान पड़े, जब हमें तथाकथित हिरासत में रखा गया था. जब हम पुलिस स्टेशन से निकल रहे थे, तब हमारे वीडियो बनाए गए.”
उन्होंने बताया कि अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शनकारियों को नई दिल्ली के अंदर और बाहर कई जगहों पर ले जाया गया. इनमें गुरुग्राम और नांगलोई भी शामिल थे.
गोस्वामी, असवाल और श्रेया की बातें बताती हैं कि वे शहर के अलग-अलग रास्तों से गुजरे, लेकिन उनके साथ पुलिस की कार्रवाई का तरीका लगभग एक जैसा था. प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश करते समय उन्हें रोका गया, मध्य दिल्ली से दूर ले जाया गया और कई मामलों में रिहा करने से पहले घंटों तक हिरासत में रखा गया.
इस बीच, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सदस्य भी पुलिस की कार्रवाई की चपेट में आए.
दिप्रिंट से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, मध्य दिल्ली से हिरासत में लिए गए SFI के कई प्रदर्शनकारियों को दूसरी जगहों पर ले जाया गया, जबकि कुछ को HKS सुरजीत भवन में रखा गया. कई लोगों को नांगलोई स्टेडियम ले जाया गया, जहां हिरासत में लिए गए लोगों ने प्रदर्शन किया.
‘कोई FIR दर्ज नहीं की गई’
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, खुफिया जानकारी के आधार पर एहतियात के तौर पर लोगों को हिरासत में लिया गया था. इस जानकारी से संकेत मिला था कि प्रदर्शनकारी कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा कर सकते हैं.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि CJP के नेताओं या स्वयंसेवकों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई थी, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया, उन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया था.

इस बीच, पुलिस ने आयोजकों की ओर से कम समय पहले सूचना दिए जाने और पहले के एक प्रदर्शन के दौरान निर्देशों का कथित रूप से उल्लंघन किए जाने का हवाला देते हुए जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
पुलिस ने यह भी कहा कि पार्टी ने जंतर-मंतर पर पहले हुए एक प्रदर्शन के दौरान कानूनी निर्देशों और दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया था. इसके अलावा, पुलिस ने लोगों की सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और उस समय की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई.
नई दिल्ली रेंज की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने कहा था, “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (निषेधाज्ञा) नई दिल्ली जिले में लागू की गई है. यह धारा अधिकारियों को संभावित अशांति रोकने के लिए आदेश जारी करने का अधिकार देती है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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