नई दिल्ली: नोएडा के सेक्टर 34 के निवासी 30 वर्षीय प्रदीप कुमार ने अगस्त 2025 में अपने घर पर स्मार्ट मीटर लगवाया था. लेकिन आसान और आरामदायक जीवन मिलने के बजाय यह उपकरण उनके लिए बोझ बन गया और उनके महीने के बिजली बिल बढ़ने लगे.
कुमार की तरह कई लोगों को भी यह विश्वास था कि जब मीटर “स्मार्ट” है और सब कुछ डिजिटल होता जा रहा है, तो इससे बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर कम होंगे और काम अधिक कुशलता से होगा.
हालांकि, अगले ही महीने से उनके बिजली बिल में काफी बढ़ोतरी होने लगी. पहले उनका मासिक बिल लगभग 3,000 से 4,000 रुपये के बीच आता था, लेकिन अचानक यह बढ़कर 7,000 से 8,000 रुपये हो गया. उन्होंने बिजली विभाग में कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
मार्च में उनकी परेशानी और बढ़ गई, जब बिना किसी पूर्व सूचना, संदेश या अपडेट के उनके घर की बिजली स्पलाई अचानक पांच दिनों के लिए काट दी गई. बार-बार दफ्तर जाने और लगभग 10,000 रुपये जमा करने के बावजूद बिजली बहाल नहीं हुई.
प्रदीप कुमार ने कहा, “इन स्मार्ट मीटरों ने हमारी जिंदगी और मुश्किल बना दी है. हम ज्यादा बिल चुका रहे हैं और बिना किसी पूर्व सूचना के हमारी बिजली काट दी जाती है. हमारी शिकायत सुनने वाला भी कोई नहीं है.”
हर दिन नोएडा और गाजियाबाद के निवासी बिजली विभाग के दफ्तरों की ओर दौड़ते हैं, जहां स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों का अंबार लगा हुआ है. कोई भुगतान की प्रक्रिया समझने के लिए पूछ रहा है, कोई संदेश या अलर्ट न मिलने की शिकायत कर रहा है, तो कई लोग बढ़े हुए बिल और अचानक बिजली कटने के खिलाफ विरोध जता रहे हैं.
‘अधिकारियों ने हमें लगातार नजरअंदाज किया’
बिजली विभाग के दफ्तरों में भीड़ लगी रहती है और लोगों की लंबी कतारें अपनी समस्याओं के समाधान के इंतिजार में खड़ी रहती हैं. कई बार आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के अध्यक्ष भी अधिकारियों के साथ सामूहिक बैठक करने दफ्तर पहुंचते हैं.
प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने नोएडा के कई बिजली दफ्तरों के चक्कर लगाए और स्थानीय स्तर के साथ-साथ लखनऊ के अधिकारियों को भी ईमेल भेजे.
प्रदीप कुमार ने कहा, “उन्होंने मुझे इधर-उधर भटकाते रखा, जबकि मेरा घर अंधेरे में डूबा रहा. सिर्फ पांच दिनों में मैंने कितनी बार बिजली दफ्तर के चक्कर लगाए, इसका हिसाब भी भूल गया हूं.”
मामले को और गंभीर बनाते हुए, सेक्टर 34, नोएडा के उदयगिरि-1 आरडब्ल्यूए ने 10 मार्च 2026 को गौतम बुद्ध नगर में उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के कार्यकारी अभियंता को एक औपचारिक शिकायत भेजी. इस पत्र में कई समस्याएं उजागर की गईं—मीटर असुरक्षित बॉक्स में रखे हुए, टूटे हुए प्लास्टिक कवर, खुले लाल तार, जमीन पर गिरते मीटर, और असामान्य रूप से तेज रीडिंग.
नोएडा में हाल ही में लगाए गए कुछ मीटरों की स्थिति ने सुरक्षा और रखरखाव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं.
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ओमेंद्र कुमार द्वारा साइन की गई इस शिकायत में बिजली विभाग से खराब मीटर बॉक्स को ठीक करने या बदलने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
नोएडा के एक अन्य निवासी अनुज कुमार ने कहा, “हम लगातार शिकायत करते रहे, लेकिन अधिकारियों ने हमें नजरअंदाज ही किया. स्मार्ट मीटर की हकीकत यही है.”
बिजली दफ्तरों में लंबी कतारें
अलग-अलग जोन और सेक्टर के बिजली दफ्तरों में स्थिति अव्यवस्थित बनी हुई है. गाजियाबाद जोन-1 में एक व्यक्ति अपना मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए इंतजार कर रहा है. जोन-2 में कोई अधिकारी से एसएमएस अलर्ट न मिलने पर बहस कर रहा है. जोन-3 में कोई व्यक्ति अचानक 8,000 रुपये के बिल की शिकायत कर रहा है.
नोएडा के दफ्तरों में भी यही हाल है. इमारतों के बाहर तक लंबी कतारें लगी हैं और लोग भौतिक दफ्तरों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म—दोनों से जूझते नजर आते हैं.
भारत सरकार ने जुलाई 2021 में बिजली वितरण में परिचालन दक्षता और वित्तीय स्थिरता सुधारने के लिए रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) शुरू की थी. इस योजना के तहत 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 45 वितरण कंपनियों में स्मार्ट मीटर लगाने को मंजूरी दी गई. 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 3.9 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे, जबकि पूरे देश में कुल संख्या 5.28 करोड़ तक पहुंच गई थी.
उत्तर प्रदेश में 84.5 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 75.5 लाख प्रीपेड मीटर के रूप में काम कर रहे हैं. राज्य का लक्ष्य 3 करोड़ मीटर लगाने का है, लेकिन आधे लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही शिकायतें तेजी से बढ़ने लगी हैं. इनमें बढ़े हुए बिल, बिना सूचना के बिजली कटना और अपडेट की कमी जैसी समस्याएं शामिल हैं, जिससे UPPCL की चिंता बढ़ रही है.
जहां विभाग का दावा है कि प्रीपेड मीटर से सटीक बिलिंग और तुरंत बिजली बहाली सुनिश्चित होती है, वहीं कई उपभोक्ता देरी का सामना कर रहे हैं. बिजली कटने के बाद रिचार्ज करने पर भी सप्लाई तुरंत बहाल नहीं होती. कई मामलों में लोगों को 12 घंटे से लेकर सात दिन तक इंतिजार करना पड़ा है.
फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन्स, नोएडा के अध्यक्ष केके जैन ने कहा, “हर दिन सैकड़ों लोग स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याएं लेकर सामने आ रहे हैं और हम इन चिंताओं को अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं.”
स्मार्ट मीटर इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि वे मोबाइल ऐप के जरिए लगभग वास्तविक समय में बिजली खपत की जानकारी देते हैं, जिससे उपभोक्ता उपयोग पर नजर रख सकें, कम बैलेंस की चेतावनी प्राप्त कर सकें, आसानी से रिचार्ज कर सकें और पुराने डेटा देख सकें.
लेकिन कई निवासी बताते हैं कि अलर्ट अक्सर देर से आते हैं या बिल्कुल नहीं आते, और ऐप या वेबसाइट की त्रुटियों के कारण समय पर रिचार्ज नहीं हो पाता.
गाजियाबाद के निवासी अनुज कुमार ने कहा, “जब हम समय पर भुगतान करना भी चाहते हैं, तब भी ऐप और वेबसाइट अक्सर ‘सर्वर डाउन’ दिखाते हैं. कई बार भुगतान हो जाता है, लेकिन घंटों तक बैलेंस अपडेट नहीं होता, जिससे यह भी समझ नहीं आता कि रिचार्ज सफल हुआ या नहीं.”
अंधेरे में जिंदगी
REC लिमिटेड और PFC लिमिटेड के अनुसार, 1,24,590 उपभोक्ताओं में से जिन्होंने ऐप डाउनलोड किया, उनमें से केवल 54,321 को रियल-टाइम खपत की जानकारी वाले फीचर की जानकारी थी, जबकि 72,494 लोग रिचार्ज और बिल भुगतान विकल्पों से परिचित थे—यह कार्यक्षमता और जागरूकता, दोनों में कमी को दर्शाता है.
हालांकि, स्मार्ट मीटर पहल की सराहना करते हुए और उपभोक्ताओं से अपने मीटर में सकारात्मक बैलेंस बनाए रखने की अपील करते हुए, मार्च में UPPCL के चेयरमैन आशीष गोयल ने कहा कि उपभोक्ताओं की सहायता और समय पर जानकारी देने के लिए ऐप और वेबसाइट उपलब्ध हैं.
लेकिन स्थानीय बिजली दफ्तरों में उपभोक्ताओं की लगातार भीड़ एक अलग कहानी बयां करती है. उपभोक्ताओं का कहना है कि वेबसाइट के सर्वर में दिक्कतों के कारण वे आधिकारिक UPPCL मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए अपने बिजली उपयोग की निगरानी और प्रीपेड स्मार्ट मीटर का रिचार्ज नहीं कर पा रहे हैं.
नोएडा के निवासी बंटी चौधरी ने कहा, “वेबसाइट का सर्वर हमेशा डाउन रहता है, ज्यादातर समय कोई अपडेट भी नहीं दिखता.”
नोएडा और गाजियाबाद के कई निवासियों के लिए इसका मतलब यह है कि भुगतान करने के बाद भी कभी-कभी उनके मीटर में नेगेटिव बैलेंस दिखता है.
बंटी चौधरी ने कहा, “यह सिस्टम बिलिंग को आसान बनाने के लिए बनाया गया था, लेकिन ऐप और पोर्टल उपभोक्ताओं के लिए और ज्यादा भ्रम और परेशानी पैदा कर रहे हैं.”
गाजियाबाद के नंदग्राम में रहने वाले 40 वर्षीय नरेंद्र यादव के लिए भी कहानी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने पिछले साल अगस्त में स्मार्ट मीटर लगवाया था.
नरेंद्र यादव ने कहा, “वे लगातार कहते हैं कि रीडिंग सही है, लेकिन यह कोई नहीं बताता कि हर महीने खपत अचानक क्यों बढ़ जाती है.”
यह समस्या सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है. बिहार में स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे बिजली कर्मियों को हिंसक विरोध का सामना करना पड़ा, क्योंकि वहां के निवासी बढ़े हुए बिलों के कारण इन मीटरों का विरोध कर रहे हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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