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Monday, 6 July, 2026
होमThe FinePrintयोग गुरु, यौन शोषण, चुप्पी— ऋषिकेश के सत्व योग अकादमी पर लगे आरोप

योग गुरु, यौन शोषण, चुप्पी— ऋषिकेश के सत्व योग अकादमी पर लगे आरोप

SafeHouse वेबसाइट पर आरोप लगाने वाली चारों महिलाएं विदेशी नागरिक हैं. उनके अनुभव अलग-अलग सालों, देशों और सत्व योग अकादमी के साथ जुड़ाव के लेवल तक फैले हुए हैं. लेकिन वे सभी कुछ ऐसी बातें बताती हैं जो बार-बार सामने आती हैं.

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ऋषिकेश: कई सालों तक सत्व योगा अकादमी ने ऋषिकेश में योग टीचर ट्रेनिंग के प्रमुख संस्थानों में अपनी पहचान दुनिया भर में बनाई हुई है. हर जगह से हजारों छात्र यहां आते थे, क्योंकि अकादमी दावा करती थी कि उसके संस्थापक आनंद मेहरोत्रा के मार्गदर्शन में उन्हें हिमालयी परंपरा पर आधारित प्रामाणिक योग शिक्षा मिलती है. लेकिन अब इस प्रतिष्ठा पर अब तक के सबसे बड़े सवाल उठ रहे हैं.

15 जून को सेफहाउस नाम की एक वेबसाइट ने चार पूर्व छात्राओं के विस्तृत बयान प्रकाशित किए. ये छात्राएं बेल्जियम, नॉर्वे और अमेरिका जैसे देशों की हैं. उन्होंने संस्था के भीतर यौन दुर्व्यवहार और अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं. ये मामले एक दशक में हुए हैं. इनमें बिना सहमति के यौन संपर्क से लेकर कई साल तक चले ऐसे रिश्तों के आरोप शामिल हैं, जिनके बारे में महिलाओं का कहना है कि वे गुरु-शिष्य संबंध में मौजूद असमान शक्ति के कारण बने. वेबसाइट के अनुसार, 2015 के बाद से मेहरोत्रा के खिलाफ यह आरोपों की तीसरी लहर है.

सत्व योगा अकादमी ने पिछले कुछ वर्षों में ऋषिकेश से बाहर भी अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों में अपने चैप्टर और संबद्ध केंद्र शुरू किए. सत्व योगा अकादमी ग्लोबल के नाम से उसने ऑस्ट्रेलिया, इटली, कैलिफोर्निया, हवाई और बुल्गारिया में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए. इनमें से कुछ संस्थान—जैसे सत्व टस्कनी, सत्व यूके (जो अब संघा यूके के नाम से काम कर रहा है) और सत्व कैलिफोर्निया—अब सत्व योगा अकादमी से दूरी बना चुके हैं.

इन बयानों के सामने आने के बाद योग समुदाय में चर्चा शुरू हो गई है. कई संस्थाओं ने, जो पहले सत्व के साथ काम करती थीं, सार्वजनिक रूप से अकादमी और मेहरोत्रा से अपने संबंध खत्म कर दिए हैं. पूर्व छात्र और शिक्षक भी सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. कई साल पुराने मामले फिर से सामने आ रहे हैं. अब सवाल सिर्फ एक शिक्षक के व्यवहार पर नहीं, बल्कि आधुनिक आध्यात्मिक संस्थानों में अधिकार, चुप्पी और जवाबदेही की व्यवस्था पर भी उठ रहे हैं.

इन महिलाओं में से एक ने दिप्रिंट से कहा, “लोग अक्सर बहुत कमजोर और संवेदनशील स्थिति में यहां आते हैं और जिस व्यक्ति पर वे भरोसा करते हैं, उसके सामने खुद को पूरी तरह समर्पित कर देते हैं. शरीर, दिमाग से पहले संकेत समझ लेता है. लेकिन लोगों को यह समझने में अक्सर कई साल लग जाते हैं—और कई बार किसी दूसरी महिला की कहानी सुनने के बाद ही उन्हें एहसास होता है कि यह एक लगातार दोहराया जाने वाला पैटर्न था.”

ऋषिकेश स्थित सत्व योग अकादमी के संस्थापक आनंद मेहरोत्रा ​​| फ़ोटो: फ़ेसबुक

वेबसाइट कैसे सामने आई

15 जून को सेफहाउस वेबसाइट हवाई से शुरू की गई. इससे पहले कई महीनों तक सत्व योगा अकादमी के पूर्व छात्र, शिक्षक और सहयोगी आपस में बातचीत कर रहे थे. वे उन आरोपों को समझने की कोशिश कर रहे थे, जिनकी चर्चा समुदाय के भीतर कई वर्षों से चुपचाप होती रही थी. जो शुरुआत में पूर्व सदस्यों के बीच एक आंतरिक संघर्ष था—जो कहते थे कि उन्हें सत्व से बहुत कुछ सीखने को मिला—वह बाद में एक ऐसी सार्वजनिक वेबसाइट में बदल गया, जिसमें उन महिलाओं की गवाही, घटनाक्रम और संबंधित दस्तावेज़ शामिल किए गए जिन्होंने कहा कि उन्हें इस समुदाय के भीतर नुकसान पहुंचा.

इस प्रयास के केंद्र में हवाई की वकील क्रिस्टीना लिज़ी थीं. वह सत्व की पूर्व छात्रा भी रह चुकी हैं. उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि शुरुआत में उनके लिए इन आरोपों को अपने व्यक्तिगत अनुभव के साथ जोड़कर समझना आसान नहीं था.

उन्होंने कहा, “मैं सत्व के प्रति पूरी तरह समर्पित थी. मुझे वहां की शिक्षा पसंद थी. मुझे वहां की साधनाएं पसंद थीं. उससे मुझे बहुत कुछ मिला.”

SafeHouse वेबसाइट, जिसे सत्त्व योग अकादमी और उसके संस्थापक आनंद मेहरोत्रा ​​से जुड़े यौन दुर्व्यवहार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों को दर्ज करने के लिए बनाया गया था | फ़ोटो: स्क्रीनशॉट

लिज़ी ने बताया कि उन्हें इन आरोपों की जानकारी पहली बार अप्रैल 2026 में हुई, जब सत्व कैलिफोर्निया ने घोषणा की कि वह सत्व योगा अकादमी और सत्व योगा ग्लोबल से अपना संबंध खत्म कर रहा है. लिज़ी के अनुसार, शुरुआत में समुदाय के भीतर इसे सिर्फ एक कारोबारी विवाद बताया गया था. लेकिन उन्होंने कहा कि जब सत्व कैलिफोर्निया ने एक ईमेल में लिखा कि वह “नैतिक उल्लंघनों” के कारण अपना संबंध समाप्त कर रहा है, तो उन्होंने इस मामले की और जांच शुरू की.

लिज़ी ने कहा, “मुझे यह बात ठीक नहीं लगी. फिर मुझे पता चला कि आनंद के साथ एक बैठक होने वाली है. मैंने समुदाय के लोगों से बात करनी शुरू की और तब मुझे एहसास हुआ कि ऐसा पहले भी हो चुका है. यह पहली बार नहीं था.”

वह बैठक जिसने सब कुछ बदल दिया

सत्व कैलिफोर्निया का संचालन बजरंग मोरन और गैब्रियल जेंड्रॉन कर रहे थे. वे कैलिफोर्निया में स्वतंत्र रूप से काम करते थे, लेकिन उनके शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम सत्व योगा अकादमी से जुड़े हुए थे.

कैलिफोर्निया से फोन पर दिप्रिंट से बात करते हुए बजरंग ने बताया कि इस साल अप्रैल में उन्हें और उनकी साथी को एक दोस्त का फोन आया. उस दोस्त ने बताया कि एक महिला सत्व में अपनी भूमिका छोड़ना चाहती है क्योंकि, उनके आरोप के अनुसार, आनंद मेहरोत्रा उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे. जब उन्होंने इस मामले की जांच शुरू की, तो उन्हें यह भी सुनने को मिला कि मेहरोत्रा के अन्य महिला छात्राओं के साथ भी रिश्ते रहे हैं.

बजरंग ने कहा, “मैंने फैसला किया कि भले ही मैं कैलिफोर्निया में हूं, लेकिन आनंद से मिलने के लिए भारत जाऊंगा.”

28 अप्रैल को वह ऋषिकेश पहुंचे और लगभग दो घंटे तक मेहरोत्रा से मुलाकात की. बजरंग के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य उन्हें यह बताना था कि सत्व कैलिफोर्निया, सत्व योगा अकादमी से अपने संबंध खत्म करने जा रहा है, क्योंकि उन्हें उन महिलाओं की बात पर विश्वास था जिन्होंने उनसे संपर्क किया था.

बजरंग का आरोप है कि इस बैठक के दौरान मेहरोत्रा ने दो महिला छात्राओं से जुड़े “अनुचित व्यवहार की कई घटनाओं” का जिक्र किया. बाद में इन आरोपों का उल्लेख उस ईमेल में भी किया गया, जो बजरंग ने मेहरोत्रा को भेजा था. यह ईमेल बाद में सेफहाउस वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया गया.

ईमेल में लिखा था: “मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को सत्व योगा अकादमी स्थित आपके कार्यालय में हुई हमारी बैठक के दौरान आपने निजी बातचीत की कई घटनाओं की जानकारी दी… हमारा मानना है कि गुरु-शिष्य संबंध में मौजूद शक्ति के असंतुलन के कारण ये महिलाएं पीड़ित हुई हैं.”

दिप्रिंट ने बजरंग और मेहरोत्रा के बीच हुए व्हाट्सऐप संदेशों की समीक्षा की, जिनसे पुष्टि होती है कि यह बैठक हुई थी. बजरंग ने बताया कि उसी दिन बाद में मेहरोत्रा ने उन्हें संदेश भेजकर इस बातचीत को गोपनीय रखने के लिए कहा.

बजरंग ने कहा, “उन्होंने मुझसे हमारी बैठक को गोपनीय रखने के लिए कहा. लेकिन मैंने कभी भी किसी बात को छिपाकर रखने की सहमति नहीं दी.”

बजरंग ने बताया कि इसके बाद उन्होंने उन महिलाओं से संपर्क किया जिनका बैठक में जिक्र हुआ था. उनके अनुसार, एक महिला ने बताया कि मेहरोत्रा ने उससे कहा था कि अगर कोई पूछे तो वह उनके रिश्ते की असली प्रकृति छिपाए. वहीं दूसरी महिला ने उस घटना के बारे में मेहरोत्रा के बयान से असहमति जताई, जिसे उन्होंने “हीलिंग सेशन” बताया था.

लिज़ी के अनुसार, यही वह मोड़ था जब एक निजी चिंता धीरे-धीरे सामूहिक कार्रवाई में बदलने लगी.

समय के साथ सामने आया एक पैटर्न

लिज़ी ने बताया कि जैसे-जैसे उन्होंने सत्व के पूर्व छात्रों और शिक्षकों से बात की, उन्हें यह साफ़ होता गया कि आरोप सिर्फ उन चार गवाहियों तक सीमित नहीं हैं, जो बाद में सेफहाउस वेबसाइट पर प्रकाशित हुईं.

उन्होंने कहा, “ये चार बयान उन महिलाओं के हैं जिनसे मैंने खुद बात की है. लेकिन ऐसी और भी कई महिलाएं हैं.”

लिज़ी के अनुसार, वेबसाइट बनाने वालों का कहना है कि मेहरोत्रा से जुड़े आरोपों की यह तीसरी लहर है. पहली बार सार्वजनिक रूप से शिकायतें 2015 में सामने आई थीं. उन्होंने कहा कि पूर्व सदस्यों से बातचीत के दौरान उन्हें 2009 के आसपास की घटनाओं के बारे में भी जानकारी मिली है, हालांकि आयोजक अभी पूरी समयरेखा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं.

बजरंग ने कहा कि जब पहले आरोप सामने आए थे, तब उन्हें उनकी जानकारी नहीं थी. लेकिन उन्हें याद है कि करीब 2020 में उन्होंने एक छात्रा से जुड़े आरोप के बारे में सुना था. आरोप था कि मेहरोत्रा के साथ शराब पीने के बाद जब वह महिला जागी, तो उसे लगा कि उसने यौन संबंध के लिए सहमति नहीं दी थी. बजरंग ने बताया कि जब उन्होंने उस समय यह सवाल उठाया, तो मेहरोत्रा ने शराब पीने से इनकार किया था.

बजरंग ने कहा, “मैंने उनकी बात पर भरोसा किया क्योंकि वे मेरे गुरु थे. इस साल मुझे पता चला कि वे शराब पीते हैं. अब पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे लगता है कि मुझसे झूठ बोला गया था.”

लिज़ी ने बताया कि जैसे-जैसे और महिलाएं सामने आईं, उन्हें सभी मामलों में एक जैसी बात दिखाई दी.

“उन्हें लगता था कि वे खास हैं. उन्हें लगता था कि सिर्फ उनके साथ ही ऐसा हुआ है. लेकिन अक्सर उन्हें यह समझने में कई साल लग गए कि यह एक बार-बार दोहराया जाने वाला पैटर्न था.” 

— क्रिस्टीना लिज़ी, पूर्व सत्व छात्रा

उन्होंने कहा कि कई महिलाओं को यह समझने में वर्षों लग गए कि उनके साथ जो हुआ, वह गुरु-शिष्य संबंध में मौजूद असमान शक्ति से प्रभावित था. कई महिलाओं ने उन्हें बताया कि शुरुआत में उन्होंने मेहरोत्रा के ध्यान को मार्गदर्शन, आध्यात्मिक सहयोग या एक खास रिश्ते के रूप में देखा था. लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि जिसे वे अब ग्रूमिंग और हेरफेर (मैनिपुलेशन) कहती हैं, वह उसी का हिस्सा था.

लिज़ी ने कहा कि सत्व छोड़ना भी कथित दुर्व्यवहार को पहचानने जितना ही मुश्किल था.

उन्होंने कहा, “कई लोगों के लिए सत्व सिर्फ एक योग स्कूल नहीं था. वही उनका काम था, उनके दोस्त थे, उनका घर था और उनका पूरा आध्यात्मिक समुदाय था.”

उनके अनुसार, महिलाओं को डर था कि अगर वे आवाज़ उठाएंगी तो वे सिर्फ अपने गुरु को ही नहीं, बल्कि अपना करियर, अपना सामाजिक दायरा और अपनेपन का एहसास भी खो देंगी.

आनंद मेहरोत्रा ​​के साथ गैब्रियल (बाएं) और बजरंग (दाएं) | फ़ोटो: Instagram/@sattvayogaacademyglobal

सेफहाउस वेबसाइट पर क्या कुछ कहा गया

सेफहाउस वेबसाइट पर चार महिलाओं के बयान प्रकाशित किए गए हैं. इनमें उन्होंने उन अनुभवों का ज़िक्र किया है, जो सत्व संगठन में छात्रा या कर्मचारी रहने के दौरान आनंद मेहरोत्रा के साथ हुए. इन बयानों में सहमति से बने संबंधों और बिना सहमति वाली घटनाओं, दोनों का जिक्र है. वेबसाइट के अनुसार, एक मामला एक अकेली घटना से जुड़ा है, जबकि बाकी तीन मामलों में कई वर्षों तक अलग-अलग समय में चले रिश्तों के बारे में बताया गया है.

लिज़ी, जो इस पूरे प्रयास का समन्वय कर रही हैं और जिन्हें इन महिलाओं ने अपनी ओर से बोलने की अनुमति दी है, ने बताया कि कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा चल रही है.

उन्होंने कहा, “कानूनी रास्ता आसान नहीं है.” उन्होंने बताया कि कथित घटनाएं भारत में हुईं, जबकि कई महिलाएं अलग-अलग देशों की नागरिक हैं. उन्होंने कहा, “हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जवाबदेही कैसी होनी चाहिए.”

उन्होंने बताया कि अब सेफहाउस सिर्फ गवाही प्रकाशित करने वाली वेबसाइट नहीं है. यह पीड़ितों के लिए एक सहयोग मंच भी बन गई है. इसके माध्यम से पीड़ित महिलाओं के सहायता समूह बनाए जा रहे हैं, उन्हें ट्रॉमा की समझ रखने वाले थेरेपिस्ट से जोड़ा जा रहा है, काउंसलिंग और कानूनी खर्चों के लिए धन जुटाने की कोशिश की जा रही है, और रेस्टोरेटिव जस्टिस (सुधारात्मक न्याय) की संभावनाओं पर भी काम हो रहा है.

सेफहाउस वेबसाइट पर प्रकाशित एक महिला के लिखित बयानों में से एक | फ़ोटो: SafeHouse

लिज़ी ने कहा कि जिन महिलाओं ने अपने बयान सार्वजनिक करने का फैसला किया है, उनके लिए जवाबदेही की शुरुआत इस बात से होती है कि उनकी बात को स्वीकार किया जाए.

उन्होंने कहा, “वे सिर्फ इतना चाहती हैं कि लोग उनकी बात सुनें और जो हुआ उसे नज़रअंदाज़ करने के बजाय स्वीकार करें.”

इस बीच, सत्व के पूर्व छात्र इंस्टाग्राम और रेडिट पर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. वहीं, 2020 से जुड़ी पुरानी चर्चाएं भी फिर से सामने आने लगी हैं.

मोहन चट्टी में वापसी

ऋषिकेश से करीब 25 किलोमीटर दूर मोहन चट्टी की घाटी में जून का महीना आमतौर पर काफी व्यस्त रहता है. एडवेंचर पर्यटन, लग्ज़री रिसॉर्ट्स और योग रिट्रीट्स के लिए मशहूर यह इलाका भारत और विदेशों से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है.

लेकिन जून के आखिरी सप्ताह में दिप्रिंट की यात्रा के दौरान सत्व योगा अकादमी असामान्य रूप से शांत दिखाई दी. पहाड़ी सड़क के एक मोड़ पर अकादमी के सफेद पेड़ वाले प्रतीक के साथ लगा नीले रंग का बोर्ड प्रवेश द्वार की ओर इशारा कर रहा था. कुछ दूरी नीचे एक काले लोहे का गेट था, जिसके ऊपर पुराना बोर्ड लगा था, जिस पर “Sattva Retreat” लिखा था. गेट के अंदर घने पेड़ों के कारण परिसर का अधिकांश हिस्सा दिखाई नहीं दे रहा था. सिर्फ इमारतों की छतें पेड़ों के बीच से नज़र आ रही थीं. गेट के पास बने छोटे कमरे में एक सुरक्षा गार्ड बैठा था. ड्राइववे के एक ओर कमरों की कतार थी, जहां कपड़े सूख रहे थे और कुछ गाड़ियां खड़ी थीं. सुरक्षा गार्ड के अलावा वहां कोई और दिखाई नहीं दिया.

आसपास की दुकानों और रेस्तरां के लोगों ने बताया कि अकादमी के बंद होने की कोई जानकारी नहीं है और यहां आमतौर पर ज़्यादातर विदेशी छात्र आते हैं.

मोहन चट्टी में सत्व योग अकादमी परिसर | फोटो: वितस्ता कौल

अकादमी के एक पुराने छात्र, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बात की, ने बताया कि कक्षाएं अभी भी चल रही हैं और ज़्यादातर छात्र अपना प्रशिक्षण पूरा करने के करीब हैं. आरोपों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, “अकादमी के अंदर सब कुछ पारदर्शी था और सोशल मीडिया पर जो तस्वीर दिखाई जा रही है, वह उससे बिल्कुल अलग है.”

वहां मौजूद प्रबंधक रमेश सेमवाल ने कहा कि उन्हें आरोपों पर टिप्पणी करने की अनुमति नहीं है. उन्होंने बताया कि अकादमी सामान्य रूप से चल रही है और हर साल की तरह मानसून के दौरान सड़कें बंद होने के कारण जल्द ही वार्षिक अवकाश के लिए बंद हो जाएगी.

सत्व योगा अकादमी ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों से इनकार किया है. लेकिन इन आरोपों के सामने आने के बाद उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती दिखाई दे रही है. पहले सत्व से जुड़े कई संगठन—जिनमें सत्व कैलिफोर्निया, सत्व सैंक्चुअरी ऑस्ट्रेलिया, यूके सत्व और सत्व टस्कनी शामिल हैं—ने घोषणा की है कि वे अकादमी और आनंद मेहरोत्रा से अपने संबंध समाप्त कर रहे हैं.

दिप्रिंट ने आनंद मेहरोत्रा और सत्व योगा अकादमी से ईमेल, व्हाट्सऐप और फोन के माध्यम से विस्तृत सवाल भेजकर संपर्क किया, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था.

आनंद मेहरोत्रा और सत्व योगा अकादमी की आधिकारिक वेबसाइटों पर “अंडर मेंटेनेंस” का संदेश दिखाई दे रहा है, जबकि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट का कंटेंट अब सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रहा है.

आरोप सार्वजनिक होने के बाद सत्व योग अकादमी की आधिकारिक वेबसाइट पर “अंडर मेंटेनेंस” (मरम्मत का काम चल रहा है) का मैसेज दिखाई दे रहा है | फोटो: स्क्रीनशॉट

ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला पुलिस थाने के अधिकारियों ने पुष्टि की कि इन आरोपों के संबंध में अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है.

भारत में यह पहला मौका नहीं है जब किसी योग संस्थान पर सवाल उठे हों. पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख योग स्कूलों और आध्यात्मिक केंद्रों पर यौन शोषण, यौन उत्पीड़न, दबाव डालने और अन्य तरह के कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं. पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें 2012 में चेन्नई के एक योग केंद्र पर शोषण और दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे; 2017 में केरल के एक योग केंद्र में अवैध रूप से बंधक बनाने और शारीरिक यातना के आरोपों के बाद पुलिस और अदालत की कार्रवाई हुई थी; और 2020 में ऋषिकेश के एक योग केंद्र में जापान की एक महिला की यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद वहां के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था.

कानूनी नोटिस और ऑनलाइन विरोध

सेफहाउस वेबसाइट का आरोप है कि जिन महिलाओं ने सामने आकर अपनी बात रखी, और जिन लोगों ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा की, उन्हें कानूनी कार्रवाई की धमकियां दी गईं. वेबसाइट के अनुसार, जिन महिलाओं ने अपना बयान प्रकाशित किया, उनमें से एक को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी. वेबसाइट यह भी दावा करती है कि भारत के एक योग शिक्षक और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, जिनके 3.2 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, ने जब इंस्टाग्राम पर इन आरोपों से जुड़े वीडियो पोस्ट किए, तो उन्हें सत्व की ओर से कानूनी नोटिस मिले. इसके बाद वे वीडियो हटा दिए गए. वेबसाइट के अनुसार, जब उन्होंने बाद में कानूनी नोटिस और आध्यात्मिक समुदायों में कथित दुर्व्यवहार पर खुलकर बात करने की ज़रूरत का ज़िक्र करते हुए वही वीडियो फिर से पोस्ट किए, तो उन्हें भी हटा दिया गया.

उस इन्फ्लुएंसर ने, जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर दिप्रिंट से बात की, पुष्टि की कि आरोपों पर वीडियो पोस्ट करने के बाद उन्हें कानूनी नोटिस मिले थे. उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बोलने से पीछे हटने का फैसला किया. उनका कहना था कि उनके वीडियो पर मिली प्रतिक्रियाएं सिर्फ सत्व तक सीमित नहीं थीं. कई लोगों ने उनसे संपर्क कर दूसरे आध्यात्मिक समुदायों में भी इसी तरह के अनुभव होने का दावा किया.

सेफहाउस वेबसाइट का यह भी आरोप है कि 19 जून तक जिन छात्रों ने गूगल जैसे प्लेटफॉर्म पर सत्व के बारे में पहले की सकारात्मक समीक्षा को संपादित किया या नकारात्मक समीक्षा दोबारा पोस्ट की, उनकी समीक्षाएं हटा दी गईं. हालांकि, गूगल पर सत्व की रेटिंग अभी भी 4.9 है, जबकि ट्रस्टपायलट पर उसकी रेटिंग 2.6 है.

ये आरोप नए नहीं हैं. @sattvayogaaccountability नाम का एक इंस्टाग्राम अकाउंट दिसंबर 2021 से सत्व के पूर्व छात्रों की समीक्षाएं और अनुभव साझा कर रहा है. इन पोस्टों में सत्व में कथित यौन और मानसिक शोषण के आरोप दोहराए गए हैं. दिप्रिंट ने इस अकाउंट से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

29 जून को सेफहाउस वेबसाइट ने कहा कि सत्व के वकीलों ने एक कानूनी नोटिस भेजकर जानकारी दी है कि वे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत क्रिस्टीना लिज़ी, बजरंग, वेबसाइट पर बयान प्रकाशित करने वाली दो महिलाओं और इंटरनेट होस्टिंग से जुड़ी कई संस्थाओं के खिलाफ रिट याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं. इस याचिका में वेबसाइट, उसके सपोर्ट ग्रुप और उससे जुड़े यूआरएल हटाने की मांग की गई है.

30 जून की एक दूसरी कानूनी नोटिस में उन्हीं पक्षों के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर करने की मंशा जताई गई है. इसमें वेबसाइट हटाने और 3 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है.

लिज़ी ने दिप्रिंट से कहा कि वह वेबसाइट पर प्रकाशित सभी सामग्री के साथ खड़ी हैं. उन्होंने कहा, “कानूनी नोटिस में लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं. वेबसाइट पर साझा की गई बातों की सच्चाई पर मुझे पूरा भरोसा है और अदालत में न्याय ज़रूर मिलेगा.”

महिलाओं ने क्या आरोप लगाए

सामने आई चारों महिलाओं का ताल्लुक भारत से नहीं हैं. उनके अनुभव अलग-अलग वर्षों, अलग-अलग देशों और सत्व योगा अकादमी से जुड़ी अलग-अलग भूमिकाओं से जुड़े हैं. लेकिन उनकी बातों में कुछ समान बातें सामने आती हैं—आध्यात्मिक मार्गदर्शन और निजी संबंधों के बीच की सीमाओं का धुंधला होना, रिश्तों को गुप्त रखना, गुरु-शिष्य के बीच असमान शक्ति का संबंध, और कई वर्षों तक यह समझने की कोशिश कि उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था.

महिलाओं में से एक ने सेफहाउस पर प्रकाशित अपने बयान में लिखा है कि वह 2015 में, 23 साल की उम्र में, योग शिक्षक प्रशिक्षण के लिए भारत आई थीं. ध्यान के दौरान उन्हें डिसोसिएशन (अपने आसपास या खुद से अलगाव महसूस होना) की समस्या हो रही थी, इसलिए उन्होंने मेहरोत्रा से मार्गदर्शन मांगा. उनका आरोप है कि मेहरोत्रा ने उनसे कहा कि वे सूर्यास्त के बाद अकेले उनसे मिलें, “किसी को कुछ न बताएं” और सफेद कपड़े पहनकर आएं.

महिला का कहना है कि जिस मुलाकात को वह एक हीलिंग सेशन समझ रही थीं, उसके दौरान मेहरोत्रा ने मंत्रों का जाप करते हुए उनकी सहमति के बिना उन्हें निजी तौर पर छुआ.

वह लिखती हैं, “मेरा शरीर जैसे सुन्न हो गया था. मैं सदमे में बैठी रही और खुद को पूरी तरह बेबस महसूस करती रही… जबकि मैं असुरक्षित और उलझन में थी.”

उनका कहना है कि जाने से पहले मेहरोत्रा ने उन्हें इस घटना के बारे में कभी किसी से, खासकर समुदाय की एक दूसरी महिला से, बात न करने के लिए कहा.

वह लिखती हैं, “मैं चुप रही. मुझे इस घटना के बारे में अपने भरोसेमंद दोस्तों को बताने में कई साल लग गए.”

उनका कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से सामने आने का फैसला तब किया, जब उन्होंने मेहरोत्रा का यह सार्वजनिक बयान पढ़ा कि महिलाओं के साथ उनके सभी रिश्ते सहमति से बने थे.

वह लिखती हैं, “मैंने उन्हें मुझे छूने की सहमति नहीं दी थी. हमारे बीच जो हुआ, वह मेरी सहमति से नहीं था.”

दूसरी महिला का कहना है कि वह पहली बार 2014 में छात्रा के रूप में सत्व आई थीं. समय के साथ वह संगठन से गहराई से जुड़ गईं और बाद में योग शिक्षिका और कर्मचारी दोनों की भूमिका निभाने लगीं. अपने बयान में उन्होंने कहा कि उनकी पेशेवर पहचान, आय, दोस्ती और आध्यात्मिक जीवन सब कुछ सत्व से जुड़ गया था, जिससे वह आर्थिक और भावनात्मक रूप से समुदाय पर निर्भर हो गईं.

उनका आरोप है कि 2017 से 2026 के बीच वह मेहरोत्रा के साथ ऐसे रिश्ते में खिंचती चली गईं, जिसे अब वह “लगातार दबाव और मजबूरी वाला” रिश्ता बताती हैं. उनके बयान के अनुसार, कारोबारी बैठकों, हीलिंग सेशन और ध्यान सेशन के नाम पर कई बार “अनचाहा यौन संपर्क और अनुचित तरीके से छूने” की घटनाएं हुईं. उनका यह भी आरोप है कि यह सिर्फ आमने-सामने की मुलाकातों तक सीमित नहीं था, बल्कि वर्षों तक फोटो भेजने और वीडियो कॉल की मांग के ज़रिए भी जारी रहा.

“समुदाय के लोगों से कई कहानियां सुनने को मिलीं—ज़रूरी नहीं कि वे यौन दुर्व्यवहार के बारे में हों, बल्कि वे व्यवहार से जुड़ी गलतियों, पद के दुरुपयोग और कुलीन या गुटबाज़ी वाले रवैये के बारे में थीं. उन सभी बातों को पढ़कर मुझे एहसास हुआ कि यह मामला सिर्फ़ मेरे और उन चार महिलाओं तक सीमित नहीं है.”

— आरोप लगाने वाली उन चार महिलाओं में से एक

उनका आरोप है कि जब भी उन्होंने असहजता जताई, मेहरोत्रा ने उनकी चिंताओं को आध्यात्मिक भाषा में समझाने की कोशिश की. उनके अनुसार, मेहरोत्रा ने उनसे कहा, “हमने कुछ गलत नहीं किया”, “कोई अपराध नहीं हो रहा है” और “हम सिर्फ चेतना साझा कर रहे थे.” महिला का कहना है कि इससे उन्होंने मेहरोत्रा के व्यवहार पर सवाल उठाने के बजाय खुद पर ही संदेह करना शुरू कर दिया.

वह लिखती हैं, “उन्होंने मुझे अपनी सहज समझ पर भरोसा करना नहीं सिखाया, बल्कि उसी पर शक करने के लिए मजबूर कर दिया. जब भी मैं असहज, डरी हुई, उलझन में या परेशान महसूस करती थी, तो मुझे लगता था कि शायद मेरी समझ ही कम है, न कि मेरी सीमाओं का उल्लंघन हो रहा है.”

महिला का कहना है कि वह इसलिए चुप रहीं क्योंकि तब तक वह “आर्थिक रूप से निर्भर”, “भावनात्मक रूप से अलग-थलग” और “सत्व समुदाय का गहरा हिस्सा” बन चुकी थीं.

वह लिखती हैं, “जब आध्यात्मिक प्रभाव, भावनात्मक लगाव, आर्थिक ज़रूरत, समुदाय से जुड़ाव, पेशेवर पहचान और व्यक्तिगत कमजोरी—सब एक साथ जुड़ जाते हैं, तब उस रिश्ते से बाहर निकलना सिर्फ वहां से चले जाने जितना आसान नहीं होता.”

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से बोलने में इसलिए देर की क्योंकि उन्होंने देखा था कि जो लोग मेहरोत्रा पर सवाल उठाते थे, उन्हें “हाशिए पर डाल दिया जाता था, उनकी बातों को झूठा बताया जाता था, उन्हें समुदाय से अलग कर दिया जाता था या चुप करा दिया जाता था.”

उनका कहना है कि आरोप सार्वजनिक होने के बाद ही उन्हें एहसास हुआ कि यह रिश्ता उनकी आध्यात्मिक समझ की कमी नहीं, बल्कि “दबाव और कथित दुर्व्यवहार वाले संबंध” का उदाहरण था.

तीसरी महिला ने अपने बयान में कई वर्षों तक चले ऐसे रिश्ते का ज़िक्र किया है, जिसमें उनके अनुसार गोपनीयता, उलझन और खुद पर बढ़ता संदेह शामिल था. उन्होंने लिखा कि 2022 में बीमारी से उबरने के दौरान जब वह दोबारा सत्व लौटीं, तब भी उनके लिए “अपनी सीमाएं तय करना या पूरी तरह अलग हो जाना” आसान नहीं था.

उनका आरोप है कि उसी वर्ष हुई एक मुलाकात के बाद वह खुद को “शारीरिक और भावनात्मक रूप से बेहद थका हुआ” और “पूरी तरह कमजोर” महसूस करने लगीं. इसके बाद उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत बिगड़ने लगी.

उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अनुभव का कुछ हिस्सा अकादमी के एक कर्मचारी को बताया. उनके अनुसार, वह कर्मचारी “कुछ हद तक हैरान” दिखाई दिया और उसने कहा कि उसे लगा था कि मेहरोत्रा ने इस तरह का व्यवहार करना बंद कर दिया है. इसके कुछ समय बाद उन्होंने अकादमी छोड़ने का फैसला किया.

अकादमी छोड़ने से पहले उन्होंने मेहरोत्रा से मुलाकात की और बताया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है. उनका आरोप है कि उनके बीच जो हुआ था, उस पर बात करने के बजाय मेहरोत्रा ने उनकी कुंडली देखी और उनकी हालत का कारण ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति को बताया.

वह लिखती हैं, “उनके इस तरह व्यवहार करने से कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं था, मैं पूरी तरह असहज हो गई.”

घर लौटने के बाद, उनके अनुसार, उन्हें “गंभीर शारीरिक और मानसिक परेशानी” का सामना करना पड़ा. उन्होंने लिखा कि समुदाय के दूसरे लोगों को सामान्य और खुशहाल जीवन जीते देखकर उन्हें अपने ही अनुभव पर संदेह होने लगा.

वह लिखती हैं, “मैं समुदाय के दूसरे लोगों को देखती रही. वे सब सामान्य और खुश दिखाई देते थे. इससे मुझे अपने ही अनुभव पर शक होने लगा.”

उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार चिंता, अनिद्रा और भावनात्मक तनाव होने लगा. उनका कहना है कि जब भी उन्होंने अपनी चिंताओं के बारे में बात करने की कोशिश की, तो उन्हें सीधे मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय सिर्फ साधना और ध्यान पर ध्यान देने की सलाह दी गई. इससे उन्हें अपनी समझ पर और ज़्यादा संदेह होने लगा.

वह लिखती हैं, “मेरे लिए सबसे ज़्यादा मानसिक नुकसान पहुंचाने वाली बातें थीं—हर चीज़ को गुप्त रखना, खुलकर बात न होना और समुदाय के भीतर के रिश्तों का तरीका. इन सबने मेरे अंदर उलझन, डर और खुद पर संदेह पैदा कर दिया.”

उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें अपने अनुभव की पूरी समझ तब आई, जब उन्होंने दूसरी महिलाओं की कहानियां सुनीं. अपने बयान में उन्होंने लिखा कि जब उन्होंने दूसरी महिलाओं के अनुभवों में भी वही पैटर्न देखा और यह जाना कि मेहरोत्रा ने उनके अनुभव को दूसरों के सामने सिर्फ एक “हीलिंग सेशन” बताया था और बाकी चिंताओं को अफवाह कहकर खारिज किया था, तब उन्हें लगा कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक बड़े पैटर्न का हिस्सा था.

‘एक फलता-फूलता समुदाय’

दिप्रिंट ने चौथी महिला से बात की, जो 2019 में 29 साल की उम्र में पहली बार मार्च में 200 घंटे के योग शिक्षक प्रशिक्षण के लिए सत्व आई थीं. इसके बाद वह उसी साल नवंबर में 300 घंटे के प्रशिक्षण के लिए भी लौटीं.

अपने लिखित बयान में उन्होंने कहा है कि वह “यहां की शिक्षाओं और खुद आनंद मेहरोत्रा से बेहद प्रभावित” हो गई थीं. उन्होंने लिखा कि वह “कुछ हद तक उनके प्रति आकर्षित हो गई थीं”, “शिक्षाओं और व्यक्ति के बीच फर्क नहीं कर पा रही थीं” और “उन्हें एक आदर्श व्यक्ति मानकर उनकी पूजा जैसी भावना रखने लगी थीं.”

उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि वेबसाइट सार्वजनिक होने के बाद के कुछ हफ्ते उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन रहे.

उन्होंने कहा, “शुरुआत में मुझे बहुत डर लग रहा था. मैं खुद को बहुत असुरक्षित और सबके सामने खुला हुआ महसूस कर रही थी. यह बहुत निजी और संवेदनशील विषय है और मैंने अपने बयान में बहुत खुलकर सब कुछ लिखा. ऐसा लग रहा था जैसे मैं बहुत बड़ी भीड़ के सामने बिना किसी आड़ के खड़ी हूं.”

उन्होंने बताया कि बाद में समुदाय के बड़े हिस्से से मिले समर्थन के बाद उनका डर धीरे-धीरे कम होने लगा.

उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद से कहीं ज़्यादा सकारात्मक समर्थन मिला. इससे मुझे बहुत हौसला मिला और मैं पहले से ज़्यादा मजबूत महसूस करने लगी. ऐसा लगा जैसे लंबे समय बाद राहत की सांस ली हो.”

लेकिन इसके बाद, जैसे-जैसे और लोग अपने अनुभव साझा करने लगे, उनके भीतर गुस्सा, दुख और पीड़ा की भावना भी बढ़ने लगी.

उन्होंने कहा, “समुदाय के कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. वे सिर्फ कथित यौन दुर्व्यवहार से जुड़े नहीं थे, बल्कि व्यवहार से जुड़ी समस्याओं, अधिकारों के गलत इस्तेमाल और समूहबाज़ी व ऊंच-नीच वाले रवैये के बारे में भी थे. यह सब पढ़कर मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ मेरे और उन चार महिलाओं का मामला नहीं है.”

उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा उन्हें इस बात ने प्रभावित किया कि इतने सारे लोग वर्षों तक अपने अनुभव चुपचाप अपने भीतर दबाकर रखते रहे.

उन्होंने कहा, “बहुत से लोगों के अनुभव नकारात्मक रहे, लेकिन उन्होंने कभी किसी से कुछ नहीं कहा. वे सब कुछ अपने तक ही रखते रहे. यह सोचकर मेरे भीतर ऐसा गुस्सा पैदा हुआ, जिसे मैंने पहले कभी महसूस ही नहीं किया था.”

उन्होंने कहा कि कई महिलाओं के लिए यह समझना ही एक लंबी प्रक्रिया थी कि उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था. अपने लिखित बयान और दिप्रिंट से बातचीत में उन्होंने एक ऐसे माहौल का ज़िक्र किया, जहां शिक्षाओं और शिक्षक के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता था.

उन्होंने कहा कि बाहर से देखने पर सत्व “एक फलता-फूलता समुदाय, एक बहुत बुद्धिमान शिक्षक और बेहतरीन शिक्षकों की टीम वाला संस्थान” लगता था. लेकिन उसके भीतर भरोसे, अधिकार और पूर्ण समर्पण पर आधारित कहीं ज़्यादा जटिल रिश्ते काम कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि वहां से निकलना उतना ही मुश्किल था, जितना यह समझना कि समस्या क्या है.

उन्होंने कहा, “जब आपको लगता है कि आपके साथ खड़ा होने वाला कोई नहीं है, तो यह बहुत डरावना होता है. कई बार आपको कुछ समय तक यह दिखाना पड़ता है कि सब ठीक है, जब तक आपको वहां से निकलने का रास्ता नहीं मिल जाता.”

उन्होंने कहा कि अकेलापन और शर्म की भावना अक्सर लोगों को बोलने से रोक देती है.

उन्होंने कहा, “अक्सर ऐसा होता है कि आप खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं. इसके साथ बहुत शर्म और उलझन भी जुड़ी होती है. और यही चीज़ इस्तेमाल की जाती है.”

अब पीछे मुड़कर देखने पर उन्होंने कहा कि सत्व के अंदरूनी समूह की कई महिलाओं को वह सिर्फ इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि उसकी शिकार के रूप में भी देखती हैं.

उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि वे भी किसी समय पीड़ित रही होंगी. वहां मौजूद लगभग सभी महिलाएं एक जैसी भावनात्मक कमी से जूझ रही थीं—स्वीकृति पाने की चाह, पहचान पाने की चाह और किसी खास व्यक्ति बनने की इच्छा. एक चालाक व्यक्ति इसे पहचान लेता है और फिर उसी का फायदा उठाता है.”

ऋषिकेश के बाहरी इलाके मोहन चट्टी में सत्व योग अकादमी का प्रवेश द्वार | फ़ोटो: वितस्ता कौल

उन्होंने कहा कि इसी वजह से महिलाओं के बीच एक-दूसरे का साथ देने के बजाय प्रतिस्पर्धा का माहौल बन जाता था.

उन्होंने कहा, “हमारे बीच ईर्ष्या होती थी. हम एक-दूसरे के साथ बहनों जैसा व्यवहार नहीं करते थे, जबकि ऊपर से ऐसा दिखाते थे.”

उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद उन्होंने योग नहीं छोड़ा है. वह आज भी योग, ध्यान और दूसरी आध्यात्मिक साधनाएं करती हैं और अपने अनुभवों से उबरने के लिए थेरेपी भी ले रही हैं.

उन्होंने कहा, “विडंबना यह है कि मैं आज भी इस बात के लिए आभारी हूं कि मुझे आनंद के माध्यम से ये साधनाएं सीखने को मिलीं. हालांकि आनंद खुद वैसे व्यक्ति नहीं हैं, जैसे वह खुद को दिखाते हैं.”

उन्होंने बताया कि सार्वजनिक रूप से सामने आने से पहले उन्होंने अपनी चिंताओं पर निजी तौर पर मेहरोत्रा से बात करने की कोशिश की थी.

उनका आरोप है, “उन्होंने सबसे पहले मुझसे संपर्क ही खत्म कर दिया और फिर मुझे दोबारा प्रभावित करने की कोशिश की.”

उन्होंने कहा कि अकादमी की ओर से आरोपों को पूरी तरह खारिज किए जाने के बाद उन्हें लगा कि अब सार्वजनिक रूप से बोलना ज़रूरी हो गया है.

उन्होंने कहा, “मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि वे कहेंगे, ‘हां, यह सब सच है.’ लेकिन कम से कम उन्हें आरोपों को स्वीकार करके यह कहना चाहिए था कि वे उनकी जांच कर रहे हैं.”

उनके लिए जवाबदेही की शुरुआत सज़ा से नहीं, बल्कि स्वीकार करने से होती है.

उनका मानना है कि इसके बिना वास्तविक रूप से आगे बढ़ना संभव नहीं है.

उन्होंने कहा, “जब तक वह इनकार करते रहेंगे, तब तक किसी भी बदलाव की संभावना नहीं है. लेकिन जिस दिन वह इसे स्वीकार करने के लिए तैयार होंगे, उसी दिन से कम से कम सभी लोगों के लिए ठीक होने की संभावना पैदा होगी.”

आरोपों के बाद योग समुदाय में मंथन

इन आरोपों के बाद ऋषिकेश के व्यापक योग समुदाय में भी आत्ममंथन शुरू हो गया है. योगा एसोसिएशन के अनुसार, ऋषिकेश में इस समय 100 से अधिक सक्रिय योग संस्थान हैं. योगा एसोसिएशन ऋषिकेश के अध्यक्ष बिपिन बलोनी ने कहा कि संगठन अभी तथ्यों की जानकारी जुटा रहा है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है.

उन्होंने कहा, “हमें जल्दबाज़ी में कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए. हम अभी और जानकारी जुटा रहे हैं और तथ्यों का इंतज़ार कर रहे हैं.”

बलोनी ने कहा कि एसोसिएशन ने मेहरोत्रा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी उन महिलाओं से भी बात नहीं हुई है जिन्होंने आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी ऑनलाइन प्रकाशित बयानों और स्थानीय योग समुदाय में चल रही चर्चाओं पर आधारित है.

उन्होंने कहा कि इस विवाद को लेकर अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं. एक तरफ महिलाओं के आरोप हैं, जो सेफहाउस वेबसाइट पर प्रकाशित हुए हैं. वहीं दूसरी ओर, उनका कहना है कि कुछ लोगों का मानना है कि यह विवाद सत्व के पूर्व सहयोगियों के बीच कारोबारी मतभेदों से जुड़ा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के आरोप तब भी सामने आए, जब कई योग शिक्षक बाली, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में जाकर काम करने लगे, जिससे योग से जुड़ा कारोबार धीरे-धीरे ऋषिकेश से बाहर जाने लगा.

बलोनी ने कहा कि इन आरोपों ने यह भी दिखाया है कि योग संस्थानों की निगरानी के लिए मज़बूत व्यवस्था की ज़रूरत है, हालांकि उन्होंने माना कि नियमों को लागू कराना आसान नहीं होगा.

उन्होंने कहा, “निश्चित रूप से हमें नियमों की ज़रूरत है. हम इस दिशा में काम कर रहे हैं. लेकिन सभी संस्थानों को एक मंच पर लाना और उनसे सख्ती से नियमों का पालन करवाना बहुत मुश्किल है. अगर राज्य सरकार और हमारी एसोसिएशन मिलकर काम करें, तो यह संभव हो सकता है.”

बलोनी ने कहा कि योगा एसोसिएशन कोई वैधानिक नियामक संस्था नहीं है और उसके पास ऋषिकेश के आसपास के तीन ज़िलों में चल रहे सैकड़ों निजी योग संस्थानों पर नियम लागू कराने का अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अकादमी ने अपना संचालन फिलहाल रोक दिया है.

सेफहाउस वेबसाइट का यह भी कहना है कि दुनिया की प्रमुख योग मान्यता देने वाली संस्थाओं में से एक योगा एलायंस को भी इन आरोपों की जानकारी दे दी गई है. वेबसाइट के अनुसार, संस्था सत्व योगा अकादमी और उन प्रमुख शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जांच कर रही है, जिन पर “लगातार कथित दुर्व्यवहार को बढ़ावा देने” का आरोप है. इसमें योगा एलायंस की मान्यता को निलंबित करने या रद्द करने की संभावना भी शामिल है.

योगा एलायंस ने भी दिप्रिंट से पुष्टि की कि उसने इस मामले की जांच शुरू कर दी है. हालांकि संस्था ने किसी विशेष शिकायत या जांच के विवरण पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन उसने कहा कि “जांच शुरू कर दी गई है और जांच पूरी होने तक संबंधित स्कूल और उससे जुड़े शिक्षकों की मान्यता को अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया गया है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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