दंतेवाड़ा/बस्तर: दीपा मरकाम का बचपन पोटाली गांव में बीता. यह एक दूर-दराज का गांव है, जो कई सालों तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा. यहां का स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय तक बंद रहे, लेकिन अब दोनों फिर से खुल गए हैं. इसी बीच दीपा ने इस साल नीट की परीक्षा पास कर ली है और अब उनका सपना सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेना है.
अपने कच्चे घर के बाहर खड़ी 21-वर्षीय दीपा ने कहा, “यह मेरे लिए आसान नहीं था. मेरा गांव नक्सल प्रभावित था. यहां इलाज की कोई सुविधा नहीं थी. लोगों को डॉक्टर दिखाने के लिए जिला अस्पताल तक पहुंचने में घंटों लग जाते थे.”
दीपा ने ‘छू लो आसमान’ नाम की मुफ्त आवासीय कोचिंग योजना में दो साल पढ़ाई की. यह कोचिंग दंतेवाड़ा जिला प्रशासन नीट और जेईई की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए चलाता है. पोटाली से 55 किलोमीटर दूर इस कैंपस में रहकर वह दोपहर तक क्लास करती थीं और फिर देर शाम तक खुद पढ़ाई करती थीं.
उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 412 अंक हासिल किए. घने जंगलों के बीच बसे पोटाली गांव में एक साल पहले तक बहुत कम लोग जाने की हिम्मत करते थे. दीपा की सफलता ऐसे समय आई है, जब गांव की तस्वीर बदलनी शुरू हुई है.
दीपा सिर्फ एक साल की थीं, जब 2005 में गांव में एक स्वास्थ्य केंद्र खोला गया था, लेकिन माओवादी हिंसा बढ़ने के कारण वह करीब 20 साल तक बंद रहा. आखिरकार 1 जनवरी 2025 को इसे फिर से खोला गया. अब यह तीन गांवों के करीब 2,500 लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है. इसी महीने गांव का बंद पड़ा प्राथमिक स्कूल भी दोबारा शुरू हुआ.

यह बदलाव लगातार चले सुरक्षा अभियान के बाद संभव हुआ. इस अभियान में माओवादियों के ठिकानों को खत्म किया गया और इलाके में सामान्य हालात लौटने लगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने की समय सीमा तय की थी. सरकार ने घोषणा की है कि उसने यह लक्ष्य हासिल कर लिया है.
दीपा ने कहा, “अब मेरे गांव में हालात बदल रहे हैं. हमें उम्मीद है कि सरकार हमें भी सभी ज़रूरी सुविधाएं देगी.”
दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने भी एक्स पर एक पोस्ट में पोटाली गांव में आए बदलाव का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार को दिया. 2024 से राज्य सरकार ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत पोटाली जैसे गांवों में सड़कें, स्वास्थ्य केंद्र और दूसरी बुनियादी सुविधाएं बहाल कर रही है.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिप्रिंट से कहा, “बस्तर के कई इलाके विकास से बहुत दूर थे. नक्सली सड़क, स्कूल और अस्पताल बनने नहीं देते थे. लेकिन अब कभी मजबूत रहा नक्सली आंदोलन खत्म हो चुका है. सबसे दूर-दराज के इलाके भी अब सुरक्षित हैं और इससे युवाओं के आगे बढ़ने के नए रास्ते खुले हैं.”
NEET ‘चमत्कार’
दीपा जब बच्ची थी, तब उनकी मां गुज़र गईं. उनके पिता पास के सुकमा में काम करते हैं, इसलिए उन्हें उनके दादा-दादी ने पाला-पोसा.
उनके चाचा दिलीप मरकाम ने कहा, “बचपन से ही उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. गांव में पढ़ाई का कोई माहौल नहीं था. नीट पास करना किसी चमत्कार से कम नहीं है.”
पढ़ाई में होशियार मरकाम ने दंतेवाड़ा में आदिवासी स्टूडेंट्स के सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए 55 किमी का सफर किया. डॉक्टर बनने का पक्का इरादा करके, बाद में उन्होंने ‘छू लो आसमान’ में एडमिशन ले लिया, जो नीट और जेईई कैंडिडेट्स के लिए डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन का फ्री रेजिडेंशियल कोचिंग प्रोग्राम है.

2011 में उस समय के दंतेवाड़ा जिला कलेक्टर और अब छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी. यह कार्यक्रम नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NMDC) के सहयोग से करली और बालूद स्थित कैंपस से चलाया जाता है. इस साल इस कार्यक्रम के तहत 158 छात्रों ने नीट की परीक्षा दी. इनमें से 21 छात्रों ने 300 से ज्यादा अंक हासिल किए, जिसे अब तक का सबसे बेहतर परिणाम बताया जा रहा है. कार्यक्रम के 6 पूर्व छात्र अब दंतेवाड़ा में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे हैं.
मरकाम के चाचा ने कहा, “हम बहुत खुश हैं कि हमारे घर की एक बच्ची डॉक्टर बनने की राह पर है.”
अब, डॉक्टर बनने की चाहत रखने वाली मरकाम काउंसलिंग प्रोसेस शुरू होने का इंतज़ार कर रही हैं.
उन्होंने कहा, “मेरी रैंक बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन मुझे सरकारी कॉलेज मिलने की उम्मीद है. मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं और अपने लोगों की सेवा करना चाहती हूं, जो दशकों से बिना मेडिकल सुविधाओं के रह रहे हैं.”


परिवार की ज़िंदगी दूसरे तरीकों से भी बदल गई है. उन्हें हाल ही में पीएम आवास योजना के तहत मदद मिली है और उन्होंने अपना पहला पक्का घर बनाना शुरू कर दिया है. दिलीप मरकाम ने एक बन रहे स्ट्रक्चर की ओर इशारा करते हुए कहा, “सरकार ने हमें पक्का घर बनाने के लिए पैसे दिए.”
हालांकि, दीपा ने कहा कि देश भर में पेपर लीक होने से उम्मीदवारों के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है.
उन्होंने कहा, “सरकार को यह पक्का करना चाहिए कि एग्जाम के पेपर लीक न हों और दोषियों को सज़ा मिले.”
युवाओं को आगे बढ़ाना
25 जुलाई को, बस्तर के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और पुलिस सुपरिटेंडेंट ने जगदलपुर के ज्ञान गुड़ी में एसएससी, व्यापम और रेलवे एग्जाम के लिए फ्री कोचिंग में एनरोल स्टूडेंट्स के एक बैच को एड्रेस किया.
बस्तर के एसपी शलभ सिन्हा ने कहा, “कभी मत सोचो कि तुम बहुत छोटी जगह से आए हो. हमेशा बड़ा सोचो—तुम सब में पोटेंशियल है.”

ज्ञान गुड़ी, एक फ्री रेजिडेंशियल कोचिंग सेंटर, 2024 में बस्तर डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा ओपन किया गया था. इसमें राज्य द्वारा अपॉइंट किए गए चार टीचर हैं और डीएम इसकी मॉनिटरिंग करते हैं. इस साल, इसके 50 स्टूडेंट्स ने नीट का एग्जाम पास किया.
बस्तर डीएम आकाश छिकारा ने दिप्रिंट को बताया, “ये स्टूडेंट्स नक्सल प्रभावित इलाकों से आते हैं. नीट जैसे एग्जाम क्रैक करना बहुत बड़ी अचीवमेंट है.”

इस साल के आठ सफल कैंडिडेट्स के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट पक्की करने की उम्मीद है. 2024-25 में, ज्ञान गुड़ी में 120 स्टूडेंट्स ने नीट की कोचिंग ली, जिनमें से 67 क्वालिफाई हुए.
जगदलपुर के ज्ञान गुड़ी के इंचार्ज अलेक्जेंडर चेरियन ने कहा, “यह सेंटर नक्सल प्रभावित इलाकों में बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के मकसद से बनाया गया था. इन बच्चों को बेहतर भविष्य देना हमारी प्राथमिकता है.”
नक्सलवाद से आगे, जिला प्रशासन अब एक और मुश्किल काम का सामना कर रहा है: अपने युवाओं का भरोसा जीतना.
सिन्हा ने कहा, “युवाओं को सही दिशा में गाइड करना एक चुनौती है. युवाओं में सरकार के खिलाफ भावनाएं जल्दी उभरती हैं. उनकी उम्मीदों को पूरा करना सुरक्षा और प्रशासन दोनों के नजरिए से एक बड़ी चुनौती है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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