नई दिल्ली: पानी में खिले कुमुदिनी के फूलों से भरी एक झील के बीच नाव पर बैठे अनिंदिता और अभिजीत एक-दूसरे के कंधे से लगकर रोमांटिक अंदाज में पोज दे रहे हैं. वे कश्मीर में फिल्माए गए शर्मिला टैगोर और शम्मी कपूर के मशहूर गाने ‘दीवाना हुआ बादल’ वाले सीन को रिक्रिएट कर रहे थे. अनिंदिता ने चमकदार गुलाबी शिफॉन साड़ी पहनी हुई है और अभिजीत ने कुर्ता पहना है. अभिजीत उनके बालों में फूल लगाते हैं, जबकि अनिंदिता शर्माते हुए कुमुदिनी के फूलों से खेलती हैं.
यह किसी हनीमून की तस्वीर जैसी लगती है. लेकिन ऐसा नहीं है. और यह कश्मीर भी नहीं है.
यह कोलकाता से करीब 30 किलोमीटर दूर एक झील है, जो प्री-वेडिंग शूट के लिए फोटोग्राफर्स और कपल्स के बीच काफी लोकप्रिय हो गई है.
2024 में अभिजीत धनुक से शादी करने वाली और कोलकाता में रहने वाली कॉर्पोरेट कर्मचारी अनिंदिता भंडारी ने कहा, “हमें बहुत सुंदर तस्वीरें मिलीं. हमने साथ में अच्छा समय बिताया. ये तस्वीरें शादी के लगभग हर कार्यक्रम का हिस्सा बनीं. इन्हें शादी के कार्ड, मेहंदी और हल्दी की सजावट, यहां तक कि रिसेप्शन के एंट्रेंस पर भी इस्तेमाल किया गया.”

भारत में पहले से ही भव्य होने वाली शादियों में अब प्री-वेडिंग शूट लगभग एक जरूरी रस्म बन गया है. इसमें विशेषज्ञ फोटोग्राफर, टूर ऑपरेटर और वेडिंग प्लानर शामिल होते हैं. प्री-वेडिंग शूट अब अपने आप में एक बड़ा उद्योग बन चुका है.
फोटोग्राफर्स का कहना है कि कपल्स प्री-वेडिंग शूट के जरिए अपनी बॉलीवुड वाली फैंटेसी जीना चाहते हैं या खुद को फिल्म के मुख्य किरदार जैसा महसूस करना चाहते हैं. धर्म, जाति, वर्ग और जेंडर की परवाह किए बिना, कपल्स अपनी व्यस्त शादी की तैयारियों के बीच भी इसके लिए समय निकाल रहे हैं.
हाल ही में केतन अग्रवाल और सिया गोयल का मामला सामने आने के बाद भारत में प्री-वेडिंग शूट फिर चर्चा में आ गया. दोनों की सगाई का वीडियो, जिसमें केतन सिया को घुमाते हुए नजर आ रहे हैं, इंटरनेट पर वायरल हो गया था. उन्होंने भी बाली में प्री-वेडिंग शूट की योजना बनाई थी. लेकिन वह कभी हो नहीं पाया.
पश्चिमी देशों से शुरू हुआ यह चलन भारत में एक सपने जैसा माना जाता है. यह कपल्स के लिए अपनी बॉलीवुड जैसी रोमांटिक इच्छाओं को जीने का जरिया बन गया है. इन शूट्स की योजना बनाने और उन्हें पूरा करने के लिए कई दिन रखे जाते हैं. इनके लिए खास कपड़े डिजाइन किए जाते हैं. हर नई लोकेशन के लिए कपड़े बदलना लगभग जरूरी होता है. इन तस्वीरों का इस्तेमाल शादी के कार्ड, शादी की सजावट और सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर किया जाता है.
लेखक संतोष देसाई ने अपनी किताब ‘मीम्स फॉर मम्मीजी’ में लिखा है, “इस तरह के समारोह सिर्फ निजी खुशी के लिए नहीं होते, बल्कि लोगों को दिखाने के लिए भी होते हैं.”
लेकिन सबसे अहम बात यह है कि यही वे यादें हैं, जिन्हें शादीशुदा जोड़े जिंदगी भर संजोकर रखना चाहते हैं. यह चलन पहले शहरों में शुरू हुआ था, लेकिन अब गांवों, टियर-1 और टियर-2 शहरों तक पहुंच चुका है. एक प्री-वेडिंग शूट का खर्च 10,000 रुपये से लेकर कई लाख रुपये तक हो सकता है. यह जगह, शूट के स्तर और फोटोग्राफर की पहचान पर निर्भर करता है. फिर भी कपल्स इसके लिए पैसे खर्च करने को तैयार रहते हैं.
20 साल से ज्यादा समय से शादियां आयोजित कर रहीं ‘मैरीगोल्ड बाय मिनल’ की संस्थापक और वेडिंग प्लानर मिनल भटनागर ने कहा, “शुरुआत में यह सिर्फ सुविधा के लिए किया जाता था. लेकिन बाद में यह एक रचनात्मक आयोजन बन गया. कपल्स खूबसूरत जगहें चुनने लगे. कुछ लोग ऐसी जगह चाहते थे, जिनसे उनका भावनात्मक जुड़ाव हो. अब परिवार पहले लोकेशन बुक करते हैं और उसके बाद फोटोग्राफर, क्योंकि अच्छी लोकेशन जल्दी बुक हो जाती हैं.”
जापान से लेकर ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला, पश्चिमी घाट के झरने, दिल्ली का कुतुब मीनार और लोधी गार्डन तक. कपल्स मशहूर और अलग-अलग तरह की जगहों पर तस्वीरें खिंचवाना चाहते हैं. कुछ लोगों ने राजस्थान के अजमेर में किशनगढ़ के मार्बल स्लरी डंपिंग यार्ड को भी चुना है, क्योंकि वहां का नजारा बिल्कुल अलग और अनोखा दिखता है.
पर्सनल टच का बढ़ता चलन
भारत में ज्यादातर प्री-वेडिंग शूट भव्यता के लिए जाने जाते हैं. खूबसूरत लोकेशन, डिजाइनर कपड़े, महंगे प्रॉप्स और फिल्मी अंदाज में तैयार किए गए सीन इसका हिस्सा होते हैं. कपल्स हाथ पकड़कर चलते हैं, समुद्र किनारे या पहाड़ों पर स्लो मोशन में दौड़ते हैं और खुद को शाहरुख खान और काजोल जैसी बॉलीवुड प्रेम कहानी का हिस्सा मानते हैं.
लेकिन अब यह ट्रेंड बदल रहा है. अब लोग अपने प्री-वेडिंग शूट में अपनी निजी कहानी भी जोड़ना चाहते हैं.
अनिंदिता और अभिजीत भी अपनी प्री-वेडिंग तस्वीरों में कुछ खास और निजी यादें जोड़ना चाहते थे. दो दिन चले इस शूट में उन्होंने कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल, सोदेपुर की कुमुदिनी के फूलों से भरी बोरोटी बिल झील और उस स्कूल में तस्वीरें खिंचवाईं, जहां उनकी पहली मुलाकात हुई थी.

अनिंदिता भंडारी ने कहा, “वह स्कूल हमारी जिंदगी का बहुत खास हिस्सा है. वहीं हमारी मुलाकात हुई थी. हम चाहते थे कि स्कूल के बाहर भी कुछ तस्वीरें खिंचवाएं, ताकि वह याद हमेशा हमारे साथ रहे.”
प्रिंसेप घाट के पास स्थित केंद्रीय विद्यालय के बाहर अनिंदिता और अभिजीत ने एक जैसे रंगों के कपड़े पहनकर अपनी प्रेम कहानी को तस्वीरों में कैद किया.
हर लोकेशन के लिए उन्होंने अलग-अलग कपड़े, मेकअप, गहने और जूते चुने. विक्टोरिया मेमोरियल की ऐतिहासिक ब्रिटिश इमारत के सामने शाही लुक देने के लिए अनिंदिता ने लाल लहंगा पहना, जबकि अभिजीत ने आइवरी रंग का कुर्ता पहना. दोनों ने हाथों में हाथ डालकर तस्वीरें खिंचवाईं.
अनिंदिता ने अपना मेकअप खुद किया. हर बार कपड़े बदलने से पहले तैयार हुईं और एक जगह से दूसरी जगह जाने के बीच भी मेकअप ठीक करती रहीं, जबकि फोटोग्राफर अगला सीन तैयार कर रहा था.
पहले दिन चार घंटे में पूरा होने वाला शूट 12 घंटे तक चला. इसमें बार-बार एक ही पोज देना और कई बार दोबारा तस्वीरें खिंचवानी पड़ीं. लेकिन दूसरे दिन सब कुछ अलग था. उसी स्कूल के गलियारों में, जहां उन्हें पहली बार प्यार हुआ था, वहां उन्हें अभिनय करने की जरूरत नहीं थी. उन्हें सिर्फ खुद जैसा रहना था.
आपकी कहानी बताने वाला प्री-वेडिंग शूट
इस पूरे ट्रेंड में सबसे नया बदलाव यह है कि अब भारतीय कपल्स अपने प्री-वेडिंग शूट में अपनी कहानी यानी अपनी निजी यात्रा दिखाना चाहते हैं. यहां तक कि फोटोग्राफर भी अब पूरी थीम की कहानी पहले से तैयार करने पर जोर दे रहे हैं.
मिनल भटनागर ने कहा, “अगर आप प्री-वेडिंग शूट करवा रहे हैं, तो उसमें कोई मतलब और भावनाएं जोड़िए. जगह आपकी यादों का हिस्सा बननी चाहिए. क्या आप वहां मिले थे? क्या आप वहां बड़े हुए थे? क्या वहीं आपकी सगाई हुई थी? एक अच्छा और यादगार प्री-वेडिंग शूट वही है जो कपल का अपना हो, सिर्फ सोशल मीडिया के लिए न हो.”
अब कपल्स अपने घर से दूर की जगहों को ज्यादा चुन रहे हैं, ताकि वे एक-दूसरे के साथ समय बिता सकें और यादगार पल बना सकें. वे अब ऐसी बॉलीवुड रोमांस वाली नकल नहीं करना चाहते, जो नकली लगे और अजीब लगे.
शालिनी अय्यर, जो ‘सीजन्स बाय शालिनी’ की संस्थापक हैं. यह ब्रांड कैंडिड और सिनेमैटिक वेडिंग और प्री-वेडिंग फोटोग्राफी में विशेषज्ञ है. उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि प्री-वेडिंग शूट को लेकर उनका तरीका पूरी तरह बदल गया है.
अब इसमें “कम निर्देशन” और “पोज से ज्यादा असली पल” पर ध्यान दिया जाता है. अय्यर के अनुसार, पिछले पांच सालों में मुंबई के कपल्स अलीबाग या आसपास की जगहों पर खूबसूरत फोटो वाली प्रॉपर्टी बुक करने के लिए करीब 40-50 हजार रुपये खर्च करते थे.
अय्यर ने कहा, “प्री-वेडिंग शूट का कॉन्सेप्ट इसलिए खराब हुआ क्योंकि बहुत से फोटोग्राफर असली पल कैप्चर करने के बजाय सिर्फ पोज की नकल करने लगे. उन्होंने कपल की अपनी कहानी दिखाने के बजाय किसी और के आइडिया को दोहराना शुरू कर दिया.”
हालांकि, उन्होंने बताया कि बड़े शहरों और अमीर परिवारों के कपल्स अब फोटो शूट के बदलते अंदाज को अपना रहे हैं, लेकिन ग्रामीण भारत और छोटे शहर अभी भी इस बदलाव को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “ग्रामीण इलाकों, टियर-2 और टियर-3 शहरों में लोग अभी भी भारी कपड़े और भव्यता वाली तस्वीरें चाहते हैं.”
मेरठ के वेडिंग फोटोग्राफर अतुल सोम भी शहर के ग्रामीण और शहरी ग्राहकों की मांग में अंतर को मानते हैं. उन्होंने कहा, “मेरठ शहर का ग्राहक कहानी पर आधारित प्री-वेडिंग शूट चाहता है, जबकि ग्रामीण ग्राहक आमतौर पर पारंपरिक तस्वीरें पसंद करते हैं.”
जब मुजफ्फरनगर, सहारनपुर या शामली जैसे मेरठ के पास के इलाकों से कोई ग्राहक सोम के पास आता है, तो वह “ज्यादा रोमांटिक नहीं वाली तस्वीरों” की मांग करता है. हालांकि ऋषिकेश और मसूरी दोनों तरह के ग्राहकों के लिए लोकप्रिय जगहें हैं, लेकिन वीडियो शूट का तरीका अलग होता है.
उदाहरण के लिए, मेरठ के पॉश सिविल लाइंस इलाके का कपल ऋषिकेश के मशहूर लक्ष्मण झूला पर हाथ पकड़कर चलते हुए शूट करवाएगा. वहीं शहर के बाहरी इलाके का कपल एक-दूसरे को दूर से देखते हुए फोटो खिंचवाएगा, जैसे पुराने बॉलीवुड रोमांस वाले सीन और गानों में होता था.
सोम ने कहा, “ग्रामीण कपल्स के लिए माथे पर किस करना या हाथ पकड़ना जैसी चीजें नहीं होतीं.” उन्होंने आगे कहा, “हमें ऐसी मांगें मिलती हैं जैसे, ‘भैया, ज्यादा क्लोज-अप रोमांटिक शॉट मत लेना, हमारे परिवार वाले इसे पसंद नहीं करेंगे.'”
जयपुर के वेडिंग फोटोग्राफर भुवन गौर ने कहा कि आसपास के छोटे शहरों से आने वाले कपल्स, जो या तो रूढ़िवादी परिवारों से आते हैं या महंगे डेस्टिनेशन शूट का खर्च नहीं उठा सकते, अब ऐसे स्टूडियो चुन रहे हैं जहां पेरिस, लंदन और बर्फ से ढके पहाड़ों जैसे छोटे मॉडल बनाए गए हैं.
ये स्टूडियो बिना यात्रा के खर्च के कपल्स को डेस्टिनेशन शूट जैसा बैकग्राउंड देते हैं. कपल्स की मांग साफ होती है. उन्हें ऐसी प्री-वेडिंग तस्वीरें चाहिए जिन्हें शादी के कार्ड में इस्तेमाल किया जा सके या शादी के हॉल के बाहर फ्रेम करके लगाया जा सके.
गौर ने कहा, “स्टूडियो शूट सस्ते होते हैं और कुछ घंटों में पूरे हो जाते हैं. इसमें फोटोग्राफर को भी ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती.”
भारत में प्री-वेडिंग शूट का कॉन्सेप्ट तब शुरू हुआ जब प्लानर्स ने देखा कि शादी के दिन कपल की कैंडिड तस्वीरों के लिए ज्यादा समय नहीं बचता था.
भटनागर को याद है कि उन्होंने पहली बार 2014 में जयपुर में शादी करने वाले दुबई के एक कपल के लिए प्री-वेडिंग शूट कराया था. दुल्हन एक लाइफस्टाइल फोटोग्राफर थी और उसने शादी से एक दिन पहले स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट की टीम बुलाई थी. इस शूट ने कपल को खुद को खास तरीके से दिखाने का समय दिया.
उन्होंने कहा, “उस समय हमें लगा था कि हमने कुछ ऐसा किया है जो पहले किसी ने नहीं किया. आज यह सामान्य बात बन चुकी है.”
इसके बाद से तस्वीरों के रंग, आकार और अंदाज बदल गए हैं. चमकीले लाल रंगों की जगह अब पेस्टल रंगों ने ले ली है. छोटे वीडियो, इंस्टाग्राम रील्स और तस्वीरें ज्यादा चलन में हैं. लोग अब लंबे और ज्यादा विस्तृत वीडियो नहीं चाहते.
बड़े स्तर के प्री-वेडिंग शूट Vs जुगाड़
बढ़ते विकल्पों का असर वेडिंग फोटोग्राफरों पर भी पड़ा है. कपल्स उन्हें चुनेंगे या नहीं, यह उनकी सोशल मीडिया पहुंच, उनके काम और इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों पर निर्भर करता है.
वेडिंग फोटोग्राफर गौतम खुल्लर का काम भारत में बदलते प्री-वेडिंग शूट के दौर को दिखाता है. उनके एक वेडिंग शूट को वोग मैगजीन के नए संस्करण में जगह मिली थी.
खुल्लर ने 10 साल में 600 से ज्यादा शादियों की फोटोग्राफी की है. इंस्टाग्राम पर उनके 50,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. उनके ज्यादातर ग्राहक अमीर परिवारों से आते हैं और उनकी एक ही मांग होती है. “यह सामान्य नहीं होना चाहिए.”
हुनर और प्रभनूर बावा की शादी के शूट के लिए खुल्लर ने अमेरिकी फिल्ममेकर वेस एंडरसन से प्रेरित एक सीन बनाया. वेस एंडरसन अपने बिल्कुल संतुलित फ्रेम, पेस्टल रंगों और सटीक कैमरा मूवमेंट के लिए जाने जाते हैं. कपल इस आइडिया से बहुत खुश हुआ.
यह जापान में पांच दिन तक चला शूट था, जिसमें खुल्लर ने टोक्यो में माउंट फूजी के बैकग्राउंड के साथ कपल की तस्वीरें खींचीं. दिल्ली की फैशन कंसल्टेंट और इंफ्लुएंसर हुनर बावा ने अपने कपड़े खुद चुने.

हुनर ने कहा, “कपड़ों को जगह और उस माहौल के हिसाब से चुना गया था, जिसे हम बनाना चाहते थे. हम किसी नियम को फॉलो करने की कोशिश नहीं कर रहे थे. हम चाहते थे कि हर तस्वीर की अपनी अलग पहचान हो.”
कपल ने अपने प्री-वेडिंग शूट पर काफी खर्च किया. हुनर ने कहा, “शादी से पहले का समय दोबारा वापस नहीं आता. इसे प्रोफेशनल तरीके से कैद किया जाना चाहिए. मैं इन यादों को हमेशा अपने पास रखना चाहती थी.”
वहीं दूसरी तरफ भारतीय शादियां जितनी भव्यता के लिए जानी जाती हैं, उतनी ही जुगाड़ के लिए भी. इसलिए प्री-वेडिंग शूट इससे अलग कैसे हो सकता है. कई बार जगह समस्या बन जाती है और कई बार बजट.
अनिंदिता और अभिजीत ने अपने प्री-वेडिंग शूट के लिए 5,000 रुपये अलग रखे थे. उनके फोटोग्राफर दोस्त ने खुद शूट करने की पेशकश की, जिससे यह कम बजट वाला प्रोजेक्ट संभव हो पाया.
वहीं हुनर और प्रभनूर ने शादी की फोटोग्राफी के लिए खुल्लर का महंगा पैकेज चुना. खुल्लर एक दिन के शूट के लिए औसतन 5 लाख रुपये लेते हैं. अय्यर, सोम और गौर के मामले में पैकेज करीब 2.5 से 3 लाख रुपये प्रति दिन तक हो सकता है.
भटनागर ने कहा, “हमारे पास आने वाली कई दुल्हनों का फोटोग्राफी टीम के लिए बजट वेडिंग प्लानर से ज्यादा होता है.”
अय्यर, जिन्होंने नागपुर के पास एक शादी की शूटिंग की थी, ने कहा कि महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अमीर परिवार मुंबई के फोटोग्राफर बुलाते हैं. उन्होंने कहा, “यह एक क्लास स्टेटमेंट है.”
प्री-वेडिंग फोटोग्राफी के बजट में शूट की जगह भी बड़ा हिस्सा जोड़ती है. अमीर लोग दुबई, बाली और थाईलैंड जैसी जगहों को पसंद कर रहे हैं, जबकि मिडिल क्लास कपल्स लद्दाख या कश्मीर को चुनते हैं.
और जो लोग इनमें से किसी जगह का खर्च नहीं उठा सकते, उनके लिए हेरिटेज साइट मददगार बनती हैं. लोधी गार्डन, हुमायूं का मकबरा, पुराना किला, महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क और इंडिया गेट के कोने-कोने में कपल्स नजर आते हैं. अक्सर वे पारंपरिक भारतीय कपड़े पहने होते हैं और ऐतिहासिक तस्वीर लेने की उम्मीद रखते हैं.
संरक्षित स्मारकों पर वीडियो शूट करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से खास अनुमति लेनी पड़ती है, जिसकी फीस 10,000 से 15,000 रुपये होती है. इसके अलावा शूट के लिए मनचाही तारीख मिलना भी एक समस्या है. लेकिन कई कपल्स इन नियमों से बचने की कोशिश करते हैं. वे कपड़े बैग में छिपाकर ले जाते हैं या स्मारक के अंदर शूट करने के लिए गार्डों को पैसे देते हैं.
गौर ने कहा, “ज्यादातर कपल्स पैसे देने के लिए तैयार रहते हैं, इसलिए अगस्त के बाद ये जगहें भीड़ से भर जाती हैं. लोग शूट के लिए लाइन में इंतिजार करते हैं.”
GenZ बनाम मिलेनियल्स. कौन बेहतर कर रहा है?
शादी के बाजार में अब GenZ और मिलेनियल्स दोनों मौजूद हैं, इसलिए फोटोग्राफर दो अलग-अलग तरह की उम्मीदों को पूरा कर रहे हैं. 33 साल की अय्यर ने कहा, “मेरे मिलेनियल ग्राहकों के साथ मेरी अच्छी समझ है, लेकिन उनके छोटे भाई-बहन हमें हायर नहीं करना चाहते.”
GenZ कपल्स अपने मिलेनियल भाई-बहनों की शादियों की कॉपी नहीं करना चाहते. यह दिखावे वाली पीढ़ी चाहती है कि उनकी शादी एक खास पहचान बनाए, लेकिन बहुत ज्यादा भव्य न हो.
जब 25 साल की हुनर और 27 साल के प्रभनूर की शादी हुई, तब प्री-वेडिंग शूट कोई जरूरी चीज नहीं थी. लेकिन उन्होंने इसे इसलिए किया क्योंकि इससे उनकी निजी भावनाएं जुड़ी थीं. यह सिर्फ किसी ट्रेंड को बिना सोचे-समझे फॉलो करना नहीं था.
हालांकि हुनर और प्रभनूर की प्री-वेडिंग तस्वीरें किसी मैगजीन के कवर से कम नहीं थीं, लेकिन इस GenZ कपल के लिए यह सिर्फ ग्लैमरस तस्वीरों के बारे में नहीं था. उनके लिए यह सगाई और शादी के बीच के उस छोटे लेकिन भावनाओं से भरे समय को संभालकर रखने का तरीका था.
अय्यर ने कहा कि GenZ अपने लुक्स को लेकर बहुत सजग रहती है और हर तस्वीर को बार-बार देखना चाहती है. उन्होंने कहा, “ध्यान पल को महसूस करने से ज्यादा इस बात पर होता है कि जब वे इसे पोस्ट करेंगे तो क्या वे सबसे अच्छे दिखेंगे.”
अय्यर के लिए मिलेनियल्स की फोटो खींचना आसान है, क्योंकि वे फोटोग्राफर की बात सुनते हैं और GenZ की तरह हर चीज अपने हाथ में नहीं लेना चाहते.

बेंगलुरु के मिलेनियल कपल मधुरिमा सामंता और दिवाकर अपनी कुछ यादों को बेडरूम में लगाने के लिए फ्रेम करवाना चाहते थे और कुछ अपने यूट्यूब पेज Eastmeetswest के लिए. (सामंता कोलकाता से हैं और दिवाकर आंध्र प्रदेश से हैं.) उन्होंने अपने फोटोग्राफर की बात मानी और शहर के पास एक जापानी शैली के गार्डन में शूट कराया.
GenZ कपल्स, मिलेनियल्स के मुकाबले, कपड़ों और स्टाइलिंग को लेकर अपने फैसलों पर ज्यादा टिके रहते हैं और जरूरी नहीं कि वे फोटोग्राफर की सलाह मानें.
एक GenZ दूल्हा प्री-वेडिंग शूट के लिए नीली डेनिम जींस और सफेद शर्ट पहनकर आ सकता है, जबकि दुल्हन फूलों वाली ड्रेस में होगी. कई GenZ शादियों की शूटिंग कर चुके गौर ने कहा, “GenZ चाहती है कि शूट प्राकृतिक, कैजुअल और असली लगे.”
एक GenZ कपल अपने प्री-वेडिंग शूट के दौरान
हालांकि मधुरिमा और दिवाकर को पुराने और आम हो चुके पोज से कोई परेशानी नहीं थी. मधुरिमा ने सजावट वाली लाल वेस्टर्न गाउन पहनी थी, जबकि दिवाकर ने जींस, लाल टी-शर्ट और काला ब्लेजर पहना था. दोनों ने एक बड़े दिल के बैकग्राउंड के सामने तस्वीरें खिंचवाईं.
मधुरिमा की भी ज्यादा मांगें नहीं थीं. बस वह अच्छी दिखना चाहती थीं और मजा करना चाहती थीं. उन्होंने कहा, “मैं स्वाभाविक रूप से पोज दे देती हूं, लेकिन मेरे पति ऐसा नहीं कर पाते.” उन्होंने आगे कहा, “फोटोग्राफरों ने यह सुनिश्चित किया कि हम आरामदायक महसूस करें.”
GenZ के लिए हेरिटेज साइट पर शूट करना उतना ही पुराना है, जितना उन्हें मिलेनियल्स लगते हैं. लेकिन हॉट एयर बैलून की सवारी उनकी पसंद के हिसाब से है.
गौर ने कहा, “GenZ कपल्स अक्सर हमसे छिपी हुई जगहों के बारे में पूछते हैं, जैसे जंगल और झरने.” वह ऐसी जगहों की तलाश के लिए अक्सर यात्रा करते हैं.
प्री-वेडिंग शूट के दौरान परिवारों की ‘जासूसी’
कपल्स अपनी शादी से पहले की खुशी और उत्साह को तस्वीरों में कैद करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर सकते हैं. लेकिन भारत में कहा जाता है कि शादियां दो परिवारों के बीच होती हैं. बड़े शहरों में कपल्स शादी की तैयारी और प्लानिंग खुद संभाल रहे हैं, लेकिन छोटे शहरों में वे परिवारों की दखलअंदाजी से पूरी तरह बच नहीं सकते.
पंजाब के अमृतसर के अटारी के फोटोग्राफर पंकज कुमार 2011 से भारत-पाकिस्तान सीमा के पास शादियों की तस्वीरें खींच रहे हैं. उनके पिता ने 1981 में R.K. Film Photography शुरू किया था, जिसने इस इलाके में सबसे ज्यादा शादियों की शूटिंग की है.
अटारी में एक दशक से ज्यादा समय से प्री-वेडिंग शूट के बढ़ने को देखते हुए कुमार ने कहा कि इन शूट्स को लेकर दुल्हनें दूल्हों से ज्यादा उत्साहित होती हैं. पिछले पांच सालों में दुल्हनों ने ही प्री-वेडिंग फोटोग्राफी के लिए ज्यादा जोर दिया है.

कुमार ने कहा, “यहां के परिवारों के लिए प्री-वेडिंग शूट अभी भी एक नया कॉन्सेप्ट है.” उन्होंने बताया कि यहां के परिवार इन तस्वीरों को यादों के लिए नहीं, बल्कि तभी खिंचवाते हैं जब उनका कोई उद्देश्य हो, जैसे शादी की जगह के प्रवेश द्वार पर इन्हें लगाना.
अटारी के कपल्स की पसंदीदा जगह है. पुल कंजरी. फिल्म निर्माता अक्सर इस ऐतिहासिक गांव का इस्तेमाल पंजाबी फिल्मों और गानों की शूटिंग के लिए करते हैं. इम्तियाज अली की नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ इसका एक अच्छा उदाहरण है, जो दिखाती है कि अटारी के कपल्स किस तरह की तस्वीरें चाहते हैं. पुराने जमाने जैसा रोमांटिक अंदाज और हल्के भूरे रंग वाली पृष्ठभूमि.
पंजाब के अटारी में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास एक कपल अपने प्री-वेडिंग शूट के दौरान.
लेकिन कुमार ने कहा कि एक समस्या है. शूटिंग वाली जगह पर कम से कम पांच परिवार के सदस्य कपल के आसपास घूमते रहते हैं, जिससे कपल असहज महसूस करता है.
एक और छोटी समस्या है. भारत में प्री-वेडिंग फोटोग्राफी का तरीका बदल रहा है और तकनीक भी आगे बढ़ रही है, लेकिन परिवार अक्सर इस बात को पसंद नहीं करते कि शादी से पहले युवा कपल घर से दूर रहें. यानी एक ही कमरे में रहें. इसलिए उन्हें घर के पास की जगहें ही तलाशनी पड़ती हैं.
हुनर और प्रभनूर को भी जापान जाने के लिए अपने परिवार को काफी समझाना पड़ा था.
केतन अग्रवाल और सिया गोयल ने भी कथित तौर पर परिवार के सदस्यों के साथ बाली जाकर प्री-वेडिंग शूट करने की योजना बनाई थी.
सोम ने कहा, “यह एक आम समस्या है. परिवारों की जासूसी.”
अगर परिवार साथ नहीं जाता, तो कपल अपने दोस्तों को साथ ले जाते हैं और इस यात्रा को लंबे बैचलरेट पार्टी जैसा बना देते हैं. यह प्री-वेडिंग रस्म में जुड़ा एक नया बदलाव है.
प्री-वेडिंग फोटोग्राफी ने बदलते ट्रेंड और नई तकनीक के साथ खुद को ढाल लिया है और एक दशक से ज्यादा समय से इस बिजनेस में बनी हुई है.
खुल्लर ने कहा, “इसमें कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, लेकिन कपल्स अपनी तस्वीरें खिंचवाते रहेंगे.”
आखिरकार, शादी के जश्न से जुड़ी ये ही एकमात्र ऐसी चीजें हैं, जिन्हें लोग असल में अपने पास रख सकते हैं.
शादी के दो साल बाद अभिजीत और अनिंदिता अब लंबी दूरी वाली शादीशुदा जिंदगी जी रहे हैं. कुछ दिनों में उन्हें अभिजीत की बहुत याद आती है. वह अपना फोन खोलती हैं, “प्री-वेडिंग” फोल्डर ढूंढती हैं और चुपचाप पुरानी यादों में चली जाती हैं.
अनिंदिता ने कहा, “कुछ पलों के लिए मैं फिर उन खूबसूरत दिनों में लौट जाती हूं. हर मुस्कान, हर हंसी और हमारे साथ बिताए हर पल को दोबारा महसूस करती हूं. ये तस्वीरें मेरी अपनी छोटी सी टाइम मशीन हैं.”
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