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Wednesday, 24 July, 2024
होमफीचरयूपी में न्यायिक हिरासत में दलित व्यक्ति की मौत, मां की गुहार — ‘मेरा बेटा लौटा दो’, बदले में मिली लाठी

यूपी में न्यायिक हिरासत में दलित व्यक्ति की मौत, मां की गुहार — ‘मेरा बेटा लौटा दो’, बदले में मिली लाठी

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने फिरोजाबाद में न्यायिक हिरासत में मारे गए 28-वर्षीय आकाश सिंह ‘जाटव’ के घर का दौरा किया. मायावती और चंद्रशेखर आज़ाद भी न्याय की मांग कर रहे हैं.

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फिरोजाबाद: चूड़ियों के शहर फिरोजाबाद के नगला पचिया इलाके की खामोशी में केवल शकुंतला देवी की आवाज़ का शोर है — “कोई मेरे इकलौते बेटे को लौटा दो”.

आधा दर्जन पुलिस अधिकारी और स्थानीय खुफिया इकाई के सदस्य उनके घर के बाहर खड़े हैं — परिवार से मिलने आने वाले हर व्यक्ति पर कड़ी नज़र रख रहे हैं और हर हरकत को कैद कर रहे हैं. सोमवार को परिवार के एक सदस्य ने निगरानी और फोटोग्राफी के लिए एक व्यक्ति को फटकार भी लगाई.

आखिरकार, पुलिस पर ही 28-वर्षीय दलित व्यक्ति आकाश सिंह ‘जाटव’ की हत्या का आरोप है, जिसे 18 जून को बाइक चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. तीन दिन बाद न्यायित हिरासत में आकाश की मौत हो गई. परिवार जब न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन करने के लिए आगे बढ़ा, जिसमें भीम आर्मी के सदस्य भी शामिल हुए, तो पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्षों की पुष्टि की, जिसमें आकाश के शरीर पर 14 चोट के निशान पाए गए. रिपोर्ट के अनुसार, उसकी मौत का कारण “मौत से पहले सिर पर लगी चोट” थी.

Firozabad police arrested Akash Singh on 18 June in a bike theft case | Photo: Special Arrangement
फिरोजाबाद पुलिस ने 18 जून को बाइक चोरी के मामले में आकाश सिंह (बाएं, मैरून रंग की टी शर्ट में) को गिरफ्तार किया | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

आकाश की मां शकुंतला नगला पचिया में अपने घर पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों से घिरी हुई कहा, जहां वे बीते 40 साल से रह रही हैं, “क्या कोई किसी को इतना पीटता है? पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया और इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई. अब उसके दो बच्चों का क्या होगा?”

शकुंतला ने बताया कि वे जेल में अपने बेटे से मिलने गईं थीं और उन्हें मुलाकात का पर्चा भी मिला था, लेकिन उन्हें वहां उनके बेटे की मौत की सूचना दी गई.

क्या कोई किसी को इतना पीटता है? पुलिस ने उसे झूठे केस में फंसाकर इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई. अब उसके दो बच्चों का क्या होगा?

— शकुंतला, आकाश सिंह की मां

आकाश शकुंतला और बीरी सिंह का इकलौता बेटा था, जो चूड़ी बनाने का काम करता था. दुखी शकुंतला ने कहा, “वो इस घर का इकलौता कमाने वाला था. अब इस बुढ़ापे में हमारा क्या होगा? मेरा बेटा चोर नहीं था और उसने कभी कोई गलत काम नहीं किया.”

बेटे की मौत के सदमे में परिवार ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई है. न्यायिक जांच भी शुरू नहीं हुई है. जिला प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, मामले की आगे की जांच के लिए मंगलवार तक जांच कमेटी गठित कर दी जाएगी.

फिरोजाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सौरभ दीक्षित ने कहा, “न्यायिक जांच पूरी होने के बाद अगर पुलिस अधिकारी दोषी पाए गए तो हम उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे.” दीक्षित ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की पुष्टि की और कहा कि आकाश के शरीर पर कई चोटें थीं.

यूपी के पुलिस थानों में एक अधिकारी की बेल्ट को ‘समाज सुधारक’ कहा जाता है. कबूलनामा करवाने के लिए पिटाई करना भारतीय पुलिस की एक पुरानी प्रथा है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. कई इलाकों में जेल इसका विस्तार हैं. भारत और दुनिया भर में मानवाधिकार समूहों ने हिरासत में यातना को जांच की एक पुरानी शैली बताया है और पुलिस और जेल अधिकारियों को नागरिक अधिकारों में प्रशिक्षित करने और जवाबदेह बनाने की मांग की है.

‘डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस हिरासत में व्यक्तियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए दिशा-निर्देश स्थापित किए और इसने ‘थर्ड-डिग्री टॉर्चर’ विधियों के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाई.

यूपी पुलिस के एक पूर्व कमिश्नर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब पुलिस हिरासत में कोई मौत होती है, तो सबसे पहला शक अक्सर पुलिस पर ही जाता है, क्योंकि कई बार ऐसी त्रासदियों में पुलिस की भूमिका रही है, लेकिन इसके पीछे कई और कारण भी हो सकते हैं, जैसे गंभीर बीमारी या साथी कैदियों द्वारा हमला.”

मेरा बेटा पूरी तरह ठीक था. उसके शरीर पर ये निशान कैसे आए? पुलिस ही दोषी है. हमें न्याय चाहिए.

—आकाश के पिता बीरी सिंह

स्थानीय मीडिया में पुलिस को दोषी ठहराने वाली सुर्खियां भरी पड़ी हैं. एक में लिखा है — “मां और चाची ने भी सही पुलिस की लाठियां, पड़े नीले निशान”, एक और में लिखा है: “आकाश की मौत छोड़ गई सवाल, आखिर कौन है ज़िम्मेदार?”

इस बीच नेता परिवार के समर्थन में सामने आए हैं. समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने आकाश के घर जाकर निष्पक्ष जांच की मांग की, जबकि बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर घटना की निंदा की. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “राज्य सरकार को दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और पीड़ित परिवार की मदद करनी चाहिए.”

आकाश के पिता बीरी सिंह ने कहा कि भीम आर्मी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई. नगीना के सांसद और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने निष्पक्ष न्यायिक जांच और परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवज़ा देने की मांग करते हुए एक्स पर पोस्ट किया.

पूर्व कमिश्नर ने कहा कि फिरोजाबाद का मामला पहली नज़र में संदिग्ध लगता है. उन्होंने कहा, “जेल प्रशासन का रवैया टालमटोल वाला रहा और उसने स्थिति स्पष्ट नहीं की. इस मामले की जांच होनी चाहिए और जल्द ही सच्चाई सामने आनी चाहिए. तभी लोगों का पुलिस प्रशासन पर भरोसा बना रहेगा.”


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‘उसका चेहरा नीला पड़ गया था’

70-साल से ज़्यादा उम्र के बीरी सिंह अपनी नातिन को गोद में लिए बैठे हुए दावा करते हैं कि पुलिस परिवार को गुमराह करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, “मेरा बेटा पूरी तरह से ठीक था. उसके शरीर पर ये निशान कैसे आए? पुलिस दोषी है. हमें न्याय चाहिए.” टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, आकाश की चोटों में “उसकी बाईं आंख के आसपास नीला धब्बा, गर्दन, हाथ, जांघ, कंधे और नितंब पर चोट के निशान शामिल हैं.”

आकाश के एक पड़ोसी ने स्मार्टफोन पर दिप्रिंट को उसके शरीर की तस्वीरें दिखाईं. आकाश के चाचा चोब सिंह ने कहा, “सिर, कंधे से लेकर पैर तक, उसके शरीर पर कोई भी जगह ऐसी नहीं थी जिस पर चोट न लगी हो. यहां तक ​​कि उसकी नाक से भी खून बह रहा था.”

A neighbor of Akash shows his old photo | Photo: Krishan Murari/ThePrint
आकाश के एक पड़ोसी ने उसकी पुरानी तस्वीर दिखाई | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

पुलिस का कहना है कि आकाश और उसके दोस्त को कथित तौर पर चोरी की गई बाइक के कुछ हिस्सों के साथ गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने दोनों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 411 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना या रखना) और 414 (चोरी की संपत्ति छिपाने में सहायता करना) के तहत मामला दर्ज किया.

फिरोजाबाद दक्षिण पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर योगेंद्र पाल सिंह ने कहा कि आकाश और उसके दोस्त शिवम को 18 जून को शाम 6:15 बजे गिरफ्तार किया गया.

अगले दिन, 19 जून को सुबह 10:05 बजे, आकाश की ट्रॉमा सेंटर में मेडिकल जांच की गई, जहां उन्हें उसके शरीर पर कोई चोट नहीं मिली. फिर उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया और रिमांड पर भेज दिया गया.

योगेश पाल सिंह ने कहा, “उसकी मौत में हमारा कोई हाथ नहीं है. हमने अपना नियमित काम किया और उसे जिला जेल भेज दिया.”

उन्होंने जोर देकर कहा कि आकाश और शिवम दोनों ही चोर थे, “और आकाश शराबी था”. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने शिवम के भाई को कई बार गिरफ्तार किया था, जो चोरों का संगठित गिरोह चलाता है.

जेल में चीज़ें तेज़ी से सामने आईं, लेकिन स्पष्टीकरण अस्पष्ट हैं.

फिरोजाबाद जेल निरीक्षक आनंद कुमार सिंह के अनुसार, आकाश 20 जून की रात को बीमार हो गया और उसे अस्पताल ले जाया गया. 21 जून को सुबह 6 बजे के आसपास उसकी मौत हो गई. सिंह ने कहा, “हमने न्यायिक जांच की सिफारिश की है और जांच से सच्चाई सामने आएगी.” आकाश अपनी मौत से 40 घंटे पहले जिला जेल में था. दिप्रिंट ने जिला अस्पताल के रिकॉर्ड भी देखे, जिसमें कहा गया था कि अस्पताल लाए जाने से पहले आकाश की मौत हो चुकी थी.

जिला जेल ने भी स्थिति को ठीक से स्पष्ट नहीं किया है. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जेल ने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरी जानकारी नहीं दी है.


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‘हम कैसे जिएंगे?’

अपने इकलौते बेटे को खोने से आकाश की मां टूट गई हैं. शकुंतला नम आंखों से कहती हैं कि आकाश का जन्म उनकी शादी के 15 साल बाद हुआ था. “मैंने उसे बहुत प्यार से पाला और अब वो चला गया.”

आकाश की शादी सात-आठ साल पहले हुई थी और उसके दो बच्चे हैं — एक लड़का, लगभग छह साल का और एक लड़की, लगभग डेढ़ साल की. ​​अपने पिता के विपरीत, जो फिरोजाबाद के पारंपरिक चूड़ी के व्यवसाय से जुड़े थे, आकाश ने स्थानीय संगमरमर की फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया.

आकाश के घर की ओर इशारा करते हुए, उनके चाचा चोब सिंह ने याद किया कि उनके भतीजे ने खुद घर की टाइल लगाई थी.

Akash Singh's father Biri Singh holding his 1.5 year old granddaughter | Photo: Krishan Murari/ThePrint
आकाश सिंह के पिता बीरी सिंह अपनी डेढ़ साल की पोती को गोद में लिए हुए हैं | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

सरकार ने पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर 5 लाख रुपये दिए हैं.

लेकिन आकाश की मां शकुंतला ने कहा कि उनकी बहू के भाई ने सरकारी चेक छीन लिया. “अब हम कैसे जिएंगे?” आकाश रोजाना अपनी बाइक से 5-6 किलोमीटर की यात्रा करके मार्बल फैक्ट्री में काम करके अपने परिवार के लिए लगभग 10,000-12,000 रुपये कमाता था.

आकाश का एक मंजिला गुलाबी रंग का घर सहानुभूति रखने वाले रिश्तेदारों और पड़ोसियों से भरा हुआ है, उनके जूते और चप्पल साधारण प्रवेश द्वार पर सजे हुए हैं. उनके पिता सिर झुकाए बैठे हैं, मानो किसी गहरे विचार में डूबे हों. आकाश की मां बेसुध हैं, हर बार जब कोई उनके कमरे में प्रवेश करता है तो वे रोने लगती हैं. वे परिवार की वित्तीय स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं. एक महिला उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश करते हुए कहती हैं कि परिवार को पीएम किसान निधि योजना (जिसके लिए उन्होंने पहले आवेदन किया था) से 3,000 रुपये तिमाही और उनकी पेंशन से 1,000-1,500 रुपये मासिक मिलने की उम्मीद है.

Relatives and neighbours of Akash Singh sitting outside his house | Photo: Krishan Murari/ThePrint
आकाश सिंह के रिश्तेदार और पड़ोसी उनके घर के बाहर बैठे हैं | फोटो: कृष्ण मुरारी/दिप्रिंट

शकुंतला ने दिप्रिंट को बताया कि 15 जून को आकाश और उनकी पत्नी प्रीति घर छोड़कर कहीं और रहने चले गए थे. “आकाश और उसकी पत्नी ने पास में ही एक कमरा ले रखा था. 17 जून को वे अपनी पत्नी के साथ कुछ सामान लेने आया था. उसके बाद मैंने उसे नहीं देखा.”

फिर, कुछ लोग अनौपचारिक कपड़ों में आए और बीरी सिंह से एक कागज़ पर हस्ताक्षर करवाए. “उन्होंने मुझे बताया कि मेरा बेटा अब नहीं रहा.”

हालांकि, पुलिस का दावा कुछ और ही है. उन्होंने कहा कि जब आकाश स्थानीय जेल में बंद था, तब भी उसके परिवार के सदस्य उससे मिलने आए थे.

आकाश के रिश्तेदार और पड़ोसी गुस्से से उबल रहे हैं. हाथरस के एक रिश्तेदार राम स्वरूप ने कहा कि पुलिस ने कभी भी परिवार को विश्वास में नहीं लिया और ठीक से बात नहीं की.

आकाश के घर के बाहर चटाई पर बैठे स्वरूप ने कहा, “प्रशासन को परिवार से बात करनी चाहिए थी और उन्हें समझाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. पुलिस ने (विरोध प्रदर्शन के दौरान) उसके परिवार पर बल प्रयोग किया. मृतक के शरीर पर निशान संदेह पैदा करते हैं — बाइक चोरी के लिए इस तरह की पिटाई की ज़रूरत नहीं है.”


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प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर

21 जून को जब आकाश का शव पोस्टमार्टम के बाद घर लाया जा रहा था, तो आकाश के परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों समेत 50 से ज़्यादा लोगों ने एंबुलेंस को रोक लिया और हुमांयुपुर चौराहे पर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जबकि आकाश का शव कई घंटों तक एंबुलेंस में ही पड़ा रहा.

पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने, जो शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे, उन पर पथराव किया, सड़क जाम की और कई निजी और सरकारी वाहनों को जला दिया.

विडंबना यह है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं. एक एफआईआर एंबुलेंस ड्राइवर ने दर्ज की है, जिसका वाहन क्षतिग्रस्त हो गया था. इसमें 11 लोगों के नाम हैं. दूसरी एफआईआर पुलिस ने दर्ज की है, जिसमें 32 लोगों और 20-25 अज्ञात के नाम हैं.

दोनों एफआईआर दंगा, हत्या का प्रयास, जानबूझकर शांति भंग करने और आपराधिक धमकी समेत अन्य धाराओं के तहत दर्ज की गई हैं.

इंस्पेक्टर योगेंद्र पाल सिंह ने कहा, “अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है. कई लोगों के नाम अभी एफआईआर में शामिल नहीं किए गए हैं और कई के नाम हटाए जाने बाकी हैं. कार्रवाई चल रही है, सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है.”

सिंह ने दिप्रिंट को 21 जून के विरोध प्रदर्शन की फुटेज दिखाई. “ये किस तरह के प्रदर्शनकारी हैं जो एंबुलेंस पर भी हमला कर रहे हैं? आकाश का शव उसी एंबुलेंस में रखा हुआ था.”

पथराव के दौरान कथित तौर पर कई पुलिस अधिकारी घायल हुए, जिनका इलाज किया गया. घायल अधिकारियों में सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद और रामगढ़ थाना प्रभारी प्रदीप कुमार शामिल हैं.
योगेंद्र पाल सिंह ने कहा, “अधिकांश प्रदर्शनकारियों का पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड है. अभी हम सारी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.”

पीड़ित परिवार मांग कर रहा है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएं. लाठीचार्ज में आकाश की मां और पड़ोसी घायल हो गए. शकुंतला के बाएं हाथ पर अभी भी लाठी का निशान है. गहरे नीले निशान को दिखाते हुए उन्होंने कहा, “मेरा बेटा मर गया और जब हमने न्याय मांगा, तो पुलिस ने हमें पीटा.”

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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