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Tuesday, 13 October, 2026
होमफीचरकुनो में एक और चीता शावक की मौत, 2026 में अब तक 7 चीतों की मौत

कुनो में एक और चीता शावक की मौत, 2026 में अब तक 7 चीतों की मौत

2022 में प्रोजेक्ट चीता शुरू होने के बाद से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मांग रहे एक कार्यकर्ता को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर रिपोर्ट देखने की अनुमति नहीं दी गई.

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नई दिल्ली: नामीबिया से आई मादा चीता आशा के पांच शावकों में से एक, आठ महीने के चीता शावक की सोमवार दोपहर मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में मौत हो गई. पार्क के अधिकारियों के मुताबिक, मौत की वजह अभी पता नहीं चल पाई है और शावक के शव को पोस्टमॉर्टम जांच के लिए भेज दिया गया है.

इसके साथ ही इस साल भारत में अब तक सात चीतों की मौत हो चुकी है, जिससे देश में चीतों की कुल संख्या घटकर 59 हो गई है. 21 सितंबर को नामीबिया से आए चीते गौरव की एक पुरानी बीमारी के कारण मौत हो गई थी. उसे शरीर में पानी की कमी और कमजोरी की हालत में पाया गया था. इससे पहले जून में भारत में पैदा हुई मादा चीता KGP-11 की मौत मोरेना जिले में लगी चोटों के कारण हुई थी. मई में चार चीता शावक पैदा होने के एक महीने बाद मृत पाए गए थे और उनके शरीर का कुछ हिस्सा खाया हुआ था.

यह ताज़ा मौत भोपाल के रहने वाले कार्यकर्ता अजय दुबे को भारत में 2022 में प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद से मारे गए सभी चीतों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखने की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद हुई है. नौ अक्टूबर को सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत उनकी मांग को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं’ का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया.

एक प्रेस रिलीज़ में दुबे ने सवाल उठाया कि किसी जानवर का जन्म या उसकी मौत ‘भारत की संप्रभुता और अखंडता को कैसे प्रभावित कर सकती है’. RTI कानून की धारा 8(1)(a) के तहत कुछ जानकारियां सार्वजनिक न करने के लिए यही आधार बताया गया है. उन्होंने प्रोजेक्ट चीता के सिलसिले में सरकारी अधिकारियों द्वारा की गई सभी विदेश यात्राओं की जानकारी भी मांगी थी, लेकिन उन्हें बताया गया कि ऐसी कोई जानकारी मौजूद नहीं है.

मृत शावक आशा के दूसरे बच्चे थे, जो फरवरी 2026 में पैदा हुए थे. सोमवार सुबह वन अधिकारियों ने रोजाना की निगरानी के दौरान देखा कि आशा के साथ उसके पांच में से सिर्फ चार शावक हैं. इसके बाद लापता शावक की तलाश शुरू की गई. काफी तलाश के बाद शावक का शव मिला, लेकिन पार्क अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वह किन हालात में मिला.

भारत में मौजूद 59 चीतों में से 53 कुनो नेशनल पार्क में, चार गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में और दो वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में हैं. कुनो में मौजूद 53 चीतों में से 40 भारत में पैदा हुए हैं. हालांकि, अभी सिर्फ 15 चीते जंगल में खुले तौर पर घूम रहे हैं, जबकि बाकी चीते सॉफ्ट-रिलीज बाड़ों और दूसरे बाड़ों में हैं.

इस साल भारत को बोत्सवाना से लाए गए नौ और चीते भी मिले, जिन्हें कुनो और गांधी सागर नेशनल पार्क में छोड़ा गया.

चीता ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव समेत देश के नेताओं से लगातार तारीफ और ध्यान मिल रहा है. लेकिन प्रोजेक्ट को चीतों की मौतों की संख्या और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट समेत प्रोजेक्ट से जुड़ी दूसरी जानकारियों में पारदर्शिता की कमी को लेकर आलोचना का भी सामना करना पड़ा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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