नई दिल्ली: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 3 मई को हुई नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट अंडरग्रेजुएट (NEET UG) 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है.
यह फैसला केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिनमें परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की बात सामने आई. अब एनटीए दोबारा परीक्षा आयोजित करेगा.
एनटीए के निदेशक अभिषेक सिंह ने दिप्रिंट से कहा, “हमें 7 मई को कुछ रिपोर्ट मिली थीं और जैसा कि हमने परीक्षा में किसी भी गड़बड़ी को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की बात कही थी, हमने इन इनपुट्स की गंभीरता से जांच की. पीडीएफ में लगाए गए कुछ आरोप सही पाए गए. हमने फैसला किया कि परीक्षा की विश्वसनीयता पर असर डालने वाली कोई भी चीज स्वीकार नहीं की जाएगी.”
उन्होंने आगे कहा, “दोबारा परीक्षा होगी, सीबीआई जांच होगी, छात्रों से कोई नई फीस नहीं ली जाएगी और जो फीस पहले जमा की गई है, उसे वापस किया जाएगा.”
भविष्य में पेपर लीक रोकने के उपायों पर अधिकारी ने कहा, “पेपर लीक की समस्या नई नहीं है. सीएनसी कमेटी की सिफारिशें हैं और इस समस्या को खत्म करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.”
मंगलवार को जारी एनटीए के बयान में कहा गया, “जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर यह तय हुआ कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी नहीं रखा जा सकता. दोबारा होने वाली परीक्षा की तारीखें और नए एडमिट कार्ड का शेड्यूल आने वाले दिनों में एजेंसी के आधिकारिक माध्यमों से जारी किया जाएगा.”
कई राज्यों में पेपर लीक के आरोप
3 मई को परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद कई राज्यों से पेपर लीक के आरोप सामने आने लगे थे.
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सीकर और जयपुर समेत कई जिलों से कई संदिग्धों को हिरासत में लिया. बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी जांच शुरू की गई, क्योंकि आरोप लगे थे कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बांटे गए थे.
एजुकेटर्स फेडरेशन दिल्ली के अध्यक्ष केशव अग्रवाल ने कहा, “दोनों सेट के कुल 360 सवालों में से करीब 140 सवाल कथित लीक पेपर से मेल खाते दिख रहे हैं. कई लोग इसे संयोग मानना असंभव बता रहे हैं, लेकिन अदालत यह मान सकती है कि 40 प्रतिशत समानता अकेले पेपर लीक साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. खासकर तब, जब असली पेपर किसी के पास से बरामद नहीं हुआ और न ही इलेक्ट्रॉनिक तरीके से लीक साबित हुआ.”
कथित पेपर लीक के बाद परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर फिर सवाल उठने लगे थे और छात्र जांच या परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे थे.
विपक्षी दलों ने भी इन आरोपों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है.
एनटीए ने कहा है कि अब इस मामले को परीक्षा से जुड़े आरोपों की “व्यापक जांच” के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया है.
बयान में कहा गया, “भारत सरकार ने इस मामले को व्यापक जांच के लिए सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है. एनटीए जांच एजेंसी को पूरा सहयोग देगा और जांच के लिए जरूरी सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और मदद उपलब्ध कराएगा.”
नई परीक्षा की तारीखें और संशोधित एडमिट कार्ड शेड्यूल जल्द ही आधिकारिक माध्यमों से अलग से जारी किए जाएंगे.
एनटीए के अनुसार, परीक्षा रद्द करने का फैसला “छात्रों के हित में और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली पर बने भरोसे को बनाए रखने” के लिए लिया गया है.
बयान में आगे कहा गया, “एजेंसी जानती है कि दोबारा परीक्षा होने से छात्रों और उनके परिवारों को वास्तविक और बड़ी असुविधा होगी. एनटीए इस परेशानी को हल्के में नहीं लेता. लेकिन यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि दूसरा विकल्प उस भरोसे को और ज्यादा तथा लंबे समय तक नुकसान पहुंचाता.”
NEET विवाद
यह पहली बार नहीं है जब एनटीए पर नीट की परीक्षा को लेकर सवाल उठे हैं.
2024 में भी एजेंसी को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था, जब असामान्य रूप से बहुत ज्यादा उम्मीदवारों ने रैंक 1 हासिल की थी.
उस समय ग्रेस मार्क्स, बढ़े हुए स्कोर और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए थे.
बिहार, गुजरात और दूसरे राज्यों में पेपर लीक और संगठित नकल के आरोप सामने आने के बाद जांच शुरू की गई थी. कई लोगों को राज्य पुलिस एजेंसियों ने गिरफ्तार भी किया था.
छात्र, अभिभावक और शिक्षक परीक्षा रद्द कराने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.
हालांकि, कोर्ट ने सभी उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देने से इनकार कर दिया था. अदालत ने माना था कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा की “पवित्रता” प्रभावित हुई थी.
इसके बाद केंद्र सरकार ने एनटीए के कामकाज में सुधार की घोषणा की थी. इसमें परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सिस्टम में बदलाव शामिल थे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)