नई दिल्ली: भारत में 2001 के बाद से 34,840 कॉलेज और 980 यूनिवर्सिटी जुड़ी हैं, लेकिन जिस जगह देश की युवा आबादी ज्यादा है, वहां उच्च शिक्षा की क्षमता उसी हिसाब से नहीं बढ़ी है. बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में यह कमी सबसे ज्यादा है. एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.
‘द जियोग्राफी ऑफ हायर एजुकेशन इन इंडिया’ नाम की यह रिपोर्ट शिक्षा सलाहकार कंपनी Jetri और गैर-लाभकारी डेटा प्लेटफॉर्म Impactica.org ने बुधवार को जारी की. इसमें भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों के भौगोलिक वितरण का अध्ययन किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 18-23 साल की उम्र के हर एक लाख लोगों पर कॉलेजों की संख्या 9 से बढ़कर 37 हो गई है, लेकिन यह विस्तार सभी राज्यों में एक जैसा नहीं हुआ. जिन राज्यों में युवा आबादी ज्यादा है, वहां अब भी उच्च शिक्षा की क्षमता में कमी बनी हुई है.
रिपोर्ट कहती है कि जिन राज्यों में युवा आबादी सबसे ज्यादा है, वहां मौजूदा संस्थानों पर दबाव बढ़ता जाएगा, अगर जनसंख्या में बदलाव के हिसाब से उच्च शिक्षा का बुनियादी ढांचा नहीं बढ़ाया गया. रिपोर्ट में कहा गया है, “अतिरिक्त क्षमता नहीं बढ़ाई गई तो उच्च शिक्षा तक पहुंच में राज्यों के बीच असमानता और बढ़ सकती है.”
बिहार, UP और झारखंड में सबसे ज्यादा कमी
रिपोर्ट में पाया गया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में उनकी युवा आबादी के मुकाबले उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या कम है. इन तीनों राज्यों में बड़ी और बढ़ती युवा आबादी, यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की कम संख्या, कम ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) और ज्यादा प्रजनन दर है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर मौजूदा क्षमता में बदलाव नहीं किया गया, तो बिहार में 3-17 साल की उम्र के करीब 10.3 लाख लोगों के लिए एक यूनिवर्सिटी होगी और उत्तर प्रदेश में करीब 6 लाख लोगों के लिए एक यूनिवर्सिटी होगी.
उच्च शिक्षा में छात्रों की भागीदारी में भी यह अंतर दिखाई देता है. ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) यह बताता है कि 18-23 साल की आबादी में से कितने लोग उच्च शिक्षा में दाखिला लेते हैं. 2023-24 में बिहार का GER 17.66 प्रतिशत था, जबकि झारखंड में यह 19.43 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 25.97 प्रतिशत था. देश का GER करीब 30 प्रतिशत था.
केंद्र सरकार के ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2022-23 के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 8,310 कॉलेज और 91 यूनिवर्सिटी थीं. वहीं बिहार में 1,175 कॉलेज और 37 यूनिवर्सिटी और झारखंड में 425 कॉलेज और 34 यूनिवर्सिटी थीं.
हालांकि, किसी राज्य में संस्थानों की कुल संख्या से यह पता नहीं चलता कि वहां उच्च शिक्षा की क्षमता पर्याप्त है या नहीं. उत्तर प्रदेश में बिहार से सात गुना से ज्यादा कॉलेज हैं, लेकिन उसकी आबादी और युवा आबादी भी काफी ज्यादा है. इसलिए उच्च शिक्षा की संभावित मांग भी बहुत ज्यादा है.
फरवरी 2025 की नीति आयोग की रिपोर्ट ‘एक्सपैंडिंग क्वालिटी हायर एजुकेशन थ्रू स्टेट्स एंड स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटीज’ में पाया गया कि उत्तर प्रदेश में 18-23 साल की उम्र के हर एक लाख लोगों पर 0.3 यूनिवर्सिटी थीं, जबकि देश का औसत 0.8 था. इससे पता चलता है कि संस्थानों की संख्या को उस आबादी के साथ देखकर समझना जरूरी है, जिसकी वे सेवा करते हैं.
Impactica.org की संस्थापक और CEO वृंदा बंसोडे ने कहा, “अब बात सिर्फ क्षमता बढ़ाने की नहीं है. बात यह है कि क्षमता को मांग के साथ जोड़ा जाए. भारत पहले ही देख सकता है कि आगे किन जगहों पर दबाव बढ़ेगा. इससे पहले से योजना बनाने का मौका मिलता है कि उन छात्रों के आने से पहले तैयारी की जा सके.”
20 जिलों में 28% यूनिवर्सिटी
रिपोर्ट के मुताबिक, जिलों के स्तर पर यह अंतर और ज्यादा साफ दिखाई देता है. भारत की 28 प्रतिशत यूनिवर्सिटी सिर्फ 20 जिलों में हैं. वहीं कॉलेज भी कुछ बड़े शिक्षा केंद्रों के आसपास बड़ी संख्या में मौजूद हैं.
उदाहरण के लिए बेंगलुरु अर्बन में 1,225 कॉलेज और जयपुर में 809 कॉलेज हैं. ये देश में कॉलेजों के दो सबसे बड़े केंद्र हैं.
उच्च शिक्षा के केंद्र सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं हैं. राजस्थान के सीकर में दो यूनिवर्सिटी और 374 कॉलेज हैं. उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक यूनिवर्सिटी और 338 कॉलेज हैं, जबकि कर्नाटक के बेलगावी में तीन यूनिवर्सिटी और 317 कॉलेज हैं.
इन जगहों पर संस्थानों की ज्यादा संख्या से पता चलता है कि बड़े शहरों के अलावा लगातार स्थानीय मांग और निवेश ने भी इन शिक्षा केंद्रों को विकसित करने में मदद की है.
कुल मिलाकर, 173 जिलों में 100 या उससे ज्यादा कॉलेज हैं. इससे पता चलता है कि संस्थानों की क्षमता पूरे देश में समान रूप से विकसित होने के बजाय कुछ खास भौगोलिक क्षेत्रों के आसपास ज्यादा विकसित हुई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के ज्यादातर उच्च शिक्षा संस्थान पश्चिम, दक्षिण और उत्तर के हिस्सों में हैं. वहीं पूर्व और पूर्वोत्तर में आबादी का बड़ा हिस्सा रहने के बावजूद तुलनात्मक रूप से कम संस्थान हैं.
उच्च शिक्षा की क्षमता बढ़ाना
रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में नए संस्थान उन जगहों पर बनाए जाने चाहिए जहां युवा आबादी बढ़ रही है. बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड ऐसे राज्य हैं जहां इस कमी को दूर करने की जरूरत है.
रिपोर्ट में अलग-अलग संस्थान बनाने के बजाय पूरे उच्च शिक्षा के इकोसिस्टम को विकसित करने की सिफारिश की गई है. सफल शिक्षा केंद्रों में यूनिवर्सिटी, कॉलेज और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी साथ-साथ होती है. स्थानीय क्षमता भी जरूरी है क्योंकि ज्यादातर छात्र अब भी अपने ही राज्य में पढ़ाई करते हैं.
रिपोर्ट का व्यापक तर्क है कि भारत ने पिछले 25 वर्षों में यह साबित किया है कि वह बड़े स्तर पर उच्च शिक्षा की क्षमता बना सकता है. अब अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि नई क्षमता उन जगहों पर बनाई जाए जहां अगली पीढ़ी के छात्र होंगे.
Jetri की मैनेजिंग पार्टनर श्रेयसी सिंह ने कहा, “भारत ने पहले ही यह दिखा दिया है कि वह बहुत बड़े स्तर पर उच्च शिक्षा का निर्माण कर सकता है. अब अगली परीक्षा सटीक योजना की है: यह समझना कि भविष्य के छात्र कहां होंगे, कहां क्षमता सबसे कम है और कहां नए संस्थान अवसर और क्षेत्रीय विकास पर सबसे ज्यादा असर डाल सकते हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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