नई दिल्ली: थिएटराइजेशन योजना पर पहली बार विस्तार से अपनी बात रखते हुए, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रविवार को कहा कि भारतीय वायुसेना इसे लड़ाकू विमानों को भौगोलिक क्षेत्रों के हिसाब से स्थायी रूप से बांटने की कवायद के रूप में नहीं देख रही है. उन्होंने कहा कि विदेशी मॉडलों की नकल करने के बजाय भारत की खास सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से ढांचा तैयार किया जाना चाहिए.
पीटीआई को दिए एक विशेष इंटरव्यू में एयर चीफ मार्शल ने कहा कि थिएटराइजेशन का मुख्य सिद्धांत यह होना चाहिए कि जहां जरूरी हो, वहां नियंत्रण केंद्रीकृत रहे और जहां उचित हो, वहां काम करने की जिम्मेदारी विकेंद्रीकृत हो. उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि हवाई ताकत सैन्य नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकती है.
एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि इतने बड़े बदलाव को चरणों में लागू किया जाना चाहिए, ताकि अभियान चलाने की तैयारी पर कभी असर न पड़े. उन्होंने भविष्य के युद्धक्षेत्र के बारे में जरूरत से ज्यादा निश्चितता के साथ अनुमान लगाने के जाल में फंसने से भी आगाह किया.
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि यह अभियान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुखों की ओर से बनाए गए संयुक्त ढांचे के तहत चलाया गया था. इसमें अहम संसाधनों का केंद्रीकृत आवंटन और जरूरत के मुताबिक तेजी से दोबारा आवंटन निर्णायक साबित हुआ.
2019 में स्वतंत्रता के बाद भारत के सबसे महत्वाकांक्षी सैन्य सुधार के रूप में घोषित थिएटराइजेशन योजना का मकसद बेहतर तालमेल के लिए तीनों सेनाओं को एक साथ जोड़ना है.
प्रस्तावित ढांचे में तीन एकीकृत कमांड बनाने की योजना थी: चीन पर ध्यान देने के लिए लखनऊ में उत्तरी थिएटर कमांड, पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए जयपुर में पश्चिमी थिएटर कमांड और तिरुवनंतपुरम में समुद्री थिएटर कमांड.
हालांकि, प्रस्तावित कमांड के ढांचे को लेकर तीनों सेनाओं के बीच अलग-अलग राय होने के कारण इस योजना पर आगे काम रुक गया है. वायुसेना लगातार चेतावनी देती रही है कि इस योजना को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए. प्रस्तावित ढांचे के तहत अपने लड़ाकू विमान स्क्वाड्रनों को बांटने को लेकर भी वायुसेना को गंभीर आपत्तियां हैं.
वायुसेना प्रमुख ने कहा, “दुनिया भर में हाल के संघर्षों ने एक बार फिर दिखाया है कि हवाई ताकत सैन्य नतीजों को कितने निर्णायक तरीके से प्रभावित कर सकती है. यही वजह है कि हवाई ताकत को किस तरह व्यवस्थित किया जाता है, यह सवाल बहुत मायने रखता है.”
उन्होंने कहा, “हम थिएटराइजेशन को लड़ाकू विमानों को भौगोलिक क्षेत्रों के हिसाब से स्थायी रूप से बांटने की कवायद के रूप में नहीं देख रहे हैं. वायुसेना तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और एकीकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.” उन्होंने इस परियोजना को लेकर वायुसेना का नजरिया भी बताया.
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि असली सवाल यह है कि एकीकृत ढांचे के भीतर हवाई ताकत का सबसे बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जाए. उन्होंने कहा कि हवाई ताकत की सबसे बड़ी खूबियां इसकी गति, दूर तक पहुंचने की क्षमता, लचीलापन और जरूरत के समय किसी अहम जगह पर तेजी से लड़ाकू ताकत जुटाने की क्षमता हैं.
उन्होंने कहा, “किसी विमान का महत्व सिर्फ उस भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं होता, जहां से वह उड़ान भरता है. हवा में ईंधन भरने, लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों, आपस में जुड़े सेंसर और सही ठिकानों की मदद से हवाई ताकत को काफी दूर से एक जगह जुटाया जा सकता है और खतरे के बदलने के साथ उसे एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भेजा जा सकता है.”
उन्होंने कहा, “इसलिए मुख्य सिद्धांत यह होना चाहिए कि जहां जरूरी हो, वहां नियंत्रण केंद्रीकृत रहे और जहां उचित हो, वहां काम करने की जिम्मेदारी विकेंद्रीकृत हो. इससे हवाई ताकत को उस जगह केंद्रित किया जा सकेगा, जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. साथ ही, कमांडरों के पास जमीन पर तेजी से कार्रवाई करने की आजादी भी बनी रहेगी.”
इसके बाद वायुसेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संयुक्त ढांचे से किस तरह मनचाहे नतीजे मिले.
उन्होंने कहा, “हमारा अपना अनुभव भी इस बात को साबित करता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुखों की ओर से बनाए गए संयुक्त ढांचे के तहत, अहम संसाधनों का केंद्रीकृत आवंटन और समय पर उनका दोबारा आवंटन अभियान के नतीजे तय करने में निर्णायक साबित हुआ.”
उन्होंने कहा, “मैंने अभी जिस तीनों सेनाओं की साझा हवाई तस्वीर का जिक्र किया, उसी की वजह से संसाधनों का इस तरह तेजी से और जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करना संभव हुआ.”
एयर चीफ मार्शल सिंह ने भविष्य के युद्धक्षेत्र के बारे में जरूरत से ज्यादा निश्चितता के साथ अनुमान लगाने के जाल से बचने की भी अपील की.
उन्होंने कहा, “भविष्य के ढांचे तैयार करते समय हमें युद्धक्षेत्र के बारे में जरूरत से ज्यादा निश्चितता के साथ अनुमान लगाने के जाल से भी बचना चाहिए. हम इतना अनुमान लगा सकते हैं कि अगला संघर्ष शायद ज्यादा तेज होगा, उसमें स्वचालित प्रणालियों का इस्तेमाल ज्यादा होगा और नेटवर्क पर निर्भरता भी बढ़ेगी. युद्धक्षेत्र ज्यादा पारदर्शी होने के साथ-साथ ज्यादा भ्रामक भी होगा. कुछ मामलों में हमले ज्यादा सटीक होंगे, जबकि कुछ मामलों में बड़े पैमाने पर ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा.”
उन्होंने कहा, “हमारे ढांचे ऐसे बदलावों को अपनाने में सक्षम होने चाहिए. उनका आकलन भारत की खास सुरक्षा जरूरतों के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि दूसरे देशों के मॉडलों की नकल करके उन्हें बनाया जाना चाहिए. इसकी वजह यह है कि हर देश की अपनी रणनीतिक, भौगोलिक, तकनीकी और सैन्य परिस्थितियां होती हैं.”
उन्होंने कहा, “इतने बड़े बदलाव को चरणों में लागू किया जाना चाहिए, ताकि अभियान चलाने की तैयारी पर कभी असर न पड़े.”
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना इस राष्ट्रीय प्रयास में पूरी तरह भागीदार है. उन्होंने कहा, “हम अपनी सहयोगी सेनाओं के साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि ऐसा ढांचा बनाया जा सके जो पूरी तरह भारतीय हो, हवाई ताकत के स्वाभाविक लचीलेपन को बनाए रखे और यह सुनिश्चित करे कि भारत भविष्य के युद्ध एकजुट होकर लड़े.”
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य के संघर्ष अपने स्वभाव से ही कई क्षेत्रों में एक साथ लड़े जाएंगे. ऐसे में तीनों सेनाएं पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा करीब से मिलकर योजना बनाएंगी और काम करेंगी.
थिएटराइजेशन मॉडल के तहत सरकार का लक्ष्य सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमताओं को एक साथ जोड़ना और युद्धों तथा अभियानों में उनके संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है.
थिएटराइजेशन योजना के मुताबिक, हर थिएटर कमांड में सेना, नौसेना और वायुसेना की इकाइयां होंगी. ये सभी एक इकाई के रूप में काम करेंगी और एक तय भौगोलिक क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करेंगी.
फिलहाल, सेना, नौसेना और वायुसेना की अलग-अलग कमांड हैं.
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने थिएटराइजेशन योजना पर एक विस्तृत प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा था. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि रक्षा मंत्रालय उस रिपोर्ट के मुताबिक थिएटराइजेशन योजना को आगे बढ़ा रहा है या नहीं.
मौजूदा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के बारे में माना जा रहा है कि वह थिएटराइजेशन की पूरी योजना के अहम पहलुओं पर ध्यान दे रहे हैं.
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