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Saturday, 24 October, 2026
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दुर्गा पूजा के बाद तारिक रहमान की असली परीक्षा—हसीना की वापसी, हिंदू वोट और इस्लामवादियों के फरमान

प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने इस दुर्गा पूजा पर देश के हिंदू समुदाय को खुश किया है. अब इस नए हिंदू वोट बैंक को अपने साथ बनाए रखने के लिए उन्हें और काम करना होगा. उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना की जल्द होने वाली वापसी, इस्लामी कट्टरपंथियों के फरमान और विपक्षी दल उनके सामने बड़ी चुनौतियां हैं.

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हर बंगाली हिंदू के लिए दुर्गा पूजा के सालाना उत्सव से ज्यादा खुशी की बात शायद ही कुछ हो. चाहे भारत की पूर्वी सीमा पर पश्चिम बंगाल हो या सीमा के दूसरी तरफ मुस्लिम बहुल बांग्लादेश, महाषष्ठी से लेकर विजयादशमी तक चलने वाला यह पांच दिन का त्योहार लाखों लोगों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. इस दौरान दस हाथों वाली देवी के धरती पर आने का उत्सव मनाया जाता है.

इस साल फरवरी में बांग्लादेश की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यह पहली दुर्गा पूजा थी. ऐसा लगता है कि उन्होंने देश के हिंदू समुदाय को खुश किया है और उनके विरोधियों ने भी उनकी तारीफ की है.

हालांकि, इस नए हिंदू वोट बैंक को अपने साथ बनाए रखना उनके लिए आसान नहीं होगा. उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना की जल्द होने वाली वापसी, दूसरे धर्मों को मानने वालों के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों के परेशान करने वाले फरमान और अल्पसंख्यकों को ज्यादा सुविधाएं देने का वादा कर रहे विपक्षी दल उनके सामने चुनौती होंगे.

शानदार दुर्गा पूजा

पूरे बांग्लादेश में कुल 33,851 पूजा पंडाल बनाए गए थे, जिनमें राजधानी ढाका में 258 पंडाल शामिल थे. तारिक रहमान की सरकार ने पिछले साल के मुकाबले इस साल दुर्गा पूजा के पंडालों की संख्या करीब 1,500 बढ़ा दी.

त्योहार के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे बांग्लादेश में पूजा पंडालों पर अलग-अलग कानून लागू करने वाली एजेंसियों के जवान तैनात किए गए. द ढाका ट्रिब्यून ने बताया कि सहायक अर्धसैनिक बल, बांग्लादेश अंसार और विलेज डिफेंस पार्टी के 2,12,118 जवानों को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था.

हर ज्यादा खतरे वाले मंडप पर आठ जवान और बाकी मंडपों पर छह-छह जवान तैनात किए गए. परेशानी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए 104 और स्ट्राइकिंग टीमों को तैयार रखा गया था.

बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने भी 18 बेस कैंप बनाए और गश्त बढ़ा दी. इसका मकसद देश की सीमाओं से आठ किलोमीटर के अंदर बने करीब 1,800 पूजा मंडपों की सुरक्षा करना था.

तारिक रहमान की सरकार ने दुर्गा पूजा के लिए 20 से 22 अक्टूबर तक तीन दिन की छुट्टी भी घोषित की. 23 और 24 अक्टूबर को बांग्लादेश में शुक्रवार और शनिवार होने के कारण पहले से छुट्टी थी. इस तरह छुट्टी 20 से 24 अक्टूबर तक कुल पांच दिन की हो गई.

सुरक्षा इंतजामों के अलावा, बांग्लादेश के शहरों और कस्बों में बने पूजा पंडालों की भव्यता ने सोशल मीडिया पर भी उत्साह पैदा किया. इन्फ्लुएंसर डेनियल अफजलुर रहमान ने लिखा कि उन्होंने बांग्लादेश में इतनी भव्यता और उत्साह के साथ दुर्गा पूजा मनाते हुए पहले कभी नहीं देखा.

रहमान ने फेसबुक पर लिखा, “याद है, जब हम ऐसे बांग्लादेश में बड़े हो रहे थे, जिसे एक तरह से त्योहारों की धरती के रूप में जाना जाता था. यह देखकर अच्छा लग रहा है कि हम अपने असली रूप से फिर जुड़ रहे हैं. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह सिलसिला जारी रहे, ताकि आने वाले वर्षों में इससे भी बड़े और बेहतर तरीके से त्योहार मनाए जा सकें.”

उन्होंने आगे कहा कि इसके साफ फायदे के अलावा, ये उत्सव बांग्लादेश को एक सॉफ्ट पावर बनाने में भी मदद करेंगे.

द डेली वादा ने बताया कि इस साल के उत्सवों की लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने तारीफ की. उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को इस बात का श्रेय दिया कि उन्होंने हिंदू समुदाय को बिना किसी बड़ी परेशानी के अपना सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार मनाने में मदद की.

अखबार ने बताया, “लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता सादिकुर रहमान खान, फिल्म निर्माता मोस्तोफा सरवर फारूकी और लेखक फहम अब्दुस सलाम ने इन उत्सवों का स्वागत किया. उन्होंने इसे पिछले वर्षों में त्योहार के आसपास बने डर और अनिश्चितता के माहौल से एक बड़ा बदलाव बताया.”

लेख में सामाजिक कार्यकर्ता सादिकुर रहमान खान के हवाले से कहा गया कि बांग्लादेश में अवामी लीग के बिना सबसे शांतिपूर्ण दुर्गा पूजा ने यह दिखा दिया है कि हिंदुओं के असली दुश्मन कौन हैं.

रिपोर्ट में कहा गया, “सादिकुर ने पूर्व सत्ताधारी पार्टी पर सांप्रदायिक तनाव का इस्तेमाल करके खुद को हिंदू समुदाय का एकमात्र रक्षक दिखाने का आरोप लगाया.”

शायद तारिक रहमान सरकार की सबसे खास और सबसे ज्यादा साझा की गई तारीफ कोलकाता के पत्रकार, इन्फ्लुएंसर और प्राइम-टाइम टीवी होस्ट मयुख रंजन घोष की ओर से आई. अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से वह बांग्लादेश में हिंदुओं पर होने वाले हमलों को लेकर लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं.

घोष ने फेसबुक पर वायरल पोस्ट में लिखा, “इस साल बांग्लादेश में दुर्गा पूजा शानदार रही है. बांग्लादेश, आपको सलाम. इस साल चटगांव के पूजा पंडालों की भव्यता देखकर मैं हैरान हूं. जो लोग कोलकाता के पूजा पंडालों को पुरस्कार देते हैं, उन्हें चटगांव के पंडालों के लिए भी अलग पुरस्कार रखने चाहिए. ट्रॉफियां कुरियर सेवा से भेज देना.”

अल्पसंख्यकों के मुद्दे अभी भी हल नहीं हुए

जहां शानदार दुर्गा पूजा तारिक रहमान सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, वहीं बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं.

इस महीने की शुरुआत में, त्योहार शुरू होने से पहले, बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के स्थानों पर मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने, मंदिरों पर हमले और हिंसा से जुड़ी कम से कम 34 घटनाएं सामने आई थीं. यह जानकारी दो पूजा समितियों—बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद और महानगर सार्वजनिन पूजा समिति ने दी.

इन संगठनों ने आगे होने वाले हमलों को रोकने और पूरे साल धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की.

बांग्लादेश के हिंदू अधिकार कार्यकर्ता जयंता कर्मकार ने दिप्रिंट को बताया कि गांवों के स्तर पर हुजूर और दूसरे इस्लामी धर्म प्रचारक इस साल भी मूर्ति पूजा के खिलाफ बोलते रहे हैं. वे इसे “हराम” बताते रहे और मुसलमानों से दुर्गा पूजा के कार्यक्रमों में शामिल न होने की अपील करते रहे.

कर्मकार ने कहा, “तारिक रहमान के सत्ता में आने के बाद भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले जारी हैं. शानदार दुर्गा पूजा से जमीन पर हिंदुओं की स्थिति नहीं बदल जाती. सरकार को उन इस्लामी धर्म प्रचारकों के खिलाफ कुछ करना चाहिए, जो हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाते रहते हैं.”

हिंदू वोट और आगे की लड़ाई

फरवरी में हुए राष्ट्रीय चुनाव में बांग्लादेश के हिंदुओं ने बड़ी संख्या में तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को वोट दिया. उन्होंने शेख हसीना की बांग्लादेश अवामी लीग की गैरमौजूदगी में देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी को सत्ता से दूर रखने के लिए बीएनपी को वोट दिया.

हालांकि, सफल दुर्गा पूजा से फिलहाल रहमान के हिंदू मतदाता खुश हो गए होंगे, लेकिन हसीना की संभावित वापसी से उनकी राजनीतिक पसंद बदल सकती है.

अगर हसीना अपने वादे के मुताबिक बांग्लादेश लौटती हैं, तो यह देखना होगा कि क्या हिंदू मतदाता रहमान की पार्टी से अपना समर्थन हटाकर अवामी लीग की ओर चले जाते हैं. अवामी लीग ही उनकी पहले की पसंद की पार्टी रही है.

इस बीच, नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के एक बड़े नेता के बयान ने भी चर्चा शुरू कर दी है. यह पार्टी जुलाई 2024 के आंदोलन से सामने आए छात्र नेताओं ने बनाई थी. नेता ने त्योहार के दौरान ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में यह बयान दिया.

नासिरुद्दीन पटवारी ने मंदिर समिति के सदस्यों से कहा कि अगर वह सत्ता में आए, तो वह मंदिर की उस जमीन को वापस दिलाने में मदद करेंगे, जिस पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है. मंदिर समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज करीब आठ एकड़ मंदिर की जमीन में से लगभग 5.6 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है.

पटवारी के इस वादे ने कुछ बांग्लादेशी हिंदुओं की भावनाओं को छुआ है.

अगला चुनाव आने पर रहमान को हिंदू वोट अपने साथ बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है. फिलहाल, हालांकि, शानदार और बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण रही दुर्गा पूजा ने अल्पसंख्यकों को लेकर प्रधानमंत्री की सरकार के रवैये की एक अहम परीक्षा पास करने में मदद की है.

दीप हलदर दिप्रिंट में एक लेखक और कंट्रीब्यूटिंग एडिटर हैं. उनका एक्स हैंडल @deepscribble है. यह लेख उनके निजी विचार हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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