नई दिल्ली: पाकिस्तान सेना ने अपने वरिष्ठ कमांड ढांचे में बदलाव किया है. कई मेजर जनरलों को लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर प्रमोट किया गया है. इसके साथ ही कोर कमांडर स्तर के अहम पदों पर नई नियुक्तियां भी की गई हैं.
यह जानकारी 2 अक्टूबर को रावलपिंडी में हुई 277वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद सार्वजनिक की गई.
विश्लेषक पाकिस्तान के अंदरूनी राजनीतिक और सुरक्षा हालात और भारत के प्रति पाकिस्तान सेना के रुख पर इसके संभावित असर को देख रहे हैं. हालांकि, ज्यादातर नियुक्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी पसंद के आधार पर अधिकारियों को चुना है, यह कोई हैरानी की बात नहीं है. हर सेना प्रमुख ऐसा करने की कोशिश करता है.
मुनीर के कोर कमांडर
11 कोर, पेशावर के लिए आज़ाद कश्मीर रेजिमेंट के मोहम्मद नईम अख्तर को चुना गया है. उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल उमर अहमद बुखारी की जगह ली है, जो 22 बलूच रेजिमेंट से हैं. बुखारी को अब चीफ ऑफ जनरल स्टाफ का पद दिया गया है. सेना प्रमुख यानी सीओएएस के बाद यह सबसे अहम पदों में से एक माना जाता है.
पेशावर स्थित 11वीं कोर पर करीब से नज़र रखी जाती है. इसकी वजह यह है कि यह सेना की अहम फील्ड फॉर्मेशन में शामिल है और इसका नेतृत्व करने वाले अधिकारी आमतौर पर सार्वजनिक जीवन में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. यहां गतिविधियां भी ज्यादा होती हैं. यह आईएसआई के साथ ज्यादा करीबी तालमेल रखती है और नागरिक मामलों में भी इसकी भूमिका ज्यादा है, क्योंकि इसका कमांडर खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय एपेक्स कमेटी में शामिल होता है. इसलिए यह माना जाता है कि इस कोर का नेतृत्व करने के लिए चुने गए अधिकारियों को भविष्य में बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाता है.
फील्ड मार्शल मुनीर ने आर्टिलरी से जुड़े उमर बशीर को 4 कोर, लाहौर का कोर कमांडर बनाया है.
मुनीर ने आर्मर्ड कोर के लेफ्टिनेंट जनरल शकीरुल्लाह खट्टक (13 लांसर्स) को नया मंगला कोर कमांडर बनाया है. वह इससे पहले हेवी इंडस्ट्रीज, टैक्सिला के चेयरमैन थे. मंगला को 1 कोर भी कहा जाता है. यह नियुक्ति हाल में वहां आर्मर्ड कोर या आर्टिलरी के अधिकारियों को भेजने की परंपरा के बाद हुई है.
खट्टक लेफ्टिनेंट जनरल नौमान जकारिया की जगह लेंगे, जो खुद भी आर्मर्ड कोर के अधिकारी थे. 1 कोर के कमांडर रहते हुए जकारिया नई बनाई गई आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड यानी एआरएफसी का भी नेतृत्व कर रहे थे. इसकी घोषणा प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने अगस्त 2025 में की थी. इस साल मई में सिंगापुर में हुए शांगरी-ला डायलॉग में जकारिया सुर्खियों में आए थे. हालांकि, वह 1 कोर छोड़ रहे हैं, लेकिन एआरएफसी में कमांड बदलने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
मंगला कोर पाकिस्तान की पूर्वी सीमा यानी भारत से जुड़ी सीमा की जिम्मेदारी संभालती है. ऐतिहासिक रूप से इसके तहत तीन इन्फैंट्री डिवीजन और एक आर्मर्ड डिवीजन रहे हैं. ये जेहलम, खारियां और मंगला में तैनात हैं.
आर एंड एडब्ल्यू में पाकिस्तान डेस्क के प्रमुख रहे राणा बनर्जी ने सितंबर 2013 की एक रिपोर्ट में लिखा था, “2003 में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर युद्धविराम के बाद, इनमें से एक डिवीजन को कुछ समय के लिए पश्चिमी क्षेत्र में तैनात किया गया था. इसका उद्देश्य 11 कोर, पेशावर की मदद करना था, जो स्वात और फाटा में आदिवासी विद्रोह के खिलाफ आतंकवाद रोधी अभियान चला रही थी.”
फिलहाल मंगला कोर के पास इन्फैंट्री और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री डिवीजन के साथ उसके आर्मर्ड यूनिट भी हैं.
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने 19 सिंध रेजिमेंट के मोहम्मद आमेर नजम को 2 कोर, मुल्तान का कोर कमांडर नियुक्त किया है. वह इससे पहले जनरल हेडक्वार्टर्स में इंस्पेक्टर जनरल, ट्रेनिंग एंड इवैल्यूएशन के पद पर थे. 1 कोर मंगला और 2 कोर मुल्तान मिलकर पाकिस्तान सेना की स्ट्राइक कोर बनाते हैं.
फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट जनरल इनायत हुसैन को 12 कोर, क्वेटा का नया कोर कमांडर बनाया गया है. वह इससे पहले जीएचक्यू में चीफ ऑफ लॉजिस्टिक्स स्टाफ के पद पर थे. यह नियुक्ति फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने की है.
कोर कमांडर स्तर समेत थ्री-स्टार अधिकारियों की नियुक्तियों में सेना प्रमुख सभी प्रमुख सैन्य शाखाओं यानी आर्मर्ड कोर, इन्फैंट्री, आर्टिलरी, इंजीनियर्स और एयर डिफेंस को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश करते हैं. इसका उद्देश्य सेना के भीतर संस्थागत संतुलन और एकता बनाए रखना है.
थ्री-स्टार रैंक वाले कभी रिटायर नहीं होते
रेडिफ के लिए राणा बनर्जी के कॉलम के मुताबिक, पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी के 80वें लॉन्ग कोर्स के कम से कम छह लेफ्टिनेंट जनरल, जिन्हें इस रैंक पर चार साल पूरे करने के बाद रिटायर होना था, अब धीरे-धीरे पद से हटाए जा सकते हैं.
इनमें लेफ्टिनेंट जनरल इनाम हैदर मलिक (इंजीनियर्स, चेयरमैन, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी) और लेफ्टिनेंट जनरल फैयाज हुसैन शाह (सिंध रेजिमेंट, कोर कमांडर, 4 कोर, लाहौर), लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद जफर इकबाल (एयर डिफेंस, कमांडर, एयर डिफेंस कमांड, रावलपिंडी), लेफ्टिनेंट जनरल शाहिद इम्तियाज (आजाद कश्मीर रेजिमेंट, मिलिट्री सेक्रेटरी), लेफ्टिनेंट जनरल अहसान गुलरेज (फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट, कोर कमांडर, 2 कोर, मुल्तान) और लेफ्टिनेंट जनरल नौमान जकारिया (आर्मर्ड कोर, कोर कमांडर, 1 कोर, मंगला) शामिल हैं.
औपचारिक तौर पर पाकिस्तान में थ्री-स्टार जनरल रिटायर होते हैं, लेकिन असल में रिटायरमेंट का मतलब सेना के प्रभाव से पूरी तरह बाहर होना नहीं है. वे सिर्फ जनरल हेडक्वार्टर (जीएचक्यू), रावलपिंडी से बाहर जाते हैं और ऐसी जगहों पर पद संभालते हैं, जिनकी दिशा जीएचक्यू की हाई कमांड तय करती रहती है.
लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद (रिटायर्ड) का उदाहरण लें, जिन्हें सितंबर 2026 में मक्का डिफेंस अलायंस का पहला सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया गया. उन्होंने इससे पहले 11 कोर, पेशावर की कमान संभाली थी. उनका कार्यकाल पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा के सबसे संवेदनशील दौर में रहा था, जब अमेरिका अफगानिस्तान से बाहर निकल रहा था.
पॉल स्टैनिलैंड और उनके साथियों की 2018 की एक स्टडी बताती है कि रिटायर्ड कोर कमांडर बहुत कम ही चुनावी राजनीति में जाते हैं. इसमें कहा गया है कि एक “संस्थागत व्यवस्था है, जो रिटायर हो चुके प्रभावशाली लोगों को सेना के स्वामित्व वाली चैरिटेबल फाउंडेशन और उससे जुड़ी कंपनियों, सिविल सरकार में पदों और वास्तविक और/या प्रतीकात्मक अधिकार वाली दूसरी जगहों पर भेजती है.”
स्टडी में आगे कहा गया है कि इन पदों को “ऑफ-रैंप्स” कहा जाता है. ये पद अधिकारियों को नौकरी के दौरान संगठन की लाइन पर चलने और रिटायरमेंट के बाद सीधे राजनीति में शामिल होने से बचने के लिए मजबूत प्रोत्साहन देते हैं. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि ज्यादातर पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के लिए उनका पहला कोर कमांड ही उनका आखिरी बड़ा कमांड होता है.
वॉटर एंड पावर डेवलपमेंट अथॉरिटी (वापडा) इसका एक उदाहरण है. इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद सईद करते हैं, जो पहले सीजीएस और 5-कोर, कराची के कोर कमांडर रह चुके हैं. यहां तक कि पाकिस्तान की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) का नेतृत्व भी कमोबेश थ्री-स्टार स्तर के अधिकारी के पास रहा है.
हालांकि, रिटायरमेंट के बाद सबसे आम रास्ता सेना के नेतृत्व वाली और सेना के लिए काम करने वाली फाउंडेशन और उनसे जुड़ी कंपनियों में जाना है. इनमें फौजी फाउंडेशन और उसकी सहायक कंपनियां, आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट और डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी शामिल हैं.
आयशा सिद्दीका ने अपनी चर्चित किताब मिलिट्री इंक. में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में सेना की गहरी मौजूदगी को ‘मिलबस’ (मिलिट्री-बिजनेस) नाम दिया था.
फौजी फाउंडेशन का नेतृत्व रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अनवर अली हैदर करते हैं. डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (डीएचए) की गवर्निंग बॉडी की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद अली (रिटायर्ड) करते हैं. वह डिफेंस मिनिस्ट्री में सेक्रेटरी डिफेंस भी हैं. डीएचए सेना के लोगों के लिए बेहतर आवास देने के लिए रियल एस्टेट के काम के लिए जमीन खरीदता है. इसी वजह से पाकिस्तान की सेना को पाकिस्तान का “सबसे बड़ा जमीन हड़पने वाला” भी कहा गया है.
थ्री-स्टार जनरलों के रिटायरमेंट के बाद के सफर से यह बात और मजबूत होती है कि पाकिस्तान ऐसी राज्य व्यवस्था नहीं है, जिसके पास एक सेना है, बल्कि उसकी सेना के पास अपना एक राज्य है.
पाकिस्तान के खुफिया प्रमुख
पिछले महीने दिप्रिंट ने पाकिस्तान सेना में टू-स्टार स्तर पर की गई नई नियुक्तियों की एक सीरीज पर रिपोर्ट की थी. इनमें सबसे अहम बदलाव डायरेक्टर जनरल-मिलिट्री इंटेलिजेंस (डीजी-एमआई) के पद पर हुआ था. अब यह जिम्मेदारी मेजर जनरल आदिल इफ्तिखार वाराइच को दी गई है.
यह पद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आगे बढ़ने का एक रास्ता है. इसकी वजह यह है कि आम तौर पर डीजी-एमआई आगे चलकर आईएसआई के प्रमुख बनते हैं. मौजूदा सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर इसका उदाहरण हैं. वह पहले एमआई और आईएसआई दोनों के प्रमुख रह चुके हैं और बाद में सेना प्रमुख के सबसे बड़े पद तक पहुंचे.
अगर पिछले महीने डीजी-एमआई की नियुक्ति अहम थी, तो डीजी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक को दिया गया एक साल का एक्सटेंशन भी खास है. वह सितंबर 2024 से इस पद पर काम कर रहे हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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