अरावली के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा अतिक्रमण हटाने का अभियान इस साल जून में शुरू हुआ. इसके साथ ही, दिल्ली-एनसीआर की मशहूर फार्महाउस संस्कृति भी तेज़ी से खत्म हो रही है. अभी आगे और भी काम बाकी है.
प्राडा अब महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पास स्थित हुपरी के चांदी की पायल बनाने वाले कारीगरों के साथ साझेदारी पर ‘विचार’ कर रहा है. चांदी के दाम बढ़ने और पायल के फैशन से बाहर होने के बीच, कारीगर उम्मीद कर रहे हैं कि यह फैशन रैंप के जरिए दोबारा लोकप्रिय हो सकेगी.
भारत बार-बार ‘महाशक्ति’ के भ्रमजाल में फंस जाता है. सोचिए 1950 का दशक, जब नई दिल्ली ने अपनी असल संभावनाओं को वास्तविक शक्ति समझ लिया और 1962 में चीन ने उसे ज़मीन पर ला दिया.
क्लब का नाम बदलकर ‘डीडीए रोशनारा क्लब’ कर दिया गया. और इसने अपने खास और ईलीट को भी छोड़ दिया है. अब यह संघ, जो पहले केवल उत्तर दिल्ली के चुनिंदा सदस्यों तक सीमित था, सभी के लिए खुला है.
कभी ग्रामीण विकास के मॉडल के रूप में सराहा गया चंपटिया स्टार्टअप ऑर्डर घटने और फंड की कमी से खत्म हो रहा है. मुजफ्फरपुर का दूसरा क्लस्टर थोड़ी उम्मीद दिखा रहा है.
स्क्रूवॉर्म ने दशकों में पनामा में बनाई गई जैविक दीवार को तोड़ दिया है. यह कीड़ा लगातार उत्तर की ओर बढ़ रहा है—जिसमें ट्रंप की कमजोर विदेश नीति मदद कर रही है.