बेगूसराय में महागठबंधन से तनवीर हसन, सीपीआई से कन्हैया कुमार और भाजपा से गिरिराज सिंह आमने-सामने हैं. यह केवल चुनाव ही नहीं बल्कि विचारधाराओं की लड़ाई है.
शाह संघवी हाईस्कूल में बीजेपी के बूथ प्रभारी थे, उनके कनिष्ठ सहयोगी आडवाणी की जीत सुनिश्चित कराने के लिए उनके द्वारा की गई कड़ी मेहनत को याद कर रहे हैं.
हिमाचल के सेब उत्पादक किसानों ने 22 अप्रैल को विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है. उन्हें डर है कि कांग्रेस और भाजपा के चुनाव अभियानों में राष्ट्रीय मुद्दों के हावी होने के कारण उनकी समस्याओं को भुला दिया जाएगा.
आम चुनाव की ग्राउंड रिपोर्टिंग में दिप्रिंट की टीम को बेगूसराय में राजनीति के कई रंग दिखे. जेएनयू में 'आजादी' के नारों पर विवाद यहां बहस के केंद्र में है.
पीएम ने व्यापारियों के लिए किये कामों को गिनाया और भविष्य में उनके लिए बनाई जाने वाली योजनाओं को बताया. साथ कांग्रेस को व्यापारियों को परेशान करने वाली सरकार बताया.
अवामी लीग को अभी इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि ज़मीन पर नया नेतृत्व चाहिए.
नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सोमवार को निर्माण एवं अवसंरचना कंपनी दिलीप बिल्डकॉन के खिलाफ दायर...