केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद वाराणसी, गोरखपुर व उसके आस-पास के जिलों के बुनकरों में उम्मीद जगी थी कि इन इलाकों में व्यापार चमक उठेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
1984 में हुआ तो हुआ कहने के बाद भारतीय जनता पार्टी की जबर्दस्त खिंचाई हुई जिसके बाद पित्रोदा ने न केवल माफी मांगी है बल्कि बयान को तोड़ने मरोड़ने का आरोप भी गलाया है.
बिहार के कई दिग्गज नेता इस बार के चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बता कर या फिर क्षेत्र विशेष से अपने संबंधों की दुहाई देकर मतदाताओं को भावनात्मक तौर पर रिझाने का प्रयास कर रहे हैं.
मायावती को बताना होगा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के दलितों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में कब और कौन सी पहल की? मायावती ने अपने चार बार के मुख्यमंत्री काल में मुसलमानों का कितना कल्याण किया.
प्रवासी भारतीय सम्मेलन से लेकर कुंभ मेलों तक, भारत ने दिखाया है कि वह जटिल आयोजनों का प्रबंधन कर सकता है. इस क्षमता को बाद में उसके G20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक मंच पर भी मजबूती मिली.