भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा के विवादित बयान के बाद मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा से कांग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी ने उन्हें जला कर मारने की धमकी दी थी. दांगी ने अब अपने बयान पर माफी भी मांग ली है.
नागरिकता अधिनियम 1955 में प्रस्तावित संशोधन पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के हिन्दुओं, सिखों, बौद्ध, जैन, पारसियों और ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने की बात कहता है, भले ही उनके पास उचित दस्तावेज न हों.
शुक्रवार को सदन में साध्वी ने लोकसभा में माफी मांगी थी. उन्होंने कहा था कि, 'अगर मेरे बयान से किसी की भावना को चोट पहुंची है तो मैं खेद प्रकट करती हूं.
प्रज्ञा ने कहा, 'मेरे द्वारा तत्कालीन सरकार द्वारा जिस तरह से आरोप प्रत्यारोप जड़ा गया वह सभी बेबुनियाद है. एक महिला का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया. मुझे आतंकी कहा गया और यह एक महिला का अपमान है.'
जिन लोगों को शिवसेना के अतीत की जानकारी है उनके लिए उग्र हिंदुत्व की राजनीति के लिए जाने जानी वाली पार्टी द्वारा कांग्रेस और राकांपा से समर्थन लेना चौंकाने वाला कदम नहीं है.
संविधान के प्रावधानों के अनुसार कोई नेता यदि विधानसभा या विधान परिषद् का सदस्य नहीं है तो उसे पद की शपथ लेने के 6 महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना होता है.