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Sunday, 12 April, 2026
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राजनीति

अमेठी और रायबरेली की ‘घरेलू’ सीट बचा पाने में नाकाम रही कांग्रेस

गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाली सीटों पर कांग्रेस को 2017 में 10 में से दो सीटें मिली थीं. इस बार उसे शून्य पर संतोष करना पड़ा है. बीजेपी ने पिछली बार छह सीटें पाई थीं. वोटों की गिनती में बीजेपी चार सीटों पर आगे है और सपा छह सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

समाजवादी पार्टी को 2022 में ‘संजीवनी’ की उम्मीद थी लेकिन दोबारा ‘पानी फिर गया’

साल 2014 में, जब मोदी लहर ने लोकसभा चुनावों में भाजपा को भारी जीत दिलाई थी, सपा द्वारा जीती गई सीटें 23 से घटकर सिर्फ 5 पर रह गई थी .

PM Modi बोले- मैं किसी परिवार के खिलाफ नहीं हूं, मुझे लोकतंत्र की चिंता है

पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा पर विश्वास, भाजपा की नीति, भाजपा के निर्णयों पर जनता अपार विश्वास की मुहर लगाई है. पहले जनता अपने अधिकार के लिए बिजली, पानी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटती थी.

क्या 7 प्रमुख राजनीतिक संकेत दे रहे हैं 5 राज्यों के ये विधानसभा चुनाव

मोदी एक ऐसी प्रकांड हस्ती बन गए हैं जैसी भारतीय राजनीति ने कभी नहीं देखी थी, केजरीवाल ने अपनी राजनीति का दम दिखा दिया है, तो योगी भाजपा के नये सितारे के रूप में उभरे हैं जिनकी चालों पर नज़र रखने की जरूरत है.

UP में भारी जीत के बाद योगी आदित्यनाथ BJP के बड़े फैसलों में भी अपनी बात मनवाने के लिए दबाव बना सकते हैं

यूपी की जीत अब सीएम योगी को जरूरी तौर पर आगे बढ़ाएगी, जिससे वे न केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में बल्कि एक वरिष्ठ बीजेपी नेता के रूप में भी महत्त्वपूर्ण मामलों में अपनी बात रख पाएंगे.

जालंधर कैंट के ‘चुनावी ओलंपिक’ ने पंजाब के ट्रेंड को ठुकराया, कांग्रेस के परगट ने AAP के सोढी को हराया

 ज़मीनी स्तर पर बहुत से लोग परगट सिंह से असंतुष्ट नज़र आए लेकिन फिर भी चुनाव क्षेत्र का सुनियोजित विकास करने के उनके वादे को देखते हुए, लोगों ने अपनी आस्था एक अनुभवी राजनेता में रखी.

मेनका और वरुण गांधी को घरेलू मैदान में ‘साइडलाइन’ कर BJP जीत की राह पर

2017 के विधान सभा चुनावों में, बीजेपी ने पीलीभीत की सभी पांच विधान सभा सीटें एक बड़े अंतर से जीत लीं थीं. सुल्तानपुर में उसने पांच में से चार सीटें जीतीं थीं, और सिर्फ इसौली सीट उसने अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (एसपी) के हाथों गंवा दी थी.

ओवैसी की AIMIM फिर हुई UP की परीक्षा में फेल; 97 में से नहीं जीत पाई एक भी सीट, मिले 0.59% वोट

एआईएमआईएम ने 97 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनके भाषणों को लोगों की ‘तारीफ’ तो खूब मिली लेकिन यह वोटों में तब्दील नहीं हुई और मुसलमानों ने सपा पर ही भरोसा जताया.

जाटों का गुस्सा पश्चिम UP में बीजेपी की हार के लिए काफी नहीं, लेकिन RLD, SP को मिली बढ़त

2017 के पिछले विधान सभा चुनावों में, बीजेपी ने यहां से 51 सीटें जीतीं थी, जबकि 2012 में उसे 11 सीटें मिली थीं. 2017 में एसपी ने पश्चिम यूपी से 15 सीटें जीतीं थीं, जबकि कांग्रेस को दो, और आरएलडी तथा बीएसपी को एक- एक सीट मिली थीं.

कैप्टन अमरिंदर, सिद्धू, चन्नी, बादल, धामी, हरीश रावत समेत दिग्गजों ने गंवाई अपनी सीट

दिलचस्प है कि पंजाब में वर्तमान मुख्यमंत्री के साथ पहले के भी सभी मुख्यमंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं. चन्नी के अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला शहरी क्षेत्र, सुखबीर बादल जलालाबाद से चुनाव हार गए हैं.

मत-विमत

दुनिया तेजी से बदल रही है—भारत को खुद को सुधारना, मजबूत करना और आर्थिक ताकत बढ़ानी चाहिए

आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.

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ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी: दो साल का राष्ट्रव्यापी समारोह शुरू हुआ

नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) सरकार ने शनिवार को समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.