भले ही अपनी मज़बूत संगठनात्मक मशीनरी के कारण पार्टी को चुनावों में कोई नुकसान न हो, लेकिन बागियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पार्टी अपने अंदरूनी मामलों को जिस तरह से संभाल रही है, उसमें कोई गहरी समस्या है.
वामपंथी खेमे ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा जल्द करके चुनावी मैदान में ज़ोरदार शुरुआत की है, जिसके चलते UDF को अब उनकी बराबरी करने के लिए तेज़ी दिखानी पड़ रही है. BJP के नज़रिए से, यह चुनाव एक क्वार्टर-फ़ाइनल या सेमी-फ़ाइनल जैसा है.
लोग ज़मीन पर उनकी गैर-मौजूदगी पर सवाल उठा रहे हैं, और कह रहे हैं कि अधीर रंजन के बजाय उन्हें चुनने का उन्हें 'पछतावा' है. हालांकि, यूसुफ़ इस बात को 'गलत' बताते हैं, और कहते हैं कि वह नियमित रूप से आते हैं और अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर रहे हैं.
नेहरू के प्रोत्साहन के बाद भारत ने इज़राइल की सहकारी समितियों को देखा और समझा, जिससे हमारे समाजवादी नेताओं को काफी प्रेरणा मिली और इससे ही खेती-बाड़ी सुधार और गांवों के विकास पर शुरूआती बहसें चल पड़ीं.
BJP नेताओं का कहना है कि विवाद झारखंड के चार बार के सांसद के लिए अपनी मौजूदगी बनाए रखने का एक ज़रिया हैं, जिस से वे संसद के भीतर या बाहर विपक्ष के प्रमुख चेहरों को चुनौती देते हैं.
बीजेपी के घोषणा पत्र में 1950 के कानून का इस्तेमाल कर ‘अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया तेज़’ करने का वादा, ताकि स्थानीय लोगों की जमीन, विरासत और सम्मान की रक्षा हो सके.
सपा प्रमुख ने नाराज़गी को 2024 में संभल में पुलिस-जनता झड़प के दौरान एसएसपी की कथित ‘पक्षपाती भूमिका’ से जोड़ा. पार्टी के निर्देश के बावजूद कुछ सपा नेता जोधपुर की शादी में शामिल हुए.
सांसद, जिन्हें कभी AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता था, पिछले कुछ महीनों में पार्टी के विरोध प्रदर्शनों और अन्य अहम कार्यक्रमों से अनुपस्थित रहे थे.
अशोक मित्तल पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं. पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद रूस, लातविया, स्लोवेनिया, ग्रीस और स्पेन का दौरा करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का वे हिस्सा थे.
शिवसेना नेता ने मजबूरी में महाराष्ट्र के उच्च सदन में प्रवेश किया, संकटों के बीच शासन चलाया, और अपने पीछे एक ऐसा रिकॉर्ड छोड़ा जिसे उनके अपने समर्थक भी एक 'गंवाया हुआ अवसर' करार देते हैं.
आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.