भारत के लिए असली सवाल यह है कि उसने राजनीति को मणिपुर जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों को जातीय संघर्ष में झोंकने की इज़ाज़त क्यों दी है, जिससे एशियाई राजमार्ग 1 को पूरा करने की उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है.
यहां ज़िक्र उस इस्लाम का नहीं जो एक आस्था है, बल्कि उस सियासी इस्लाम का है जहां आस्था मुल्क का मज़हब है और एक राष्ट्र को परिभाषित करता है और/ या उसके ज्यादातर अनिर्वाचित नेताओं को सत्ता में बनाए रखता है.
एक पसमांदा मुस्लिम होने के नाते मैं अक्सर सोचती थी कि भारतीयों को मुस्लिम समुदाय से कम उम्मीदें क्यों हैं, जो उद्धारकर्ता बनने की इच्छा में समस्याग्रस्त परंपराओं का समर्थन करते हैं.
सदियों तक राम को सर्वोच्च देवता नहीं बल्कि एक अर्ध-अलौकिक नायक और आदर्श राजा माना जाता था. 1200 के दशक से ही प्रमुख राम मंदिरों का निर्माण किया गया था.
वाजपेयी के बारे में कहने के लिए इतना कम क्यों है जो कि मेरी नजर में हमारे सबसे अच्छे प्रधानमंत्रियों में से एक हैं? हिंदुत्व को पूरी तरह से अपनाए जाने से इनकार करने के बावजूद वे उन पर हमला नहीं कर सकते क्योंकि वह उनके अपनों में से एक थे. लेकिन वे उनकी तारीफ भी नहीं करते.
डेविड बेन-गुरियन ने 1963 में नेहरू से मिस्र के साथ मध्यस्थता में मदद करने की अपील की. उन्होंने एक पत्र में लिखा था, 'आपकी बातें दुनिया की परिषदों में एक विशेष महत्व रखती है.'
भारत के प्रति मुइज्ज़ू के टकरावपूर्ण रुख का चीनी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से जश्न मनाया जा रहा है. वीबो यूज़र्स इसे चीन की जीत और भारत के लिए प्रतिकूल खबर के तौर पर देख रहे हैं.
सेना की पदोन्नति में भेदभाव की प्रकृति नियमों और प्रक्रियाओं में छिपी हुई है, जिससे इसे नोटिस करना कठिन हो जाता है. जब प्रमोशन बोर्ड के नतीजे घोषित होते हैं तो केवल कुछ ही अधिकारी इसके बारे में अनुभव कर पाते हैं.