पहले हमला झेलना और तब जवाब देना ताकत के इस्तेमाल के बारे में फौजी सोच के संस्कार के विपरीत है. अगर यह ‘फौजी सोच’ भारत के राजनीतिक आकाओं के दिमाग पर हावी हुई, तो भारत एक भ्रम के पीछे ही चल पड़ेगा और यह कोई लाभ नहीं दिलाएगा.
लगभग सभी न्यूज़ चैनलों ने अरविंद केजरीवाल को दोषी ठहराने और दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से उनके इस्तीफे की मांग की. वहीं अखबारों ने केवल न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की टिप्पणियों पर खबरें छापी थीं.
अगर हिंदू धर्म का एक हिस्सा यानी ओबीसी जाति जनगणना की मांग करेगा तो विराट हिंदू एकता के हित में बीजेपी ये ज़हर पी जाएगी. जहर इसलिए क्योंकि उसे मालूम है कि इससे हिंदुओं में जाति की दीवारें और मजबूत हो जा सकती हैं.
मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, मोहम्मद शहाबुद्दीन अपने दम पर सत्ता में नहीं आये; बल्कि, अपने हितों की पूर्ति करने वाले राजनीतिक दलों द्वारा उनका समर्थन किया गया.
विपक्षी दलों को कड़ी चुनौती का एहसास तो है मगर उनके अंदर बातें यही होती हैं कि नरेंद्र मोदी की सीटें कहां-कहां से कम की जा सकती हैं, यह नहीं कि उन्हें सत्ता से कैसे बेदखल किया जा सकता है
मोदी को उस हमाम को बंद करने का श्रेय दिया जाता है जहां हर राजनेता और पार्टी नंगी थी. अब उन्हें चुनावी बॉन्ड पर बात दबाने की राजनीतिक आम सहमति को तोड़ना होगा.
जलपाईगुड़ी बवंडर मुद्दे पर मोदी को भारी नुकसान हुआ. अपने रैली स्थल से बमुश्किल 125 किलोमीटर दूर बवंडर आने के बावजूद उन्होंने इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहा.
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का समय आप के इस आरोप को बल देता है कि भाजपा अपने चुनावी विरोधियों के खिलाफ केंद्र सरकार की एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है.
एक चीज़ जो ट्रांस की खूबसूरती को ज़िंदा रखती है, वह है उनका समुदाय और अपनापन. लेकिन कानून बनाने वालों की नजर में, यह अपनापन ‘धोखा’, ‘लुभाना’ और ‘गलत असर डालना’ बन जाता है.
तिरुवन्नमलई, 30 मार्च (भाषा) तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक)- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)...