मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, मोहम्मद शहाबुद्दीन अपने दम पर सत्ता में नहीं आये; बल्कि, अपने हितों की पूर्ति करने वाले राजनीतिक दलों द्वारा उनका समर्थन किया गया.
विपक्षी दलों को कड़ी चुनौती का एहसास तो है मगर उनके अंदर बातें यही होती हैं कि नरेंद्र मोदी की सीटें कहां-कहां से कम की जा सकती हैं, यह नहीं कि उन्हें सत्ता से कैसे बेदखल किया जा सकता है
मोदी को उस हमाम को बंद करने का श्रेय दिया जाता है जहां हर राजनेता और पार्टी नंगी थी. अब उन्हें चुनावी बॉन्ड पर बात दबाने की राजनीतिक आम सहमति को तोड़ना होगा.
जलपाईगुड़ी बवंडर मुद्दे पर मोदी को भारी नुकसान हुआ. अपने रैली स्थल से बमुश्किल 125 किलोमीटर दूर बवंडर आने के बावजूद उन्होंने इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहा.
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का समय आप के इस आरोप को बल देता है कि भाजपा अपने चुनावी विरोधियों के खिलाफ केंद्र सरकार की एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है.
सेना के कई सेवानिवृत्त अधिकारी अपनी नेतृत्व क्षमता और अपने अनुभवों के बूते राजनीति के क्षेत्र में सफल हुए हैं. यह समाज और फौजी बिरादरी के लिए भी गर्व का विषय होना चाहिए
हम एक ऐसी विकट स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं जब चुनाव तो नियमित अंतराल पर होंगे, लेकिन उसमें वोटिंग मशीन का बटन दबाने को छोड़ कर और कुछ भी मुक्त नहीं होगा और वोटों की गिनती को छोड़कर और कुछ भी निष्पक्ष नहीं होगा.