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Sunday, 29 March, 2026
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इस्लाम लोकतंत्र का दुश्मन नहीं है, दिक्कत तब होती है जब सेना के साथ धर्म का गठजोड़ हो जाता है

इंडोनेशिया, मलेशिया, तुर्की, श्रीलंका इस्लाम या बौद्ध धर्म की प्रमुखता के बावजूद संवैधानिक, लोकतांत्रिक और स्थिर व्यवस्था में कैसे बने रहे लेकिन पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार ऐसा क्यों नहीं कर पाए?

भारत में 50 फीसदी महिलाएं हैं एनीमिया से पीड़ित, उनमें सेहत की समझ बढ़ाना ज़रूरी: शबाना आज़मी

भारतीय महिलाएं अक्सर परिवार के बाकी सदस्यों द्वारा पौष्टिक भोजन खा लेने के बाद सबसे आखिर में खाना खाती हैं. इससे पीढ़ी दर पीढ़ी एनीमिया का चक्र चलता रहता है.

अफगानिस्तान की महिलाओं के लिए पूरी दुनिया को आगे आना होगा, यह सभी महिलाओं के लिए चिंता की बात है

मेरिल स्ट्रीप के भाषण से एक महत्वपूर्ण सबक यह लिया जा सकता है कि पश्चिम में एक शक्तिशाली महिला अपने प्रभाव का इस्तेमाल उत्पीड़न का शिकार मुस्लिम महिलाओं के उत्थान के लिए कर सकती है.

एनकाउंटर में अक्षय शिंदे की हत्या पर हमें नाराज़गी क्यों नहीं हैं? हमें जवाब क्यों नहीं चाहिए

जब पुलिस को दोषी ठहराए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को मारने देने का सिद्धांत मध्यम वर्ग के लोगों की हत्या तक विस्तृत हो जाता है, तो जनता की प्रतिक्रिया अचानक बहुत अलग हो जाती है.

‘मुद्दों से ध्यान भटकाने का नया हथियार’ — एक राष्ट्र-एक चुनाव का विचार 2024 में मिले ‘जनादेश’ से उपजा

सरकार एक राष्ट्र-एक चुनाव के महत्व के लिए दो आसान तर्क दे रही है, लेकिन दोनों ही भ्रामक हैं.

दक्षिण भारत की GDP में वृद्धि अचानक नहीं हुई, इसमें केंद्र सरकार का बहुत बड़ा हाथ रहा है

हाल ही में ईएसी-पीएम के वर्किंग पेपर से पता चला है कि देश के जीडीपी में योगदान के मामले में दक्षिणी राज्यों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है. नई दिल्ली से रियायतों और नीतिगत समर्थन के इतिहास ने इसमें अहम भूमिका निभाई है.

श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान से सबक: अगर आपको धैर्य नहीं, तो आप लोकतंत्र के काबिल नहीं

श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन को सहजता से अंजाम दिया गया, जबकि बांग्लादेश में इसके विपरीत सत्तासीन नेता को देश छोड़ने पर मजबूर किया गया और ऐसे अ-राजनीतिक लोगों ने कमान थाम ली जो चुनाव जीतने के भी काबिल नहीं हैं.

जम्मू-कश्मीर चुनाव कई कारणों से ऐतिहासिक हैं — अनुच्छेद-370 उनमें से एक है

अनुच्छेद-370 को हटाए जाने को लेकर कुछ हलकों में गहरा असंतोष है, लेकिन चुनावों का बहिष्कार करने के बजाय इसने कश्मीरियों को मतदान करने के लिए प्रेरित किया है.

CM ममता का प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के साथ टकराव एक सबक है — अब वे एक असफल मुख्यमंत्री हैं

पिछले 42 दिनों की हड़ताल के दौरान, जूनियर डॉक्टरों को कोलकाता और उसके बाहर के लोगों से अभूतपूर्व समर्थन मिला और सीएम ममता बनर्जी की ओर से बहुत कम रियायतें दी गईं.

भारत से तुलना करके खामेनेई गाज़ा के दर्द को कमतर आंक रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकने की ज़रूरत

इसमें कोई संदेह नहीं है कि खामेनेई इस तरह के भ्रामक ट्वीट के जरिए कुछ मुस्लिम समुदायों के साथ कम समय में राजनीतिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं, यह एक ऐसा खेल है जिसमें वे नए नहीं हैं.

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असम में भाजपा लगाएगी हैट्रिक, लगातार तीसरी बार सत्ता में आएगी : नितिन नवीन

तिनसुकिया (असम), 29 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को दावा किया कि पार्टी असम में मुख्यमंत्री...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.