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Sunday, 29 March, 2026
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सीमा विवाद पर समझौते से पलट भी सकता है चीन, इसलिए भारत को रहना होगा चौकन्ना

ताज़ा घटनाओं को हमें कथनी और करनी में छत्तीस का आंकड़ा रखने की चीन की पुरानी चाल के मद्देनज़र पूरी सावधानी बरतते हुए ही आंकना होगा, चाहे ये घटनाएं कितनी अच्छी क्यों न दिखती हों.

प्रियंका गांधी की वायनाड की कहानी कई मोड़ ले सकती है – सफलता, खौफ, INDIA के लिए मनोरंजन

अब जब राहुल का फॉर्मूला विफल होता दिखाई दे रहा है, तभी सोनिया गांधी ने प्रियंका को राजनीति में पदार्पण की अनुमति दी है.

2024 में 99 सीटें जीतना कांग्रेस के वजूद के लिए खतरा है, पार्टी को अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है

उत्तर प्रदेश में सपा को आसानी से दी गई छूट, और महाराष्ट्र तथा झारखंड के मामले में काँग्रेस के ज्यादा व्यावहारिक रुख से जाहिर होता है कि उसे यह एहसास हो गया है कि उसने पिछले आम चुनाव के नतीजों को अपने लिए कुछ ज्यादा ही अनुकूल मान लिया था.

‘जिगरा’ आधुनिक भारत की उलझन को दिखाती है: जब नैतिकता के बिना भी कामयाबी मिल सकती है, तो इसकी क्या जरूरत है

भारत में नैतिकता कोई व्यक्तिगत और स्वनिर्मित अवधारणा नहीं है. यह ऐसी चीज़ है जो अक्सर इस बात से प्रभावित होती है कि समाज हमें क्या सिखाता है, हमसे क्या अपेक्षित है और धार्मिक व्यवस्थाएं क्या लागू करती हैं.

बांग्लादेश में अशांति अभी समाप्त नहीं हुई, यह भारत के लिए अच्छे संकेत नहीं

जिन लोगों ने शेख हसीना को महज़ 80 दिन पहले सत्ता से बेदखल किया था, उनके लिए शेख हसीना पर राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन का बयान आखिरी बात थी जिसे वह सुनना चाहते थे.

मोदी की 56 इंच सीने वाली डिप्लोमेसी भारत की नैतिक छवि के उलट है, ‘विश्वगुरु’ US-कनाडा नागरिकों को नहीं मार सकता

मोदी सरकार को आंतरिक जांच करवानी चाहिए थी और जहाँ जरूरी हो वहां ज़िम्मेदारी तय करनी चाहिए थी. अहम बात यह है कि विपक्षी नेताओं को भरोसे में लेना चाहिए था

चुनौतियों के बावजूद RSS 100 वर्षों से प्रासंगिक, दुनिया अब इसकी विचारधाराओं को अपना रही है

नवजात संगठन होने और इसके सदस्यों में मुख्य रूप से मध्यम वर्ग के हिंदू शामिल होने के कारण, आरएसएस के पास कभी भी अपने खिलाफ स्थापित किए गए नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए वित्तीय साधन नहीं थे.

कनाडा में सिख बागियों के ‘गैंगवार’ भारत का सिरदर्द नहीं, यह ठहरकर सोचने का वक्त है

सिख अलगावादी अगर सिरदर्द हैं तो उनके मेज़बान देशों के लिए हैं जहां वह बसे हुए हैं. उनका एक ‘अंडरवर्ल्ड’ है जिसमें गिरोहों के बीच खूनी लड़ाई चलती रहती है और उनके पड़ोसी असुरक्षित होते हैं, तो भारत इस सबसे क्यों परेशान हो?

पंजाब से कनाडा तक — स्टारडम, लॉरेंस बिश्नोई के लिए सब जेल से ही हुआ

सिद्धू मूसेवाला से लेकर सलमान खान, बाबा सिद्दीकी और अब कनाडा तक — लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह और बढ़ते प्रशंसक आधार से कोई बच नहीं सकता.

आरोप-प्रत्यारोप का फायदा नहीं, बहराइच हिंसा दिखाती है कि हिंदू-मुस्लिमों को अपने बीच की दरार पाटनी होगी

सोशल मीडिया यूज़र्स सांप्रदायिक झड़पों के दौरान एक पक्ष या दूसरे पक्ष को दोष देने पर ज़्यादा ध्यान देते हैं, बजाय इसके कि वे आम सहमति बनाने की कोशिश करें.

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केरल में कांग्रेस के ‘कमजोर’ प्रचार से धोखा मत खाइए. 2001 के बाद उसका यह सबसे मजबूत मौका है

बीजेपी के एक मजबूत तीसरे विकल्प बनकर सामने आने से कई राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. अब केरल की राजनीति सिर्फ दो पक्षों तक सीमित नहीं रही, भले ही यूडीएफ और एलडीएफ अभी भी ऐसा कहते हों.

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बिहार सरकार की अपनी पारेषण कंपनी बीएसपीटीसीएल को सूचीबद्ध कराने की योजना : बिजली सचिव

(अभिषेक सोनकर)नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) बिहार सरकार अपनी बिजली पारेषण कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की तैयारी कर रही है।...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.