पंजाब में कट्टरपंथ वापस आ गया है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सिख ग्रामीण बहुसंख्यक हैं, और इस चुनाव में पांच प्रमुख राजनीतिक ताकतों में से तीन इसके साथ खेल रही हैं.
2024 का चुनाव एक उम्मीदवार केंद्रित चुनाव ही था. भाजपा अगर सिर्फ मोदी के नाम पर वोट मांग रही थी, तो मोदी ही एकमात्र प्रतिद्वंद्वी थे जिन्हें पूरा विपक्ष हराने में जुटा रहा.
हाल ही में एक महिला ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें बताया गया कि कनाडा में ज़िंदगी कितनी ‘मुश्किल’ है – उसे अपने रिटर्न पार्सल के लिए लेबल प्रिंट करने पड़ते हैं और उन्हें भारत के विपरीत खुद ही छोड़ना पड़ता है.
कश्मीर घाटी में तीन तरह की टूटन साफ दिखती है— युवा लोग उग्रवाद से टूट रहे हैं, पाकिस्तान से जुड़ाव टूट रहा है, और सुरक्षा एजेंसियां लोगों और हथियारों के बीच के रिश्ते को तोड़ने में सफल हुई हैं
उनके घोर आलोचक भी मानते हैं कि भारतीय सेना में दूसरा कोई ऐसा जनरल नहीं था जिसमें उनके जैसी बौद्धिक गहराई, रणनीतिक दृष्टि और बदलाव की इच्छाशक्ति थी. वे सेना को खींचकर 21वीं सदी में ले आए थे.
भाजपा देख सकती है कि पश्चिम बंगाल में 2024 के चुनाव परिणाम के लिए ‘लक्ष्मीर भंडार’ के पीछे मतदाताओं का एकीकरण कैसे महत्वपूर्ण हो सकता है, जिसके लिए पार्टी ने खुद को तैयार कर लिया है.
अगर मोदी 2024 के चुनाव में बहुमत जीतते हैं, तो आरएसएस की पितामह बने रहने की राहें मुश्किल हो जाएंगी, लेकिन अगर वे विफल रहे, तो वो आरएसएस की संघ परिवार मे प्राथमिकता को सिद्ध करेगी.
भारत में जो सियासी हवा चल रही है, उससे सैन्य नेतृत्व को सजग हो जाना चाहिए कि सेना के बुनियादी मूल्यों को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.