कोई भी सरकार किसी एक रणनीति के आधार पर अपना भविष्य नहीं बनाती. इस तरह अगर चीज़ें प्लान-ए के अनुसार नहीं भी होती हैं, तो कम से कम एक प्लान-बी तो होता ही है. मोदी सरकार इस नियम का अपवाद हो सकती है.
जब भी भाजपा सांसदों की इंडिया ब्लॉक के साथ तीखी नोक-झोंक हुई, तो एनडीए घटक संसद में उत्सुक दर्शक बने रहे, जबकि INDIA ब्लॉक ने एक स्वर में प्रतिक्रिया व्यक्त की, भाजपा अलग-थलग रही.
जम्मू-कश्मीर के संकट के समाधान के तीन आयाम हैं — सीधी सैन्य टक्कर से बचा जाए, अलगावाद विरोधी ढांचे का दायरा बढ़ाया जाए और राष्ट्रप्रेमी नेताओं को साथ लेकर चला जाए.
मोदी की तीसरे कार्यकाल की सरकार ने काँग्रेस के जिन विचारों को बेमानी और मज़ाक बताकर खारिज कर दिया था उनमें से कई को अब लागू करने में जुट गई है. इसकी तस्दीक करती हैं हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों के मद्देनजर उसकी घोषणाएं
हमें ढाका में फर्जी ‘जनक्रांति’ का गुणगान करना बंद कर देना चाहिए और इसके बजाय अपने देश के बारे में सोचना चाहिए. अराजकता का जश्न मनाना वही गलती है जो अरब स्प्रिंग का स्वागत करने वालों ने की थी.
पश्चिम बंगाल के दो बार के मुख्यमंत्री, वामपंथ में सुधार के पोस्टर बॉय, जिन्होंने इस बात की परवाह नहीं की कि बिल्ली काली है या सफेद, जब तक वह चूहे पकड़ती है, अब इतिहास बन गए हैं.
उन्होंने इस्लामी भस्मासुर को जन्म दिया है, जिसने खुद उन्हें ही निगल लिया यानी उनका तख्ता पलट दिया. हसीना ने मुल्क से फरार होकर अपनी जान बचाई है, लेकिन यह भस्मासुर अब मुल्क में सभी प्रगतिशील विचारकों को कुचल डालेगा.
रूस-यूक्रेन युद्ध और इज़रायल-गाज़ा युद्ध में भारतीय जवानों की मौत इस संभावित नतीजे के संकेत देते हैं. खतरा यह भी है कि पूर्व अग्निवीर मौजूदा या भावी बागियों के समर्थन में बंदूक उठा सकते हैं.
RSS को हिंदुत्व के दोनों पोस्टर बॉय — कल्याण सिंह और योगी आदित्यनाथ बहुत पसंद हैं. 1999 के चुनावों के बाद सिंह को भाजपा के भीतर से विद्रोह का सामना करना पड़ा. 2024 के चुनावों के बाद योगी भी भीतर से घेरे में हैं.