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Friday, 30 January, 2026
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हेडगेवार का संघ और आज का RSS: सौ साल में मकसद से कितना भटका संगठन

हिंदुओं की हालत पर आरएसएस और भाजपा के इस मौन की तुलना डॉ. हेडगेवार की चिंताओं, वक्तव्यों से करें. तब साफ दिखाई पड़ेगा कि आरएसएस केवल अपने लाभ-हानि के हिसाब में डूबा रहा है.

2026 में पांच चुनाव—और पांच बातें, जिन पर नतीजे BJP और विपक्ष की राजनीति बदल देंगे

2026 के विधानसभा चुनाव बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे की पहुंच और उसकी सीमाओं की परीक्षा होंगे.

भारत ड्रोन आतंकवाद के लिए तैयार नहीं है, यह छद्म युद्ध का अहम हथियार बन चुका है

ड्रोन आतंकवाद से निपटने की भारत की चुनौती सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि सोच और संस्थाओं की भी है. असली समस्या यह है कि इसे हवाई सुरक्षा के लिए एक पूरी और गंभीर चुनौती के रूप में अब तक ठीक से पहचाना नहीं गया है.

1917 से 2025 तक: भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन क्यों गिन रहा है अंतिम सांसें

रूस की क्रांति से भारत की राजनीति तक, कम्युनिज्म ने शोषण-मुक्त समाज का सपना दिखाया. सौ साल बाद वही विचारधारा क्यों बौद्धिक म्यूजियम की वस्तु बन चुकी है.

बांग्लादेश की राजनीति में तारीक रहमान का अंधेरा अतीत रहा है, पहले उन्हें अपनी छवि सुधारनी होगी

आज बीएनपी के सामने एक बड़ी चुनौती उसके पूर्व सहयोगी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी का उभार है. फरवरी 2026 के चुनावों में दोनों पार्टियां आमने-सामने होंगी.

साल के अंत में राष्ट्रीय हित का कबूलनामा: फौज–इस्लाम का मेल लोकतंत्र को खत्म नहीं करता

इस साल मैंने नेशनल इंट्रेस्ट में जो लेख लिखे उनमें आपमें से कई को कुछ-न-कुछ गलत ज़रूर लगा होगा. मैं आपसे असहमत हो सकता हूं, लेकिन कुछ के लिए अपनी गलती कबूल करनी चाहिए. इस हफ्ते मैं उनमें से जो सबसे ताज़ा है उसकी बात करूंगा.

क्या उन्नाव केस में न्याय फिर 2018 वाली पटरी पर लौट गया? सेंगर के लिए ‘अधिकार’, पीड़िता के लिए ‘काल’

दिल्ली हाई कोर्ट ने न तो रेप पर सवाल उठाए और न ही उन अपराधों में कुलदीप सेंगर की दोषिता पर, जिनके लिए उसे सज़ा मिली है—इस वजह से उसकी सज़ा को निलंबित किया जाना और भी डरावना लगता है.

भारत में जलवायु संकट को ‘नॉर्मल’ मान लिया गया है, लेकिन कीमत देश के गरीब चुका रहे हैं

यह मान लेना कि अब चीज़ें ऐसी ही होंगी, चिंता की बात है. तापमान बढ़ेगा, पानी खत्म होगा, हवा दम घोंटने लगेगी और हम बस खुद को ढाल लेंगे.

अरावली को लेकर आर्थिक दिशा बदलने की ज़रूरत, खनन रोकें, इको-टूरिज़्म में निवेश बढ़ाएं

अगर हम सिर्फ यह सोचकर खुश हो जाएं कि सरकार को पीछे हटना पड़ा, तो हम एक खबर तो जीत लेंगे, लेकिन ज़मीन और पहाड़ खो देंगे.

अरावली ज़ोनिंग योजना को ताकतवर लोग आसानी से मोड़ सकते हैं, सरकार को डेटा पब्लिक करना चाहिए

शब्दों की ‘तकनीकी’ पुनर्परिभाषा एक खामी बन सकती है. निचली पहाड़ियां और उन्हें जोड़ने वाली संरचनाएं—जो अक्सर पारिस्थितिकी के लिहाज़ से बेहद अहम होती हैं, उनको गैरज़रूरी मानकर नज़रअंदाज किए जाने का खतरा है.

मत-विमत

अजित पवार की मौत ने भारतीय राजनीति में एक और ‘क्या होता अगर’ वाली बहस छोड़ दी है

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.

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नकाबपोश लोगों ने चंद्रपुर कांग्रेस पार्षदों को बस से अगवा करने की कोशिश की, मामला दर्ज

चंद्रपुर, 29 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के चंद्रपुर से कांग्रेस पार्षदों को नकाबपोश लोगों द्वारा बृहस्पतिवार शाम बस से कथित तौर पर अगवा करने की...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.