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Wednesday, 4 February, 2026
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राहुल गांधी कांग्रेस में जान फूंक सकते हैं, लेकिन उन्हें दशकों से बनी राजनीतिक छवि से बाहर आना होगा

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की 99 सीटों पर जीत ने दो दशकों से राहुल गांधी को परेशान कर रहे तीन नुकीले सवालों की धार खत्म तो कर दी है मगर उनके अब तक के सियासी सफर पर भी गौर करना ज़रूरी है.

पूजा खेडकर ने वही किया जिसे भारतीय समाज सहजता से स्वीकार करता है — भ्रष्टाचार को आकांक्षा मानना

भ्रष्टाचार भारतीय समाज में मौजूद है और पनपता है क्योंकि इसे अक्सर सामाजिक रूप से स्वीकार किया जाता है और कुछ मामलों में इसे आकांक्षा के रूप में भी देखा जाता है.

AIADMK गौंडर-थेवर संगठनों में सिमट गई है, यह एकजुटता का वक्त है, नहीं तो विभाजन दूर नहीं

2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव AIADMK के लिए चुनौती बने हुए हैं. अगर MGR के वफादारों की अध्यक्षता वाली ‘शांति समिति’ सफल नहीं होती है, तो एक और विभाजन हो सकता है.

बिहार में सोशल इंजीनियरिंग और विकास के ढहते पुल-पुलिया

इस तरह राजनीति के जातिकरण ने जातियों के राजनीतिकरण की प्रगतिशीलता को कुंद करके उसे सिर के बल खड़ा कर दिया है. फलस्वरूप बिहार पूरी तरह प्रतिगामी राजनीति और जातिगत संकीर्णता में फंसकर प्रगति के मार्ग से भटक गया है.

मोदी के लिए ‘जय जवान, जय किसान’ का फंदा, पुनर्जीवित विपक्ष के साथ 5 साल का टेस्ट मैच

मोदी की इस सरकार को भारी चुनौतियों का मुकाबला उस संपूर्ण सत्ता (जिसकी वह आदी हो चुकी थी) के बिना और एक-के-बाद-एक चुनावी चुनौतियों के बीच करना पड़ेगा.

SC के फैसले ने मुस्लिम महिलाओं को तलाक की अर्ज़ी डालने का अधिकार दिया, लेकिन कितनी महिलाएं ऐसा करेंगी

जब तक हम मूल कारण, जो कि व्यक्तिगत नागरिक संहिता है पर बात नहीं करेंगे, मुस्लिम महिलाओं को न्याय नहीं मिल पाएगा.

अब कोई राहुल को मज़ाक नहीं मानता, जब वे बोलते हैं, तो भाजपा हंसती नहीं बल्कि घबराती है

हर दिन कुछ नई निराशाजनक सुर्खियां सामने आती हैं: रेल दुर्घटना, ढहता हुआ हवाई अड्डा, परीक्षा पत्र घोटाला. भाजपा अब केवल शासन के आधार पर वोट नहीं मांग सकती.

करगिल युद्ध की 25वीं वर्षगांठ रक्षा मंत्रालय में बकाया सुधारों की सुध लेने की याद दिलाती है

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, उभरते खतरों और तकनीकी प्रगति के मद्देनजर एक बेहद सशक्त और लचीले रक्षा संरचना की जरूरत आज सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है.

अगर 182 से 6 सीटों पर आना चाहते हो तो हिंदू-मुस्लिम करते रहो- राम विलास पासवान

10 दिसंबर 1998 को, हाजीपुर के तत्कालीन सांसद लोकसभा में कहा था, 'अगर हम 'अल्पसंख्यक' शब्द की सही व्याख्या करना सीख लें, तो हममें यह भावना विकसित हो जाएगी कि हम जिनके खिलाफ लड़ रहे हैं, उनका खून भी हमारे ही जैसा है.'

‘क्या बांग्लादेश सेक्युलर है?’ 1971 के युद्ध में हिंदू नरसंहार का ‘ज़िक्र’ न होना डॉक्युमेंट्री पर सवाल उठाता है

'बे ऑफ ब्लड' दर्शकों को अपनी तरफ खींचने वाली डॉक्यूमेंट्री है, लेकिन अधूरी है. यह 1971 की कहानी के पूर्वी पाकिस्तान के हिंदुओं की टारगेटेड हत्याओं जैसे एक महत्वपूर्ण पहलू को नज़रअंदाज़ करती है.

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वाराणसी में पुलिस के साथ मुठभेड़ में एक लाख का इनामी बदमाश ढेर

वाराणसी/लखनऊ, 3 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के साथ मुठभेड़ में मंगलवार रात एक लाख रुपये का इनामी एक...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.