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Wednesday, 4 February, 2026
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UPSC में मुस्लिम भागीदारी बढ़ाना ज़मीनी सच्चाई है, यह उत्साही और चिंताजनक दोनों है

हमें निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इतनी दूर जाने की ज़रूरत नहीं है. यूपीएससी की कोशिश बेहतर कारणों से होनी चाहिए, न कि बहिष्कार, हाशिए पर जाने या विशेषाधिकारों की इच्छा से.

भाजपा बंगाल को फिर से विभाजित करना चाहती है, यह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के हिंदू बंगाल का अलग रूप है

भाजपा की योजना पश्चिम बंगाल को इस तरह से विभाजित करने की है कि ममता बनर्जी के तथाकथित मुस्लिम वोट बैंक में बिखराव हो और उसे चुनाव जीतने में मदद मिले. अच्छी खबर यह है कि बंगाल भाजपा में मतभेद है.

10 साल बाद, मोदी ने भारतीय राजनीतिक आम सहमति को स्वीकार लिया है : मध्यम वर्ग को नज़रअंदाज़ करना

मध्यम वर्ग, हालांकि, काफी हद तक भाजपा के प्रति वफादार है, अब उसके पास दूसरे विकल्प हैं. बजट 2024 पर नाराज़गी भरी प्रतिक्रिया से पता चलता है कि वे कैसे विश्वासघात महसूस करते हैं.

चीन लगातार रणनीतिक गलती करता रहता है—क्वॉड में भारत की भूमिका को कम आंकना उसमें से एक है

चीन क्वॉड में भारत और ऑस्ट्रेलिया के योगदान को कमतर आंकता है, लेकिन कहानी यह बताती है कि ये देश अपने द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने को लेकर ज़्यादा चिंतित हैं.

एक अमेरिकी ने मेरे जैसे IAS अधिकारी को सही सवाल पूछना सिखाया- आखिर क्यों जेम्स स्कॉट है महत्त्वपूर्ण

उन्होंने राज्य-व्यवस्था को कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ के वैचारिक चश्मे से या मेकियावली की किताब ‘द प्रिंस’ या वेबर की पदानुक्रम वाली व्यवस्था या सर्वहारा की तानाशाही की मार्क्सवादी अवधारणा के नहीं बल्कि राज्य-व्यवस्था के कार्यों के नजरिए से देखा संजीव चोपड़ा

मोदी के लिए विपक्षी CMs का कोई सम्मान नहीं, नीति आयोग का बहिष्कार दिखाता है कि विरोध होने वाला है

आज हर विपक्षी शासित राज्य ने केंद्रीय फंड में भेदभाव की शिकायत की है. केंद्रीय बजट 2024 भेदभावपूर्ण संघवाद का एक स्पष्ट उदाहरण है.

ताज़ा बजट पर मध्यम वर्ग का गुस्सा किसी रुठे हुए प्रेमी की तरह है, यह लंबा नहीं चलेगा

मोदी सरकार ने इस बजट और इसके संकेतों में जो गलती की है, वह यह है कि वह अपने आम तौर पर आशावादी संदेश, ‘भारत उन्नति कर रहा है, विकास और तेज होगा, बाजार बहुत गर्म हैं’ से दूर चली गई है.

बजट काफी जटिल संदेश देता है, यह दिखाता है कि बीजेपी को ‘BASE’ पसंद है

इस बजट की कोई कमजोरी है तो यह कि वह कोई आर्थिक संदेश नहीं दे रहा है. आर्थिक सुधारों पर कोई बड़ा बयान नहीं; निजीकरण, विनिवेश का कोई जिक्र नहीं; न करों में कोई बड़ी छूट, प्रोत्साहनों और विनियमन को लेकर कोई कदम नही.

जो युद्ध भारत के मतलब का नहीं उसमें शामिल होने का दबाव डालने का किसी को हक़ नहीं 

अमेरिका भारत की चिंताओं को दूर करे और भारत पर उंगली उठाने से पहले उन उपदेशों पर खुद अमल करे जो वह दूसरों को देता है. रणनीतिक स्वायत्तता कई कारणों से भारत के हित में है

अग्निपथ योजना को फुटबॉल का खेल बनने से बचाएं, प्रस्तावित सेवा अवधि पर सर्वसम्मति ज़रूरी

‘सीडीएस’ और तीनों सेनाध्यक्ष तत्काल और बड़ा कदम यह उठा सकते हैं कि वह सेवा अवधि की लंबाई के बारे में एक फैसला करें. इसके लिए चार साल की सेवा अवधि खत्म होने का इंतजार करने की ज़रूरत नहीं है.

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नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) दिल्ली में 17 वर्षीय एक लड़के ने उसके साथ कथित तौर पर जोर-जबर्दस्ती की कोशिश करने पर एक रेलवे...

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