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Sunday, 29 March, 2026
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BJP ‘एक देश, एक चुनाव’ योजना में 10 साल की देरी कर चुकी है, मोदी अब उतने लोकप्रिय नहीं हैं

एक राष्ट्र, एक चुनाव को उचित ठहराने के लिए सरकार द्वारा अनगिनत समितियां गठित की गई हैं और उनके निष्कर्ष कमजोर और अविश्वसनीय रहे हैं.

‘एक देश, एक चुनाव’ बुरा विचार है – लेकिन इसलिए नहीं की विपक्ष को ‘मोदी डर’ है

‘सामान्य’ चुनावों में वोटर्स राष्ट्रीय और विधानसभा चुनावों में फर्क समझने लगे हैं और अलग-अलग तरीके से वोट करते हैं. ऐसा ही समकालिक चुनावों में भी होगा, इसमें कोई शक नहीं है.

यून का असफल तख्तापलट: साउथ कोरिया में लोकतंत्र के भविष्य पर चिंता बढ़ाई

दक्षिणपंथी लोकलुभावनवाद के कार्यक्रम पर चुने गए यून ने सत्ता को मजबूत करने के लिए सैन्यवाद को बढ़ावा दिया. उनके प्रतिद्वंद्वी पर बार-बार मुकदमा चलाया गया. ऐसा लगता है कि दक्षिण कोरिया का अतीत बिलकुल भी अतीत नहीं था.

भारत को चुनावी मोड से बाहर निकलना होगा—’एक देश, एक चुनाव’ वोटर्स और पार्टियों के लिए होगा फ़ायदेमंद

एक राष्ट्र, एक चुनाव के आलोचक मतदाताओं की थकान के बारे में नहीं सोच रहे हैं. जब चुनाव कई बार और लगातार होते हैं, तो शिक्षित मतदाता भी उन्हें एक अतिरिक्त छुट्टी के रूप में देखता है.

खलील हक्कानी की हत्या अफगानिस्तान में सत्ता संघर्ष को दर्शाती है, कई देशों पर होगा असर

खलील-उर-रहमान हक्कानी - जलालुद्दीन हक्कानी के भाई, उनके उत्तराधिकारी सिराजुद्दीन के चाचा, और अफगानिस्तान में 1,000 से अधिक आत्मघाती बम धमाकों के लिए जिम्मेदार नेटवर्क के एक प्रमुख सदस्य - इस्लामिक स्टेट द्वारा किए गए आत्मघाती हमले में मारे गए.

बीजेपी ने ‘डीप स्टेट’ का आरोप लगा कर भारत-अमेरिका रिश्ते में पेंच फंसाया

भाजपा ने केवल अमेरिकी ‘डीप स्टेट’ पर हमला नहीं किया. विचारधारा के स्तर पर यह विचार कुछ अरसे से मजबूत हो रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसे वैधता दी है.

सीरिया के पतन के बाद, अल-कायदा के भारतीय जिहादियों का ख़लीफ़ा बनने का सपना फिर से जागा

एक खुफिया अधिकारी का कहना है कि तहरीर अल-शाम का उभार फिर से हिंसक जिहाद के विचारों को बढ़ा सकता है, जो 2018 में इस्लामिक स्टेट और अन्य समूहों के खत्म होने के बाद शांत हो गए थे।

कांग्रेस पार्टी एक परिवार का व्हाट्सएप ग्रुप है, इसके नए सदस्य जॉर्ज सोरोस हैं

लोकतंत्र को पटरी से उतारने का सबक नेहरू वंश की राजनीति के स्कूल में सिखाया जाता है. अब राहुल के पास ऐसे भाई-बहन हैं, जो लोकसभा में उनके साथ खड़े होंगे, जब वह अपने लोकतंत्र-विरोधी भाषण की शुरुआत करेंगे.

अन्नामलाई, किशन रेड्डी, विजयेंद्र — दक्षिण में भाजपा के रणबांकुरे क्यों जोश खो रहे हैं

अब जबकि प्रधानमंत्री मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में हैं, शायद भाजपा दक्षिणी राज्यों में लड़ने की इच्छाशक्ति खो रही है. इसके बजाय वह उत्तर में अपनी बढ़त को मजबूत करना चाहती है.

भारत के लोग नहीं जानते उनका क्रेडिट स्कोर कैसे तय होता है, ‘सिबिल’ पर सरकारी निगरानी ज़रूरी

लॉवर ‘सिबिल स्कोर’ बैंकों को ऊंची ब्याज दर वसूलने की सुविधा देता है, इससे सवाल उठता है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों, बैंकों, वित्तीय संस्थाओं, और क्रेडिट ब्यूरो के बीच साठगांठ तो नहीं है.

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खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

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दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा:मंत्री कपिल मिश्रा

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शनिवार को कहा कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफडी) प्रतिभाओं के लिए...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.