देखा जाए तो रक्षा के क्षेत्र से संबंधित संयुक्त बयान में सभी उचित मुद्दों को छुआ गया है. लेकिन भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के पिछले दो दशकों में वादे तो बहुत किए गए लेकिन उनसे बहुत कुछ हासिल नहीं हुआ.
कई मायनों में, एमके स्टालिन के पत्र ने वही व्यक्त किया जो कई दक्षिण भारतीय महसूस करते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि वे कहें. हिंदी पट्टी की विफलताओं से दक्षिण भारत को कब तक पीछे रखा जाएगा?
हां, हमारे चारों ओर अपराध है, लेकिन जब यह हमारे घरों के अंदर टीवी स्क्रीन पर चौबीसों घंटे सामने आ रहा हो, तो कुछ न कुछ तो करना ही होगा. मैं हमेशा इस डर में रहती हूं कि आखिर क्या होगा.
कोई सिर्फ सोच सकता है कि एकनाथ शिंदे के डिप्टी के तौर पर देवेंद्र फडणवीस कितने दुखी रहे होंगे, लेकिन अब सिक्का बदल गया है और शिंदे को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
मुझे विश्वास है कि संवेदनशीलता से कदम उठाया जाए तो अच्छी तादाद में नक्सल लड़ाके अंडरग्राउंड ज़िंदगी छोड़ देंगे और राष्ट्र की मुख्यधारा में आ जाएंगे. आखिर हम किन्हें मार रहे हैं? वह तो हमारे ही नागरिक हैं.
एक बात तो साफ है — हर राजनीतिक दल महिला सशक्तिकरण का तमगा पहनना चाहता है. सिवाय इसके कि सत्ता में एक महिला का होना अपने AAP में महिला-समर्थक नीतियों का मतलब नहीं है.
छात्रों ने कहा कि केआईआईटी यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें बेदखल करने के आदेश के बाद उन्हें नेपाल लौटने के लिए उधार लेना पड़ा, जिसके कारण नेपाल के प्रधानमंत्री ने दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को भुवनेश्वर भेजा.